गंगा अपना रौद्र रूप दिखाती थी, दिखाती है, आगे भी दिखाएगी,नालों की नहीं हुई सफाई
जिम्मेदार और सिस्टम की बेरुखी से खादर क्षेत्र डूबा,जन जीवन अस्त व्यस्त,
फसल बर्बाद
ओमप्रकाश गौतम
गढ़मुक्तेश्वर: आजादी के 80 साल से गंगा के रौद्र रूप में आने पर बाढ़ की त्राहि का प्रकोप लाखों की आबादी को झेलना होता है। हरेक साल आने वाली बाढ़ के इंतजाम नहीं किए जा सके है। समय रहते सिस्टम और जिम्मेदार को चेताया जाता है मगर अपनी जिम्मेदारी को भी निभाते है। सिस्टम को गंगा की बाढ़ बताकर छोड़ दिया जाता है। गंदे नालों की सफाई होती तो हर साल खादर क्षेत्र क्यों डूबे। हर साल आला अधिकारी गंदे पानी में गुजरते है और बाढ़ पीड़ितों को मरहम लगा देते है। जबकि गंगा की बाढ़ में खादर क्षेत्र डूब गया तो जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया। किसान की फसल बर्बाद हो गई। पशु पालक अपने पशुओं को बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र से बाहर लाने को मजबूर है। बतादें की बारिश के मौसम में हर साल गंगा अपने रौद्र रूप में आती है तो नालों की सफाई नहीं होने पर गंगा की बाढ़ में त्राहिमाम के हालत बने हुए है। खादर के दो दर्जन गांवों में लाखों की आबादी का जंगल डूब गया कई गांवों की आबादी के चारों ओर पानी घुस गया तो जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया। हजारों बीघे किसान की लौकी, तुरई,चारे की फसल गंगा बाढ़ की भेंट चढ़ गई। गन्ने की फसल में भी जलभराव के चलते नुकसान है।
डबल इंजन की सरकार में आखिर किसान की इस तबाही का जिम्मेदार कौन है?
सिस्टम की अनदेखी
दैनिक तेजयुग न्यूज़
जनपदीय आला अधिकारियों को समय पर चेताया जाता है। बाढ़ ग्रस्त इलाके में गंदे पानी में घुसकर किसान की दुर्दशा को देखा जाता है। मगर जंगल में बरसाती नालों और नगर सहित आबादी के नालों पर नजर नहीं जाती है।
क्या कहते है किसान
बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र के किसानों में रोष व्याप्त है। किसानों ने बताया कि खादर के किसानों का करोड़ों की फसल का नुकसान हो गया। जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों को हर साल बताया जाता है। एमएलए और एमपी को किसानों की दुर्दशा और गंदे नाले नजर नहीं आते है। देश की आजादी के बाद गंगा की बाढ़ तथा मेला रोड के हालत नहीं बदले है।
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