बस्ती। लगता है, कि चीफ फार्मासिस्ट अजय मिश्र का जमीर कभी नहीं जागेगा, जागना होता तो कब का जाग गया होता। आए दिन जिस तरह इनके फ्राड का खुलासा हो रहा है, उससे यह लगने लगा है, कि इन्होंने अपने दिल से ईमानदारी शब्द को निकाल दिया। अब तो इनकी गिनती नटवरलाल के रुप में होने लगी है। अगर एैसा नहीं होता तो तत्कालीन सीएमओ डा. आरएस दूबे और वर्तमान एडीे हेल्थ इन्हें फर्जी सिग्नेचर करने और करवाने के मामले में दोशी नहीं मानते। भला हो वर्तमान भ्रष्ट सीएमओ डा. राजीव निगम का जिन्होंने मोटा लिफाफा लेकर ऐसे चीफ फार्मासिस्ट को क्लीन चिट दे दिया, जिसने अपना फर्जी सिग्नेचर करने के लिए वार्ड ब्याय राम ललित बौद्व को प्रेरित किया, ताकि जब कभी मामला फंसे तो यह कहकर बच सके कि वार्ड ब्याय ने उनका फर्जी सिग्नेचर बिल बाउचर पर बनाया। मिश्राजी तो मोटा लिफाफा देकर बच गए, लेकिन वार्ड ब्याय को सूली पर चढ़ा दिया गया। सवाल उठ रहा है, कि जब तत्कालीन सीएमओ ने स्टोर में छापा डालकर फर्जी सिग्नेचर पकड़ा और कार्रवाई करने की संस्तुति की तो कैसे वर्तमान सीएमओ डा. राजीव निगम ने मिश्राजी को यह कहते हुए ईमानदार बता दिया कि इनके उपर लगाए गए आरोप प्रमाणित नहीं होता, वार्ड ब्याय पर लगे आरोप प्रमाणित होता है, लेकिन मिश्राजी पर लगे आरोप प्रमाणित नहीं होता। जिस मिश्राजी को डिप्टी सीएमओ डा. एसबी सिंह, डा. एके चौधरी, डा. एके गुप्त और तत्कालीन सीएमओ डा. आरएस दूबे ने अपनी जांच रिपोर्ट में लिखा कि फर्जी बनाना और बनवाना दोनों नियम विरुद्व और अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है, और इसके लिए दोनों दोशी है। खास बात यह है, कि पूछताछ के दौरान मिश्राजी और बौद्वजी दोनों ने स्वीकार किया कि फर्जी सिग्नेचर किया और करवाया गया। जांच टीम ने दोनों के खिलाफ कार्रवाई और तबादला करने की संस्तुति की, वार्ड ब्याय का तबादला तो हो गया, लेकिन मिश्राजी का न तो तबादला हुआ और न इनके खिलाफ कोई कार्रवाई हुई। वजनदार लिफाफे में इतना दम होता कि उसे पाते ही उस सीएमओ ने मिश्राजी को क्लीन चिट दे दिया, जिसने दोषी माना था।
22 मई 26 को जब एडी हेल्थ ने मिश्राजी के बारे में वर्तमान सीएमओ से आख्या मांगा तो इन्होंने जांच टीम की रिपोर्ट को ही झुठलाते हुए मिश्राजी यानि नटवरलाल को क्लीन चिट दे दिया, जब यह रिपोर्ट डीजी हेल्थ के पास गई, तो उन्होंने क्लीन चिट देने वाली रिपोर्ट को रिजेक्ट कर दिया, फिर उसके बाद डीजी हेल्थ ने इसकी जांच एडी हेल्थ से करवाया। 13 अगस्त 26 को डीजी हेल्थ को भेजी गई जांच रिपोर्ट में कहा गया, कि अभिलेखों में स्टाक बुक एवं वितरण बाउचर तथा उपस्थित पंजिका के अंकन में वार्ड ब्याय राम ललित बौद्व की हैंडराइटिगं पाई गई, यानि जो हस्ताक्षर मिश्राजी को करना था, उसे वार्ड ब्वाय करता रहा, और वह भी मिश्राजी के कहने पर। लिखा गया कि वार्ड ब्याय के खिलाफ तो तत्कालीन वर्तमान सीएमओ ने कार्रवाई तो कर दी लेकिन चीफ फार्मासिस्ट को क्लीन चिट दे दिया, जब कि दोनों फ्राड के दोशी है। अब आप लोग समझ गए होगें कि सीएमओ कार्यालय में क्या चल रहा है। जनता और सरकार किस पर विष्वास करे, उस तत्कालीन सीएमओ पर भरोसा करें, जो मिश्राजी को तो दोशी मानता है, लेकिन जैसे ही मोटा लिफाफा मिल जाता है, मिश्राजी को ईमानदार बना देता है, या फिर वर्तमान सीएमओ को ईमानदार कहें, जो लिफाफा पाते ही यह लिखता है, कि मिश्राजी पर कोई आरोप ही प्रमाणित नहीं होता। अब आप लोग समझ गए होगें कि क्यों मिश्राजी सालों से सरकार को चूना लगा रहे है। इसी लिए इन्हें लूटेरों का सरगना कहा जाता है।
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