बस्ती। सीएमओ को अपनी बेरोजगार पत्नी के नाम फर्म खोलने की सलाह उनके लूटमार गैंग और षुभचिंतक दे रहे है। कहते हैं, कि जिस तरह चीफ फार्मासिस्ट लड़की और बेटे के नाम पर फर्म खोलकर माल कमा रहे हैं, उसी तरह अगर आप की पत्नी के नाम फर्म खुलकर गया तो आप चीफ फार्मासिस्ट से अधिक माल कमा सकते है। कहते हैं, कि अगर जिला अस्पताल के बाबू विष्णु यादव बेरोजगार पत्नी के नाम फर्म खोल सकते हैं, और प्रेम बहादुर सिंह अपने भतीजे के नाम फर्म बनाकर हेराफेरी कर सकते हैं, तो आप क्यों नहीं कर सकते? देखा जाए, सीएमओ के लिए यह सलाह नुकसान का नहीं बल्कि खूब फायदे का है। सीएमओ साहब पत्नी के फर्म खोल कर ठीक उसी तरह लूटपाट कर सकते हैं, जिस तरह अन्य लोग कर रहें। कहते हैं, कि फर्म का पार्टनर बनने से अच्छा परिवार के किसी सदस्य के नाम फर्म खोल लेना लाभप्रद रहता है। किसी से छिपा नहीं कि परिवार के सदस्यों के नाम फर्म खोलकर स्टाफ कितना बड़ा गोलमाल कर रहा है। अपना फर्म रहेगा तो कोई डर नहीं रहेगा, और न किसी तरह की चिटिगं का ही खतरा रहेगा। कमीशन का पूरा पैसा घर में ही रह जाएगा। जिन लोगों ने परिवार के नाम फर्म खोल रखा है, उनके पास अकूत संपत्ति है। एनएचएम के संदीप राय को इस लिए परिवार के सदस्यों के नाम फर्म खोलने की आवष्यकता नहीं पड़ी, क्यों कि इनके पास गोरखपुर के बाबा जैसी फर्म हैं, जिसे लाभ पहंुचाने और लाभ लेने के लिए यह किसी भी हद तक जा सकते है। एक तरह से इन्हें बाबा का पार्टनर भी कहा और माना जाता है। यही फर्जीवाड़ा का काम पीडब्लूडी में भी होता है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग में परिवार के किसी सदस्य के नाम फर्म खोलने की एक नई परॅम्परा चल निकली है। फर्म वहीं कर्मी खोलता है, जिसने भ्रष्टाचार में पीएचडी कर रखा होता है। यानि वही लोग फर्म खोलते हैं, तो भ्रष्टाचार में अखंड डूबे रहते है। यह खुद तो भ्रष्टाचारी होते ही हैं, साथ ही अपनी पत्नी, बेटा, बहु और भतीजे को भी भ्रष्टाचारी बना देते है। जाहिर सी बात हैं, जिस परिवार में भ्रष्टाचार का जन्म होगा, उस परिवार के बारे में सोचा और समझा जा सकता है, कि वह परिवार कैसा होगा? लोग अपने परिवार को भ्रष्टाचार से दूर रखते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग में परिवार के लोगों को सिखाया जाता हैं, कि ईमानदार बनने से कोई फायदा नहीं है, बेईमानी में ही सबकुछ हैं, इस लिए खुद तो बेईमान बनो ही अपने पत्नी और बच्चे को भी बेईमान बनाओ। गाड़ी बगंला और पैसा चाहिए, तो बेईमान बनना होगा। जो लोग अपने परिवार को भ्रष्टाचारी बनाना चाहते हैं, षायद उन्हें यह नहीं मालूम कि एक दिन इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ सकता है।