बस्ती। सीएमओ के लूट गैंग की संख्या बढ़ती ही जा रही है, अधिक से अधिक लूट किया जा सके इसके लिए लुुटेरों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे-ऐसे खूंखार और बदनाम लुटेरों को गैंग में शामिल किया जा रहा है, जिन्हें फर्जी नियुक्ति और फर्जी भुगतान के मामले में जेल में होना चाहिए था। लेकिन तत्कालीन सीएमओ डा. जेएलएम कुशवाहा जो खुद फंस रहे थे, के चलते जेल जाने और निलंबित होने से बच गए, इनका नाम हैं, प्रमोद कुमार मिश्र। गैंग में इन्हें डा. बृजेश शुक्ल और फार्मासिस्ट अजय मिश्र की सिफारिश पर गोरखपुर से लाकर शामिल किया गया, इन्हें बस्ती में पुनः लाने के लिए एक पूर्व माननीय का भी सहारा लिया गया। ऐसा लगता है, कि सीएमओ और उनके लूटपाट की टीम प्रमोद कुमार मिश्र को गैंग में शामिल करने के लिए उतावले थे, तभी तो ज्वाइन करते ही इनके लिए न सिर्फ कमरे का इतंजाम किया गया, बल्कि वे सारी जिम्मेदारी दी गई, जहां से लूटपाट किया जा सके। खास बात यह है, कि यह बस्ती से जाने के बाद पांच साल तक गोरखपुर रहे, लेकिन इनका इतिहास देखते हुए इन्हें कोई भी ऐसी जिम्मेदारी नहीं दी गई, जिससे यह लाभ ले सके। एक तरह से यह पिछले पांच साल तक गोरखपुर में बनवास काट रहे थे, लेकिन भला हो डा. बृजेश शुक्ल और अजय मिश्र का जो इनके बनवास पर विराम लगाया, और बस्ती सीएमओ के यहां ले आए। बस्ती लाने के लिए इनकी माताजी को 100 फीसद विकलांग दिखाया गया, माताजी की सेवा के नाम पर इनका तबादला बस्ती हुआ, जब कि माताजी की सेवा करने के लिए पहले से ही इनका छोटा भाई टीबी अस्पताल में कार्यरत है। सीएमओ कार्यालय में घुसते ही इनका ऐसा स्वागत किया गया, और फटाफट कमरा साफ करवाकर कुर्सी मेज दिया गया, मानो यह कोई जंग जीत कर आए हो। एक ऐसे व्यक्ति का हीरो की तरह स्वागत किया गया, जिसने फ्राड किया, और जिसे जांच टीम ने दोषी मानते हुए कार्रवाई करने की सिफारश किया, कार्रवाई तो नहीं हुई, अलबत्ता पुरस्कार के रुप में बस्ती अवष्य दे दिया गया। सीएमओ कार्यालय में अनेक बाबूओं से जूनियर होते हुए भी इन्हें महत्वपूर्ण प्रभार दिया, जिसे लेकर असंतोष व्याप्त है। जिस पटल पर इन्होंने फर्जी नियुक्ति करवाया, और लगभग पांच लाख का फर्जी भुगतान करवाया, उसी पटल को पुनः दे दिया गया। यह वही बाबू हैं, जिसने फर्जी विवाह करवाकर 20 साल से बड़ी पार्वती देवी नामक महिला के साथ प्रदीप कुमार से शादी करवा दिया, पार्वती के मरने के बाद मृतक आश्रित के रुप में उनकी पुत्री गरिमा भारती को नौकरी मिलना चाहिए था, लेकिन प्रमोद कुमार मिश्र ने पैसे के लालच हक मारकर ऐसे प्रदीप कुमार नामक व्यक्ति के साथ शादी करवा कर नौकरी दे दिया जो पहले से शादीशुदा है, फर्जी नौकरी दिलवाने के नाम पर तत्कालीन सीएमओ और डा. जेएलएम कुशवाहा और लिपिक प्रमोद कुमार मिश्र ने लगभग 10 लाख नकद और पांच लाख भुगतान में से आधा-आधा लिया। वाह रे सीएमओ और उनके लूटपाट करने वाले गैंग। बार-बार सवाल उठ रहा, कि जिस व्यक्ति पर पहले से ही गंभीर आरोप लगे हो, और जिसे जांच टीम ने दोषी माना हो, उस व्यक्ति को इतना मान और सम्मान क्यों? यह वही लोग एक भ्रष्टाचारी का स्वागत और मान-सम्मान कर रहे हैं, जो स्वंय भ्रष्टाचार में फंसे हुएं है। खासबात यह है, कि इस लूटपाट गैंग में एक ही वर्ग के लोग शामिल है। गैंग में भर्ती करने से पहले वर्ग का विशेष ध्यान रखा जाता है, ताकि वर्ग के लोगों को अधिक से अधिक फायदा पहुंचाया जा सके। एक तरह से यह लोग जातिवाद को बढ़ावा दे रहे हैं, और जाति के नाम पर नफरत पैदा कर रहे है। वैसा यह वर्ग कभी विष्वासी नहीं रहा। प्रमोद कुमार मिश्र के गैंग में शामिल होने से सीएमओ मजबूत हुए हैं, और अब उनका लूट करने का टारगेट पूरा हो जाएगा। टारगेट पूरा करने के लिए प्रमोद कुमार मिश्र जैसे भ्रष्ट बाबू को शामिल किया गया।