बालू डंप करने का लाइसेंस लिया आठ हजार और किया 20 हजार घन मी.
बस्ती। आखिर एक आम आदमी बालू के माफियों से लड़े तो कैसे लड़े? आवाज उठाता है, तो उसे मारापीटा जाता है, पुलिस वाले भी उन्हीं का साथ देते हैं, और फर्जी मुकदमा भी उनके कहने पर लिख देते हैं, ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है, कि बालू का अवैध खनन और कारोबार रुके तो कैसे? जिसकी जिम्मेदारी हैं, वह पैसा लेकर सो रहा है, और जिसकी नहीं हैं, वह बालू माफियों से मार खा रहा है। सच तो यह है, कि बालू के इस अवैध कारोबार को कोई रोकना ही चाहता, सभी इसी के जरिए कमाई करना चाहते हैं, जब कि यह चिभाग सीधे एडीएम के अधीन होता है, उसके बाद भी स्थानीय स्तर पर न तो सुनी जाती है, और न कार्रवाई ही होती है, मजबूर होकर लोगों को राजधानी की ओर रुख करना पड़ रहा है, जिस उम्मीद को लेकर लखनऊ जाते हैं, वह उम्मीद भी पूरी नहीं होती, ऐसा लगता है, मानो बालू का अवैध कारोबार करने वालों का जाल स्थानीय से लेकर राजधानी तक फैला हुआ है। पिछले कई दिनों से हर्रैया तहसील के ग्राम संसारपुर के लोग गाटा संख्या 156ख में बालू के अवैध डंपिगं को लेकर लड़ाई लड़ रहे हैं, पूर्व भाजपा के जिला उपाध्यक्ष सुरेंद्र प्रताप सिंह की अगुवाई में यह लोग मुख्यमंत्री और खनन निदेशक से मिले, और उनसे मिलकर कहा कि गाटा संख्या 156ख में 40 हजार घन मीटर सफेद बालू डंपिगं के लिए राजमंगल पाठक पुत्र रामलखन पाठक निवासी ग्राम पूरेभूप के नाम लाइसेंस जारी हुआ। मौके पर लाइसेंसी के द्वारा 8000 घन मी. बालू बरदिया लोहार की खदान से डंपिगं के लिए खरीदा गया, वर्तमान में 20 हजार घन मी. डंप किया गया, कहा कि लाइसेंसी के द्वारा रात्रि में सरजू नदी से अवैध रुप से बालू खोदकर लाकर डंप कर दिया गया। लाइसेंसधारक को नियमानुसार डंप वाले स्थान पर मात्रा और लाइसेंसधारक का नाम अंकित करना चाहिए। कोई बोर्ड भी मौके पर नहीं लगाया गया। कहा कि लाइसेंसी के द्वारा नियम विरुद्व आठ हजार के स्थान पर 20 हजार घन मी. बालू को डंप किया गया। विभाग की ओर से रायल्टी की पर्ची भी नहीं जारी की गई। जिससे राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है। अवैध डंप किए गए बालू को जप्त करने और कार्रवाई करने की मांग की गई।
0 Comment