बस्ती। संजय सिंह पगार और प्रेमचंद्र की लड़ाई कमीशन को लेकर नहीं, बल्कि अहम को लेकर है। अगर प्रेमचंद्र, संजय पगार को अपात्र न किए होते तो आज एओ रुसवा न हुए होते। मामला संतकबीरनगर के ठेके को लेकर बताया जा रहा है, इसे लेकर न जाने क्यों एओ, संजय पगार से खुन्नस खाए हुए थे, और यह नहीं चाहते थे कि इतना बड़ा ठेका संजय को मिले, वह किसी और ठेकेदार के पक्ष में रहे। इसी लिए इन्होंने इनके टेंडर वाले कागजात पर आपत्ति लगाकर ‘प्रहरी एप’ पर भेज दिया। संजय पगार भी अच्छी तरह जानते थे, कि उनका पेपर अधूरा हैं, और वह टेंडर में प्रतिभाग करने से वंचित भी हो सकते है। कहा जाता है, कि इसके लिए उन्होंने लखनउ में सेटिगं किया। लेकिन जब लखनउ से ओके हो गया, और अधीक्षण अभियंता के यहां टेंडर निकालने को आया तो प्रेमचंद्र और साहब ने मिलकर संजय पगार को अपात्र कर दिया। जिसके चलते इन्हें करोड़ों का टेंडर मिलते-मिलते रह गया। विभाग वाले भी कहते हैं, कि जब लखनउ वाले ने ओके कर दिया था, तो प्रेमचंद्र को क्या आवशयकता कि टांग अड़ाने की। जो भी बाते लिखी जा रही है, वह चर्चा के आधार पर है, रिपोर्टर ने प्रेमचंद्र से मिलने भी गया, लेकिन नहीं मिले, 9984803210 पर बात करने का भी प्रयास किया, लेकिन रिस्पांस नहीं मिला।
आज आप लोग जितने भी लखपति, करोड़पति और अरबपति ठेकेदार देख रहे हैं, वे कभी पीडब्लूडी में लाख दो लाख के काम के लिए अधिकारियों और टेंडर बाबू को सुबह शाम आफिस और आवास पर जाकर अमूल मक्खन लगाते थे। कहना गलत नहीं होगा कि पीडब्लूडी की बदौलत, सुडडू सिंह और संजय सिंह पगार जैसे न जाने कितने ठेकेदार हैसियत वाले हो गए। आज जो लोग संजय पगार को जानते हैं, वह राजकिशोर सिंह और पीडब्लूडी के कारण है। सालों से यह पीडब्लूडी में ठेका पटटी करते आ रहे है। इस विभाग ने इन्हें इतना सबकुछ दिया, जितना इन्हें पापर्टी के कारोबार से नहीं मिला होगा। इन जैसे ठेकेदारों ने खुद तो कमाया, साथ ही टेंडर बाबू और साहबों को भी मालामाल कर दिया। अगर ऐसा न होता तो एक लाख से नीचे वेतन पाने वाले प्रेमचंद्र के पास अपार संपत्ति के होने की शिकायत न की गई होती। वैसे भी ठेकेदार और टेंडर बाबू को सिक्के का दो पहलू माना जाता है। अमूमन बहुत कमऐसे होते हैं, जो एक दूसरे के भ्रष्टाचार की पोल खोलते है। विभाग के लोगों का कहना है, कि एक दूसरे की पोल तब खोली जाती है, जब किसी पक्ष ने दूसरे पक्ष का नुकसान किया हो या फिर आवशयकता से अधिक डिमांड किया हो। वरना दोनों एक दूसरे के बारे में अच्छी तरह जानते हैं। संजय पगार और प्रेमचद्रं के मामले में वही हुआ जो ‘राजकुमार’ ने कहा था, कि ‘जानी जिसके घर शीशें के होते हैं, वह दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं फेंकते’। प्रेमचंद्र यह जानते हुए भी उनका घर शीशे का हैं, फिर भी उन्होंने संजय पगार के घर पर पत्थर फंेका। इसी लिए कहा जा रहा है, कि संजय पगार ने एओ/टेंडर बाबू को यूंही नंगा नहीं किया। यह तो दुनिया का दस्तूर हैं, कि जब आप किसी नुकसान को पहुंचाएगें तो वह भी आप को नुकसान पहुंचाएगा। यही संजय सिंह पगार और प्रेमचद्रं के मामले में हुआ। वरना संजय पगार जैसा ठेकेदार/नेता जिसने आज तक किसी की शिकायत नहीं किया हो, अगर वह शिकायत करता तो माना जा सकता है, कि इन्हें प्रेमचंद्र से कितना नुकसान और पीड़ा पहुंची होगी। कहा भी जाता है, कि ठेकेदार और अधिकारी कभी आर्थिक नुकसान बर्दास्त नहीं करते, खासतौर पर जब, किसी को यह लग जाए कि भलां व्यक्ति के चलते उसका नुकसान हुआ है। सोमवार को दिनभर पीडब्लूडी कार्यालय में इस बात को लेकर चर्चा हो रही थी, कि आखिर कौन सी ऐसी बात हो गई, जिसे लेकर इतनी बड़ी शिकायत हो गई, यहां पर बदनामी शिकायत करने वाले की नहीं, बल्कि विभाग और कमीशन के पैसे से महल और कंपनी खड़ा करने वाले एओ/टेंडर बाबू। एओ/टेंडर बाबू का मतलब कागज में तो टेंडर बाबू कोई और है, लेकिन कमान एओ के पास रहता। कार्यालय वाले भी कह रहे हैं, कि प्रेमचंद्र ने संजय पगार के साथ ठीक नहीं किया। बहरहाल, संजय और प्रेमचंद्र की घटना से उन लोगों को सबक लेना चाहिए, जो खुद तो रहते हैं, शीशे के घर में, लेकिन दूसरों के घरों में पत्थर फेकतें है। कार्यालय के लोगों का कहना है, कि संजय पगार को प्रेमचंद्र के साथ अधीक्षण अभियंता को भी लपेटने चाहिए था, क्यों कि सिर्फ एओ के चाहते से कुछ नहीं हुआ, जब तक एसई नहीं चाहे होगें। ध्यान देने वाली यह बात है, कि संजय पगार ने यह शिकायत भ्रष्टाचार को मिटाने की नीयत से नहीें किया, बल्कि हुए नुकसान के कारण किया। सवाल, उठ रहा है, कि जब प्रेमचंद्र 25 सालों से हैं, और इनके पास अपार संपत्ति हैं, तो फिर इससे पहले क्यों नहीं शिकायत किया, जबकि यह जिस पार्टी के प्रदेश पदाधिकारी उस पार्टी के मंत्री आशीष पटले जिले के प्रभारी रहे। दोनों में से कोई भी दूध का धूला हुआ नहीं है। संजय पगार का इतने सालों तक चुप रहना, इन्हीं पर ही सवाल उठ रहा है।
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