बस्ती। अगर कुदरहा पिपरपाती समिति में किसानों को 266 के बदले 300 में यूरिया और 1350 के बदले 1400 में डीएपी मिल रहा है, और जिसका लगातार षिकायत भाकियू भदौरिया गुट के मंडल अध्यक्ष उमेष गोस्वामी कर रहे हैं, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है, मामला मंत्री तक भी पहुंचा, अधिकारी जांच में भी आते, लेकिन पैसा लेकर फर्जी रिपोर्ट लगाकर चले जाते है। सवाल उठ रहा है, कि ऐसे में कैसे किसानों को निर्धारित दर पर खाद मिलेगा? और खाद को ब्लैक करने वाले सचिव के खिलाफ कार्रवाई कैसे होगी? अधिकारी जब भी जांच में आते तो वह उन्हीं किसानों को बुलाकर पूछताछ करते, जिस सचिव लाते हैं, जबकि अधिकारियों को बिना सचिव को बताए गांव में जाना चाहिए। कमिष्नर, डीएम और सीडीओ को लिखे पत्र में कहा है, कि जिला कृषि अधिकारी बाबूराम मौर्य खुद खाद को ब्लैक करवा रहे है, अब सवाल उठ रहा है, कि जब अधिकारी ही खाद की कालाबाजारी में लिप्त रहेगा तो कार्रवाई कौन करेगा? इस समिति के सचिव राजकुमार पाल की शिकायत इससे पहले भी किसान कर चुके है। बावजूद कार्रवाई नहीं होती है, और जिसे कार्रवाई करनी होती है, वह पैसा लेकर झूठी रिपोर्ट लगाकर चला जाता है, अब शिकायतकर्त्ता कितनी जांच कराएगा। फिर सचिव को निलंबित करने और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की गई। एक सचिव का कहना है, कि षिकायत करने से इस लिए कुछ नहीं होता, क्यों कि साहब भी हिस्सा लेते है, और जब तक साहब हिस्सा लेते रहेगें ,तब तक कार्रवाई नहीं होगी। कहते हैं, कि शिकायत करने से एक नुकसान यह होता है, कि जब भी कोई अधिकारी जांच करने आता है, उसे खुश करना पड़ता है। जाहिर सी बात हैं, जो पैसा हम जांच अधिकारी को देगें, उस पैसे की वसूली किसान से करेगेें। यही सच है।