बस्ती। भाकियू भानु गुट के मंडल प्रवक्ता चंद्रेश प्रताप सिंह का कहना है, कि देश संविधान से चलता है, लेकिन राजनीति और राजनीतिक दल अक्सर बिना संवैधानिक मर्यादाओं के ही चलते हैं। जिस दिन राजनीति पूरी तरह संविधान के तहत होने लगेगी, उस दिन से इस प्रकार की राजनीति स्वतः ही समाप्त हो जाएगी।
कहते है कि राजनीतिक प्रेक्षकों मानना है कि समाजसेवी अभिजीत दीपके द्वारा चलाए जा रहे भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के मद्देनजर यह सोचना आवश्यक है कि कार्यकर्ताओं और राजनीति का भविष्य क्या होगा? आखिर लोग राजनीति क्यों करते हैं? फायदे के लिए? कोई गेहूं बेचकर राजनीति नहीं करता। यह बात समझनी होगी। एक राजनीतिक कार्यकर्ता अपने नेता के लिए क्या कुछ नहीं करता? जूते पॉलिश करने से लेकर कपड़े धोने और इस्त्री करने तक, धन की व्यवस्था करने, कमीशन लाने, पूंजीपतियों से डील करने, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता से लेकर दुबई, रूस और उज्बेकिस्तान तक हाट लाइन पर बात करने, उगते हुए पौधे को कलम करने, रैली में भाग लेने, भीड़ जुटाने, खाने-पीने की व्यवस्था करने और वोट डलवाने तक एक कार्यकर्ता के पास कितने काम होते हैं, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है, और वह इतनी व्यस्तता में पढ़ाई कब करेगा और पास कैसे होगा? ऐसे में सरकार की भी मजबूरी होती है कि वह कुछ कार्यकर्ताओं के लिए करंे, चाहें वह सरकारी भर्तियों के माध्यम से ही क्यों न करें, यदि ऐसा नहीं किया गया तो कार्यकर्ता नाराज हो जाएगा, उसका परिवार बिखर जाएगा और वह सड़क पर आ जाएगा। ऐसे में सवाल उठता है कि भ्रष्टाचार के नाम पर क्या राजनीति और राजनीतिक दलों को ही बर्बाद करने का प्रयास किया जा रहा है? भ्रष्टाचार के नाम पर जिस तरह की राजनीति हो रही है, उससे देश और समाज दोनों का नुकसान हो रहा है। नेता जनता पैसा लूटकर फरार हो जाते हैं, और सरकारे देखती ही रह जाती, कहना गलत नहीं होगा, जिन लोगों ने देश का पैसा लूटा और फरार हो गए, उनमें नेताओं की अहम भूमिका रही है।
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