बस्ती। बनकटी ब्लॉक का चर्चित ग्राम पंचायत खोरिया में शासन के निर्देश पर पहली बार चौपाल लगाने के लिए सीडीओ की अगुवाई में डीसी मनरेगा, डीपीआरओ, डीडीओ और बीडीओ की टीम पहुंची। चौपाल लगाने के पीछे सरकार की मंशा गांव के विकास को जानना। इनमें किसी को भी नहीं मालूम था, चौपाल में क्या होने वाला है, वैसे सभी अधिकारियों को इस गांव के विकास ओैर शिकायतों के बारे में पता था, लेकिन यह नहीं मालूम था, कि चौपाल लड़ाई का मैदान बन जाएगा। चौपाल में स्थानीय विधायक दूधराम, अरविंद पाल, संुरेंद्र तिवारी और रवि चंद्र पांडेय जैसे कई लोग मौजूद रहे। चौपाल में और तो कोई नहीं बोला, लेकिन जब अधिवक्ता दुर्गा प्रसाद उपाध्याय जैसे ही माइक पर गांव के भ्रष्टाचार को एक-एक करके गिनाने लगे तो प्रधान के परिवार के लोग अचानक वकील पर टूट पड़े, माइक को छीन लिया, देखते ही देखते चौपाल लड़ाई का मैदान बन गया, सीडीओ सहित अन्य अधिकारी यह देख दंग रह गए, कि वह किस गांव में आ गए। लोगों का कहना है,

कि अगर वकील साहब के हाथ से माइक न छीनी होती और धक्कामुक्की न किया गया होता तो भ्रष्टाचार की सारी परते खुल जाती है। जब चौपाल झगड़े में बदल गया तो कुछ लोग वीडियो बनाने लगें, देखते ही देखते वीडियो वायरल हो गया। गांव वालों का कहना था, कि चूंकि पिछले पांच सालों में इस गांव के कामकाज को लेकर किसी ने आवाज नहीं उठाया था, पहली बार किसी ने आवाज उठाने की हिम्मत की, लेकिन उसे भी पूरा नहीं बोलने दिया गया। डेढ़ मिनट में इतने सारे एक साथ आरोप लगा दिया गया, कि प्रधान का परिवार घबड़ा गया, और उन लोगों को लगा कि अगर वकील साहब को बोलने से नहीं रोका गया, तो अधिकारियों और विधायक के सामने सारी इज्जत मिटटी में मिल जाएगी, बल्कि विधायकजी ने कहा भी जो बोलना चाहता है, उसे बोलने दिया जाए, आखिर चौपाल इसी लिए तो लगाया गया, कि गांव के लोग अपनी परेशानी और योजनाओं के बारे में बता सकें। सीडीओ सहित अन्य अधिकारियों को लग गया कि गांव में सबकुछ ठीक नहीं है, अगर ठीक होता तो चौपाल में बिघ्न डालने का प्रयास नहीं होता। सवाल उठ रहा है, कि जिस गांव के लोग चौपाल में भी अपनी बात न कह सके, उस चौपाल का क्या मतलब? प्रधान के परिवार को भी ऐसे में सयंम बरतना चाहिए, था, इन्हें यह सोचना चाहिए, था, इस चौपाल में जिले भर के अधिकारी मौजूद है। बहरहाल, अधिकारियों के सामने जो चौपाल में उभर कर सामने आया, उससे विकास पर सवाल अवष्य उठें। इससे गांव और प्रधान एवं उनके परिवार की छवि भी खराब हुई। इसका प्रभाव चुनाव पर पड़ सकता है। चौपाल के विवाद को देखते हुए चुनाव के दौरान इस गांव में सुरक्षा व्यवस्था का विशेष प्रबंध करना होगा, तभी निष्पक्ष चुनाव हो सकेगा। इस घटना के बाद सीडीओ को चौपाल लगाने में सावधानी बरतनी होगी। खासतौर से विवादित ग्राम पंचायत में।