बस्ती। पीएम और सीएम चाहें तो भी चारागार की जमीन की नवैयत नहीं बदल सकते, लेकिन यहां पर तो सदर तहसील के एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, कानूनगो और लेखपाल ने मिलकर करोड़ों की जमीन को लाखों में बेच दिया। इसी लिए बार-बार कहा जाता है, कि जो काम पीएम और सीएम नहीं कर सकते, वह लेखपाल कर देते है। लेखपाल चाहे तो चारागाह की जमीन क्या जिलेभर की बंजर की जमीन बेच दे, बस उसकी वाजिब कीमत मिलनी चाहिए। एक बार अगर लेखपाल की कलम चल गई, तो उसे एसडीएम को कौन कहे, डीएम भी कुछ नहीं सकते, जो कुछ होना होगा, वह न्यायालय से होगा। यही लेखपालों की पहचान है। तभी तो एंटी करप्षन के हत्थे लेखपाल ही चढ़ते है। पहले तो यह पांच हजार घूस लेते पकड़े जाते थे, लेकिन अब तो 50 हजार लेते पकड़े जा रहे है। लेखपालों के वे लोग सबसे अधिक प्रिय होते हैं, जो पैसे वाले होते हैं, यह गरीब को इस लिए घास नहीं डालते क्यों कि यह अच्छी तरह जानते हैं, इससे क्या मिला? गरीब बेचारा हजार पांच सौ से अधिक दे नहीं सकता है, और पैसे वाले यह कहते हैं, कि लेखपाल अपनी कीमत बोलो, जाहिर सी बात हैं, पलड़ा जिस ओर भारी रहेगा, झुकाव भी उधर ही रहेगा। ऐसा ही एक मामला सदर तहसील के ग्राम डारीडीहा का सामने आया। लेखपाल और तहसील की टीम ने पहले गाटा संख्या 359 रक्बा 253 हे. की जमीन जो कि चकबंदी से पहले चारागाह के नाम से दर्ज हैं, उसे पहले राम कृष्ण पुत्र समिरन निवासी डारीडीहा के नाम फर्जी तरीके से कर दिया। तहसील वालों ने इसे भारी रकम लेकर छिपा दिया। फिर उसके बाद 8-9 माह पहले मीना देवी ने फर्जी तरीके से राम कृष्ण से बैनामा करवा लिया। जब कि यह चारागाह के नाम की जमीन हैं, और इसे न तो बेचा जा सकता है, और न किसी को पटटे पर ही दिया जा सकता है। छह दिसंबर 24 को मीना देवी पत्नी राम सवांरे को साढ़े सात लाख में 0.1200 हे. बेच दिया। अब इसी पर मीना देवी प्लाटिगं कराकर उसे बेच रही हैं, अब इस जमीन की कीमत लगभग दो करोड़ होगी। षिकायतकर्त्ता सुमंत कुमार पांडेय ने इसकी शिकायत डीएम से करते हुए चारागाह की जमीन को वापस चारागाह के खाते के रुप में दर्ज करने की मांग की है। देखा जाए तो इस मामले को ग्राम प्रधान की ओर से विरोध करना चाहिए और भूमि प्रबंधन समिति के अध्यक्ष होने के नाते फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराना चाहिए, चूंकि एलएमसी का सचिव लेखपाल होता है, इसी लिए प्रधान कोई कार्रवाई इस लिए नहीं करवा पाते क्यों कि प्रधानजी खुद सरकारी जमीनों पर कब्जा किए रहते है। यह पहला मामला नहीं हैं, जब सदर तहसील का सामने आया। इससे पहले न जाने कितने मामले सामने आए, जिसमें लेखपाल ने पैसा लेकर बंजर की जमीन को दूसरे के नाम कर दिया। वैसे सबसे अधिक सरकारी जमीनों पर हर्रैया तहसील में भूमाफियों का कब्जा हैं, यहां के लेखपाल हजार दो हजार नहीं लेते, बल्कि लाख दो लाख्पा लेतें हैं, और इसके एवज में लेखपाल पुलिस बनकर काष्तकार की न सिर्फ पिटाई करते हैं, बल्कि उसे बंधंक भी बनाते हैं। इस तरह का एक मामला हाल ही में परसरामपुर थाना के ग्राम बनगवां खास का सामने आ चुका है।
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- Last Update 30 Apr, 05:01 PM
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