बस्ती। पिछले कई दिनों से सीएमओ और बाबूजी में युद्व चल रहा है। बाबूजी, जय कांस्टक्षन के जनेष्वर चौधरी को सिविल कार्यो का ठेका देने के लिए लगातार दबाव बना रहे है। कोई दिन ऐसा नहीं जाता, जब बाबूजी, सीएमओ या फिर डीएम पर अनुबंध करने के लिए दबाव न बनाते हों। इस मामले में सीएमओ को समझ में नहीं आ रहा है, कि वह करें तो क्या करें, क्यों कि अगर वह ‘बाबूजी’ का कहना मानते हैं, तो उनकी नौकरी के लाले पड़ जाएगें, और नहीं मानते हैं, तो बाबूजी के गुस्से का दंश झेलना पड़ेगा। बाबूजी जिस फर्म को ठेका दिलाना चाहते हैं, उस फर्म का टेडर ही अपूर्ण है। कहीं पर नाम छूटा तो कहीं पर पेपर ही नहीं लगा। सीएमओ साहब को सबसे अधिक खतरा गार्गी इंटरप्राइजेज के दीपक कुमार मिश्र से है। यह पहले ही सीएमओ को चेतावनी दे चुके हैं, कि अगर आप ने अपूर्ण निविदा को पूर्ण दिखाकर अनुबंध किया तो कोर्ट में घसीटूंगा। इनकी शिकायत पर डीएम के निर्देश पर एडी हेल्थ इसकी जांच भी कर रहे हैं, और जांच पूरी होने से पहले सीएमओ किसी का अनुबंध भी नहीं कर सकते। बताते हैं, कि सीएमओ साहब, बाबूजी के दबाव में पूरी तरह आ चुके हैं, और अनुबंध भी करने की तैयारी कर रहे हैं। इसकी शिकायत प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, महानिदशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, कमिश्नर, डीएम और सीडीओ से भी कर चुके है। शिकायतकर्त्ता का कहना है, कि अगर सीएमओ ने जय कांस्टक्षन का अनियमित रुप से अनुबंध किया तो वह सभी को कोर्ट के कटघरे में खड़ा करेगें, क्यों कि मेरे पास पक्का सबूत हैं, कि जय कांस्टक्षन का निविदा अपूर्ण है, और अपूर्ण निविदा को इंटरटेन नहीं किया जा सकता है, लेकिन यहां पर तो सीएमओ साहब, बाबूजी के दबाव में अनुबंध तक करने जा रहे हैं, जो निविदा डस्टबिन में डालने लायक हो, अगर उसका अनुबंध सीएमओ करते हैं, तो इसका खामियाजा सीएमओ, डीएम, निविदा बाबू प्रेम बहादुर सिंह, जेई एसबी सिंह को भुगतना पड़ सकता है। सांसद जैसे नेताओं को किसी ठेकेदार के लिए सीएमओ जैसे अधिकारी के सामने एक टेंडर के लिए इस तरह नहीं गिड़गिड़ाना चाहिए। बाबूजी को यह अच्छी तरह समझना चाहिए, कि कोई भी अधिकारी उतना तक ही गलत कर सकता है, जिससे उसकी नौकरी खतरें में न पड़े। अगर बाबूजी के दबाव में आकर सीएमओ ने अनुबंध कर दिया तो समझो सीएमओ की खैर नहीं। फिर बाबूजी भी सीएमओ को नहीं बचा पाएगंे। बार-बार कहा जा रहा है, कि किसी भी अधिकारी को ऐसा कोई भी काम नहीं करना चाहिए, जिससे उसकी नौकरी और उसके मान-सम्मान पर कोई आंच आए। इसी तरह बाबूजी जैसे नेताओं को भी यह चाहिए कि वह कोई भी ऐसा सिफारिश न करे, जिससे किसी अधिकारी की नौकरी पर बन आए। ठेकेदार और नेता का तो कुछ नहीं बिगड़ेगा, लेकिन अधिकारी अवष्य चपेट में आ जाएगें। इसमें सीएमओ को कुछ मिलना जुलना भी नहीं होगा, क्यों कि मामला बाबूजी का जो है।
बता दें कि 21 नवंबर 25 को सीएमओ की ओर से सिविल निविदा आमंत्रित की गई। इसमें कुल आठ फर्मो ने भाग लिया। निविदा लिपिक और जेई ने जानबूझकर तीन साल का चरित्र प्रमाण-पत्र षासनादेष के तहत जारी किया। तीन साल के बजाए डीएम संतकबीरनर ने दो साल लिखने के कारण टेडर निरस्त कर दिया। कहा कि द्वेष की भावना से गार्गी इंटरप्राइजेज फर्म की निविदा को निरस्त कर दिया गया। इसी प्रकार जेई के द्वारा आंेकार इंटरप्राइजेज की फर्म मार्ग श्रेणी में पंजीकृत होने के कारण निरस्त कर दिया। जब कि यही फर्म अयोध्या में इसी जेई के अंडर कार्य कर रही है। जेई और लिपिक के द्वारा अतिसंवेदनषील गलत एपं अपूर्ण निविदा को पूर्ण दिखाकर लाभ लेकर आवंटित कर दिया। जय कांसटक्षन का निविदा प्रपत्र संख्या सात को पूर्ण नहीं भरा गया, नौ भी अपूर्ण है। खासबात यह है, कि अपूर्ण होने के बावजूद दर खोल दिया गया। बीएमसी कांस्टक्सन फर्म का हैसियत प्रमाण-पत्र ही समाप्त हो गया, यह फर्म सिविल श्रेणी में पंजीकृत है, एवं प्रपत्र भी पूर्ण नहीं भरा गया,? उसके बाद भी फर्म को पूर्ण दिखाया गया। मैक्स इंजीनियरिगं सर्विस के द्वारा आईसीआईसीआई बैंक का एफडी एवं डीडी जमा किया जो कि मान्य ही नहीं, इनके द्वारा भी अपूर्ण भरा गया। लेकिन इन्हें भी पूर्ण दिखा दिया गया। इसी आदित्य कांस्टक्षन कंपनी के द्वारा सिविल श्रेणी का पंजीयन है, और पीडब्लूडी में मार्ग श्रेणी का पंजीयन प्रमाण-पत्र लगाया गया। कहा गया कि उक्त चारों फर्मो के द्वारा निविदा अपूर्ण भरा गया और गलत एफडी और डीडी लगाए गए, लेकिन फिर भी चारों को पूर्ण बताकर दर निकाल दिया गया। कहा कि द्वेष भावना ने निविदा लिपिक और जेई के द्वारा उसके फर्म की निविदा को निरस्त किया गया। पत्र में लिपिक एवं जेई के खिलाफ विधिक कार्रवाई करने की मांग की गई।
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