बस्ती। धन के लालच और अवैध संबधों के चलते न जाने कितने परिवार बर्बाद हो चुके है। जहां पर धन होता है, वहीं पर अवैध संबधों का भी जन्म होता है। खासतौर पर उन घर की महिलांए गलत रास्तों पर चलती है, जिनपर पति का नियंत्रण नहीं होता है। आधुनिकता की चकाचौंध में सबसे अधिक उन्हीं परिवार की महिलाएं, परिवार के मान और सम्मान पर धब्बा लगाती है, जिन्हें खुले में उड़ने की आजादी चाहिए होती है। ऐसे महिलाओं के चलते उनका हंसता खेलता परिवार पीछे छूट जाता है। रह जाती है, उनकी खुले में उड़ने की आजादी। उड़ने की आजादी तो उन्हें मिल जाती है, लेकिन अपनों का प्यार खोने के बाद। इन्हें इस बात का भी एहसास नहीं होता कि अपनी षौक को पूरा करने के लिए यह कितनी बड़ी कुर्बानी दे रही है। इस तरह की जो महिलाएं होती है, उनकी नजर में सास और ससुर की भी कोई खास इज्जत नहीं होती। पति बेचारा तमाशबीन बनकर रह जाता है, सास-ससुर अपनी किस्मत पर रोते है। घर की इज्जत नीलाम होते देखता रह जाता है। पति बेचारा अपनी पत्नी के चलते अपने माता-पिता को वह खुशियां नहीं दे पाता जिसके वे हकदार होते है। सवाल उठ रहा है, ऐसी आधुनिकता और आजादी का क्या मतलब, जिसके चलते परिवार की इज्जत दांव पर लग जाए, लोगों की खुशियां छिन जाए। महिलाएं भी किसी के घर की बहु और बेटी होती है। जिले में कई ऐसे परिवार की शादीशुदा महिलाएं भी हैं, जो धन और दौलत के चकाचौंध में परिवार के इज्जत के साथ खेल रही है। ऐसे धन्नसेठों को भी देखा गया, जो जिस भी परिवार में जाते हैं, उनका पहला का परिवार बिखरने का होता, उनके निशाने पर महिलाएं ही होती हैं, यही महिलाएं आजादी के नाम पर उड़ने लगती है।

धन अगर ईमानदारी और मेहनत से कमाया जाए तो मान सम्मान और सुख मिलता, लेकिन अगर एर्बासन और भ्रूण हत्या के जरिए कमाई जाए तो बदनामी मिलती है। समाज ऐसे लोगों का चेहरा भी देखना पसंद नहीं करता। सबसे बड़ी बिडबंना यह है, कि इसी समाज के लोगों को रेखा मिश्रा और सोनी सिंह जैसों की भी आवष्यकता पड़ती है। कहने का मतलब पापी लोगों को दोनों की आवष्यकता कहीं न कहीं पड़ती है, ऐसे में वह कोई भी कीमत देने को तैयार रहते है, और इसी का लाभ रेखा मिश्रा और सोनी सिंह जैसी न जाने कितनी महिलाएं उठा रही है। जो पैसे के लिए न जाने कितने अजनमें बच्चों की हत्या करचुकी होगी। इस तरह की महिलाओं और नेताजी के चलते परिवार बिखर जाता है। रेखा मिश्रा, सोनी सिंह और नेताजी जैसे न जाने कितने लोग होगें जिन्होंने पैसे के लिए रिष्तों का खून किया होगा। इसका जीता-जागता उदाहरण रेखा मिश्रा नामक महिला हैं, जिन्होंने परिवार को महत्व न देकर अवैध संबध और अवैध कारोबार को महत्व दिया, इनके लिए इनके भगवान रुपी पति नहीं बल्कि नेताजी जैसे लोग प्यारे हैं, जो दूसरों का घर बर्बाद करते है, और इज्जत पर डांका डालते हैं। जीप चलाने वाले नेताजी कैसे इतने बड़े आदमी बन गए, यह सवाल रेखा मिश्रा के पति डाक्टर साहब कर रहंे हैं। आज पूरा समाज रेखा मिश्रा, सोनी सिंह और नेताजी पर हंस रहा है, और कह रहा है, कि भगवान न करे कि रेखा मिश्रा जैसी पत्नी और सोनी सिंह जैसी बहु किसी को मिले। रही बात नेताजी की तो इनकी जितनी भी निंदा की जाए कम हैं, क्यों कि इन्हीं के चलते हंसते खेलतें परिवार की इज्जत सड़क पर आज नीलाम हो रही है। उसके बावजूद न तो रेखा मिश्रा को न ही नेताजी को कोई अफसोस और तकलीफ है। अगर रेखा मिश्रा को कोई अफसोस या तकलीफ होती तो यह न कहती है, कि नेताजी से मेरे सालों पुराने संबंध हैं, लेकिन अनैतिक नहीं है। यह भी कहती है, कि दुनिया चाहें जो भी हमारे संबधों का नाम दें, लेकिन अब हम और नेताजी समधी और समधिन बनने जा रहे है। जो महिला उस नेता को अपना आइडिएल माने जो परिवार के बर्बादी का कारण बना हो, तो समझा जा सकता हैं, कि इन दोनों के नजर में अवैध संबध और अवैध कारोबार कितना महत्वपूर्ण है। कहा भी कहा गया है, कि किसी को भी इतना नीचे नहीं गिरना चाहिए, कि वह उठ न सके और उसके अपने और परिवार वाले नफरत करने लगें। अगर किसी का परिवार का बेटा या कहे कि आपको मम्मी-पापा कहते हुए भी शर्म आती है, तो समझ लेना चाहिए, सबकुछ समाप्त हो गया। पैसा चाहें जितना कमाइए, किसी भी स्रोत से कमाइए, लेकिन परिवार की इज्जत को नीलाम होने से बचाईए। क्यों कि परिवार और उसकी इज्जत से बढ़कर दुनिया में और कोई दौलत नहीं होती। किसी भी महिला को रेखा मिश्रा और सोनी सिंह जैसा नहीं बनना चाहिए, और न नेताजी जैसा घिनौना काम करना चाहिए। यह भी एक सत्य हैं, जो भी किसी का परिवार बर्बाद या फिर उसके महिलाओं के इज्जत के साथ खिलवाड़ करता है, एक दिन उस व्यक्ति के साथ भी होता है, यही कुदरत का निजाम भी है।