बस्ती। सिडको के भ्रष्ट एक्सईएन के मामले में न जाने क्यों विभाग के एमडी साहब किसी की सुनने को तैयार नहीं, उनकी नजर में आशुतोष द्विवेदी स्वच्छ छवि वाले अधिकारी और विभाग को उनकी बहुत ही आवष्यकता है। अगर ऐसा नहीं होता, तो नियम विरुद्व एक्सईएन का पुनः प्रतिनियुक्ति पर न लाते है। जब कि पूरा प्रदेश जानता है, कि एक्सईएन साहब कितने ईमानदार और स्वच्छ छवि वाले है। बहरहाल, सारी शिकायतों को नजरंदाज करके एमडी साहब श्री द्विवेदी को अपने विभाग में लाकर रहेगें। अपर मुख्य सचिव समाज कल्याण से शिकायत करने के बाद अब इसकी शिकायत भाजपा के मंडल मंत्री मनीष कुमार पांडेय ने मुख्यमंत्री से करते हुए प्रतिनियुक्ति को निरस्त करने की मांग की है। कहा कि सिडको में पूर्व सांसद कुशल तिवारी के रिष्तेदार एवं तिवारी हाता में बंदूके ढ़ोने वाले यूपी आरएनएस के सहायक अभियंता आशुतोष द्विवेदी को शासनादेश के विपरीत प्रतिनियुक्ति दे दी गई। कहा कि जबकि बस्ती मंडल के अखिलेख सिंह इनके खिलाफ डीओ लिखते हुए तत्कालीन एक्सईएन आशुतोष द्विवेदी को उनके मूल विभाग यूपीआरएनएसएस यानि पैक्सपेड को वापस करना पड़ा। अब इन्हें फिर से वापस सिडको में सारे नियम कानून तोड़कर प्रतिनियुक्ति पर लाए जाने की खबर सामने आ रही है।

बताते हैं, कि इनके तैनाती के दौरान सांसद और विधायक निधि के बजट का जमकर दुरुपयोग हुआ, बिना काम कराए माननीयों के चहेते ठेकेदारों को पूरा भुगतान किया गया। खासबात यह है, कि इनके कार्यकाल में एक भी प्रोजेक्ट पर सीआईबी लगा हुआ नहीं दिखाई दिखाई। सिडको के द्वारा ही गुणवत्ताविहीन आडिटोरिएम और जिले भर में मिनी इंडोर स्टेडिएम बनाए गए, भानपुर में तो निर्माणधीन गुणवत्ताविहीन मिनी इंडोर स्टेडिएम के सेटरिगं के चलते एक आदमी की मौत तक हो चुकी है। फिर कार्यदाई संस्था को न तो ब्लैक लिस्टेड किया गया और न एफआईआर ही दर्ज हुआ। इसका निर्माण सांसद निधि से हुआ। महादेवा विधानसभा में पुलिया ही ढह गया, फिर भी सिडको के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। भवन निर्माण चाहे कलेक्टेट का हो या फिर चाहे कमिष्नरी का हो, सभी के गुणवत्ता पर सवाल उठे, कलेक्टेट भवन तो एक बरसात भी नहीं झेल पाया, छत टपकने लगा था। सांसद और विधायक निधि से जिले में पिछले दस सालों में जितना भी सड़क या फिर भवन निर्माण हुआ, सभी की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए, लेकिन माननीयों के दबाव के चलते डीएम और सीडीओ ने कोई कार्रवाई नहीं किया। जबभी कार्रवाई की बात उठती है, माननीयगण ढ़ाल बनकर खड़े हो जाते है। आप लोगों को यह जानकर हैरानी होगी कि आज तक एक भी माननीय ने सिडको के कार्यो की गुणवत्ता की न तो शिकायत किया और न जांच करने को लिखा, क्यों नहीं लिखा, कहने की आवष्यकता नहीं? जब भी किसी माननीय से पूछो तो कहते हैं, कि उनका काम काम प्रस्ताव देना है, गुणवत्ता को देखना नहीं, यह काम डीआरडीए का है। जिस भ्रष्टाचारी एक्सईएन आशुतोष द्विवेदी को कमिष्नर के लिखने पर उनके मूल विभाग को वापस भेज दिया गया हो, अगर उसी भ्रष्टाचारी को वापस नियम विरुद्व फिर से संबद्व किया जाएगा तो सरकार और विभाग के एमडी पर सवाल तो उठेगा ही।