बस्ती। आप लोगों को जानकार हैरानी होगी कि ब्राहृमण महासभा मंदिर निर्माण में सबसे पहले चंदा किसी ब्राहृमण ने नहीं बल्कि डा. एन के श्रीवास्तव ने 1100 दिया था। यह चंदा इन्होंने 30 मई 2002 में दिया था। सबसे अधिक चंदा इसके राष्टीय अध्यक्ष ने 24.30 लाख दिया, यह रकम लिखा गया, बताते हैं, कि इसके आलावा भी लगभग आठ लाख और दिया। इसी तरह विपिन शुक्ल ने भी दिल खोल कर दान दिया, इन्होंने 11 लाख से अधिक चंदा दिया, रिकार्ड में 5.18 लाख और अन्य आठ लाख दिया गया। लगभग 250 लोगों ने 80 लाख से अधिक 30 मई 2002 से लेकर 10 जून 26 तक दिया, इनमें लगभग 110 लोगों ने 45 लाख का 11000 से लेकर चार लाख तक चंदा दिया। सीमेंट, सरिया, बालू, ईंट, पत्थर और मूर्ति देने वाली की कमी नहीं रही, कहने का मतलब लोगों ने खुलकर दान दिया, दान देने वालों में मुस्लिम और गुप्ता परिवार भी है। तत्कालीन सांसद हरीश द्विवेदी ने भी 20 क्ंिवटल सरिया का योगदान दिया। महेश शुक्ल ने 21000 तो जिलाध्यक्ष विवेकानंद मिश्र ने 11000 चंदा दिया। शुक्ला हार्डवेयर वाले सुभाश शुक्ल ने सबसे कम यानि 3225 रुपये का एक नल का सामान दिया। चंदें में भी व्यापार। यहां पर कुछ बड़े दानवीर का नाम दिया जा रहा है। नीतू पांडेय ने 45000, संतोष पांडेय ने, ई. राधेष्याम पांडेय एवं अशोक पांडेय ने 41000-41000, रामचंद्र पांडेय एवं अभिलासा पांडेय ने 42000-42000, बृदावंन पांडेय ने 1.50 लाख, डा. सीबीएम त्रिपाठी 50000, संतप्रकाश त्रिपाठी 1.51 लाख का सरिया, रामकिशोर पांडेय ने 500 बोरी सीमेंट एक टक गिटटी, पवन पांडेय ने 1.50 लाख, जेपी तिवारी ने 50000, पुष्कर मिश्र ने 51000, ब्रहृमदत्त पांडेय ने 51000, बाल कृष्ण त्रिपाठी ने 51000, डा. रामेंद्र त्रिपाठी ने कई चरणों में लगभग दो लाख, डा. सौरभ द्विवेदी ने 50000, संतोश मिश्र ने 51000, नरेंद्र बहादुर लेखपाल ने दो चरणों में 15 हजार, रामानुज मिश्र ने 51000, प्रशांत पांडेय ने कई चरणों में दो लाख, राकेश दूबे उर्फ जेडी 51000, भानुप्रकाश मिश्र ने 51000, डा. दुर्गेश उपाध्याय ने 51000, विजय बिहारी तिवारी 51000, सुरेंद्र नाथ तिवारी ने 51000, डा. आशीश एक लाख, अतुल कुमार शुक्ल ने 51000, राजेंद्र शंकर द्विवेदी 51000, डा. सत्येंद्र राय 51000, शंभूनाथ मिश्र ने कई चरणों में लगभग दो लाख, जुम्मन ने 51000, उमापति मिश्र ने 51000, डा. आशीश नरायन ने 51000 ने दिया। दयाशंकर मिश्र ने एक टाली ईंट, सुनील कुमार मिश्र ने 300 बोरी सीमेंट, रामप्रताप विष्वकर्मा ने एक टाली ईंट, डा. जीएम शुक्ल दो टाली ईंट, रामनाथ चौधरी ने एक टाली ईंट, शेल गुप्ता एवं प्रीती गुप्ता ने 1111-1111, किरन ओझा ने तीन बोरी सीमेंट, अशोक कुमार शुक्ल ने ब्राहृमण महासभा का मुख्य द्वार एवं हेंमत मिश्र ने मुख्य द्वार पर लोहे का गेट लगवाया। कहने का मतलब इस मंदिर में सिर्फ ब्राहृमण वर्ग का नहीं बल्कि अन्य वर्गो का भी योगदान रहा। अगर इतने लोगों की आस्था को अगर कोई चोट पहुंचाएगा तो उसे किए की सजा अवष्य मिलेगी। कहा भी जाता है, कि जिसने भी मंदिर निर्माण पैसे का दुरुपयोग किया, वह और उसका परिवार कभी सुखी नहीं रहेगा।
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