बस्ती। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का स्तर इतना नीचे गिर गया है, कि वह अपना ईमान पांच सौ रुपये में भी बेचने को तैयार है। कहा जा रहा है, कि अगर ऐसे अधिकारियों को कोई खरीदार मिल जाए तो यह पूरा का पूरा विभाग उसके हवाले करने में संकोच नहीं करेगें। ऐसे में अगर कोई महिला अधिकारी अपना ईमान पांच सौ रुपये में बेचती हैं, तो उस महिला अधिकारी को शर्म से डूब मरना चाहिए। ऐसी ही एक महिला अधिकारी डा. सुशमा जायसवाल हैं, जो हर्रेया 100 बेड महिला अस्पताल की सीएमएस पद पर तैनात है। इस महिला सीएमएस के खिलाफ अब तक जितने गंभीर अनिनियमिता के आरोप लग चुके हैं, उतना शायद किसी पुरुष सीएमएस के खिलाफ लगा होगा। यह वही महिला सीएमएस हैं, जिनके कार्यकाल में बजंरगी प्रसाद नामक बड़े बाबू ने पूरे अस्पताल में आंतक मचा रखा है। इस अस्पताल में जितने भी घोटाले हो रहे हैं, उन सभी में बड़े बाबू का हाथ रहता, एक तरह से अस्पताल का संचालन सीएमएस नहीं बल्कि बड़े बाबू ही करते है। चूंकि यह सीएमएस के कमाउपूत हैं, इस लिए सीएमएस भी इनके सारे गुनाहों को माफ कर देती है। एक तरह से माफ करना सीएमएस की मजबूरी भी हो सकती है, क्यों कि घोटाले के सारे राज बड़े बाबू के सीने में दफन है। यह वही सीएमएस हैं, जिन्होंने एक ठेकेदार से मिलकर चार करोड़ से अधिक बजट अस्पताल के उच्चीकरण के नाम पर नियम विरुद्व प्रस्ताव दिया, जिसे समय रहते, डिप्टी सीएम ने निरस्त कर दिया, जांच हुई, बच इस लिए गई, क्यों कि इन्होंने और महिला अस्पताल बस्ती के सीएमएस ने मिलकर भारी रकम देकर मैनेज कर लिया। यही वह बड़े बाबू हैं, जिन्होंने श्री इंटरप्राइजेज के लोगों से सीएमएस से मिलवाया, और 1254 रुपये में एक चददर धोने का एक ऐसे ठेकेदार से अनुबंध करवा दिया, जिसका ठेका ही नहीं है। बड़े बाबू ने प्रति चददर पांच सौ रुपया कमीषन देने पर सौदा करवाया। जब कि उसी चददर को कुंवर कांसक्टशन कंपनी बस्ती के प्रो. रमेश प्रसाद, जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल और जिला टीबी अस्पताल में 245 रुपये में पिछले नौ साल से धुलाई कर रहे हैं, यह वही फर्म हैं, जिसने प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, एमडी एनएचएम, एमडी मेडिकल कारपोरेशन, डीजी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य और निदेषक प्रषासन चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को पत्र लिखकर खुला आफर दिया था, कि उसकी फर्म पूरे प्रदेश में 245 रुपये में एक चददर की धुलाई करने को तैयार हैं, कहा था, कि अगर उसके प्रस्ताव को मान लिया जाता है, तो वह सरकार का हर साल लगभग छह अरब के नुकसान से बचा सकता है। लेकिन इस फर्म के प्रस्ताव को इस लिए ठुकरा दिया गया, क्यों कि यह फर्म श्री इंटरप्राइजेज फर्म की तरह एक चददर की धुलाई पर पांच सौ का कमीशन देने को तैयार नहीं थी, चूंकि मंत्री से लेकर प्रमुख सचिव तक को कमीशन चाहिए, इस लिए प्रस्ताव को रददी की टोकरी में डाल दिया गया। फर्म निरंतर प्रस्ताव देता रहा है, लेकिन हर बार उसके प्रस्ताव को इस लिए रददी की टोकरी में डाल दिया जाता रहा, क्यों कि फर्म पांच सौ कमीशन देने को तैयार नहीं। वहीं पर श्री इंटरप्राइजेज ने जैसे ही पांच सौ रुपया प्रति चददर कमीशन देने को तैयार हुआ, वैसे ही उसे बिना टेंडर के 1245 रुपये के दर से सीधे आर्डर की कापी थमा उी गई। टेंडर निकालने की भी जरुरत महसूस नहीं की। डिप्टी सीएम/ स्वास्थ्य मंत्री तक फर्म के प्रस्ताव पर विचार तक नहीं किया।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है, कि जब जिला अस्पताल के एसआईसी, जिला महिला अस्पताल और जिला टीबी अस्पताल के सीएमएस कुंवर कांस्क्टक्षन कंपनी को जेम पोर्टल पर टेंडर और नीलामी बोली के जरिए 245 रुपये में एक चददर धुलने का अनुबंध कर सकतें है, तो फिर हर्रैया महिला अस्पताल की सीएमएस क्यों नहीं कर सकती? क्यों इन्होंने बिना टेंडर निकाले 1245 रुपये के दर से श्री इंटरप्राइजेज को भुगतान कर रही है? क्यों एक चददर पर सरकार का एक हजार रुपये का नुकसान कर रही है? जाहिर सी बात कि यह सबकुछ एक चददर पर पांच सौ कमीशन पाने के लालच में किया गया। हर माह सीएमएस को सिर्फ चददर की धुलाई पर 50 हजार का कमीशन मिलता हैं, इसमें बड़े बाबू को कितना मिलता होगा, यह तो वही जाने। अब जरा अंदाजा लगाइए कि हर्रैया की सीएमएस श्री इंटरप्राइजेज को मात्र 100 चददर की धुलाई का सालाना भुगतान 12 लाख से अधिक का भुगतान कर रही है, और वहीं पर कुंवर कांस्क्टशन कंपनी को तीनों अस्पतालों के 450 चददर की धुलाई पर सालाना 10 लाख का भुगतान हो रहा है। जबकि यह फर्म मैकेनाइज्ड तरीके से चददर की धुलाई एरिएल डिटरजेंट से कर रही है, 35 लाख के किटाणु मुक्त मशीन से धुलाई हो रहा है, और वहीं पर हर्रैया में घड़ी डिटरजेंट और वाशिगं मशीन से धुलाई हो रहा, जो किटाणुयुक्त होता है। पांच सौ के कमीशन के चक्कर सीएमएस और बडे बाबू मिलकर मरीजों के जान के साथ खिलवाड़ कर रहे है। मरीजों को किटाणुयुक्त चददर बिछाने को दे रहें हैं। इसे देखते हुए श्री इंटरप्राइजेज के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी हो रही।
0 Comment