बनकटी/बस्ती। सहित पूरे प्रदेश में आम जनता इन दिनों महँगाई और आवश्यक वस्तुओं की कमी से परेशान है। सरकार विकास और आत्मनिर्भरता के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आम आदमी गैस, खाद, डीजल और पेट्रोल जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहा है। हालात इतने चिंताजनक हो चुके हैं कि लोगों की जुबान पर एक ही सवाल है, आखिर राहत कब मिलेगी?

रसोई गैस की लगातार बढ़ती कीमतों ने गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है। कई इलाकों में समय पर गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं, जिससे घरेलू महिलाओं को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। मजबूरी में कई परिवार फिर से लकड़ी और पारंपरिक चूल्हों का सहारा लेने लगे हैं। उज्ज्वला योजना के प्रचार के बीच यह स्थिति सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े करती है।

दूसरी ओर किसान भी खाद की किल्लत से जूझ रहे हैं। खेती के महत्वपूर्ण समय में खाद के लिए लंबी कतारें लग रही हैं, लेकिन पर्याप्त उपलब्धता नहीं हो पा रही। समय पर खाद न मिलने से फसलों पर असर पड़ रहा है और किसानों की मेहनत व लागत दोनों संकट में हैं। किसानों की आय दोगुनी करने के दावे तब खोखले लगते हैं जब किसान आज भी मूलभूत संसाधनों के लिए परेशान दिखाई देता है।

डीजल और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों ने आम जीवन को और कठिन बना दिया है। खेती, परिवहन, छोटे व्यापार और रोजमर्रा की जिंदगीकृहर क्षेत्र पर इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। डीजल महँगा होने से खेती की लागत बढ़ रही है, वहीं पेट्रोल की कीमतों ने आम आदमी का सफर महँगा कर दिया है। इसका सीधा असर बाजार में वस्तुओं की कीमतों पर पड़ रहा है और महँगाई लगातार बढ़ती जा रही है। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब जनता अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए परेशान है, तब विकास के बड़े दावे कितने सार्थक हैं। लोकतंत्र में सरकार की पहली जिम्मेदारी जनता को राहत और सुविधा देना होती है। केवल भाषण और प्रचार से जनता की समस्याएँ समाप्त नहीं होतीं। अब जनता घोषणाओं से ज्यादा व्यवस्था में सुधार और वास्तविक राहत चाहती है। सरकार को चाहिए कि गैस, खाद और पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करे, महँगाई पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाए और किसानों व गरीब वर्ग को राहत देने की दिशा में गंभीर प्रयास करे। क्योंकि यदि आम आदमी परेशान रहेगा, तो जनता का आक्रोश भी लगातार बढ़ेगा। लोकतंत्र में जनता की आवाज सबसे बड़ी ताकत होती है, और उसे अनसुना करना किसी भी सरकार के लिए उचित नहीं हो सकता।