जननी सुरक्षा योजना के तहत जिन गरीब गर्भवती महिलाओं को निःशुल्क दवाएं मिलनी चाहिए, उसे कमीशन के लालच में सीएचसी कुदरहा की एएनएम चांदनी चौधरी बाहर की दवा खरीदने को मजबूर कर रही
-इससे पहले इसी अस्पताल में ननद और भौजाई सुनीता चौधरी और सुमन चौधरी सादे पर्चे पर बाहर की दवाएं लिखते समय पकड़ी जा चुकी
-जब भी एमओआईसी या फिर एएनएम प्रभारी/आरसीएच चर्चित डा. बृजेश शुक्ल के पास जांच को जाता तो दोनों पैसा लेकर रफादफा कर देते
बस्ती। जिस विभाग का मुखिया अगर भ्रष्ट, चोर और बेईमान होता है, अगर उस विभाग के डाक्टर और एएनएम बेईमान और चोर है, तो इसमें कोई बुराई नहीं है। अगर कुदरहा सीएचसी की एएनएम चांदनी वर्मा सरकारी पर्चे पर कमीषन के लिए ऐसे बाहर की दवाएं लिखती है, जिसे मरीजों को निःशुल्क मिलना चाहिए तो गरीब परिवार की गर्भवती महिलाओं की मौत तो होगी ही। सीएचसी के एमओआईसी और एएनएम प्रभारी अगर कार्रवाई करने के बदले मोटा लिफाफा लेगें तो भ्रष्टाचार बढ़ेगा ही। सीएमओ अगर अजय मिश्र जैसे भ्रष्ट चीफ फार्मासिस्ट को क्लीन चिट देगें तो अस्पतालों को लुटने से कौन रोक पाएगा? अगर सरकारी पर्ची पर एएनएम कमीशन वाली दवांए लिखती है, जिसे दवा लिखने का कोई अधिकार नहीं हैं, तो गरीब मरीज परिवार को बर्बाद होने से कौन बचा पाएगा? ऐसा लगता है, कि मरीजों के प्रति सभी की संवेदना मर चुकी है, कमीशन ने इन लोगों को इतना अंधा कर दिया है, कि इन्हें गरीब मरीजों की चीखें तक नहीं सुनाई देती। यही कारण हैं, अगर ऐसे लोगों पर कोई कार्रवाई होती है, या फिर इनके परिवार पर कोई पहाड़ टूटता है, तो समाज अफसोस नहीं करता, बल्कि कहता है, कि जैसी करनी वैसी भरनी।
हेल्थ विभाग के भ्रष्ट लोगों के खिलाफ निरंतर आवाज उठाने वाले भाकियू भदोरिया गुट के मंडल अध्यक्ष उमेश गोस्वामी इससे पहले इसी अस्पताल के एएनएम ननद और भौजाई सुनीता चौधरी और सुमन चौधरी के द्वारा कागज के टुकड़े पर गरीब गर्भवती महिलाओं को बाहर की दवांए लिखते हुए पकड़ वुके हैं, जिसके चलते दोनों को कार्रवाई का दंश भी झेलना पड़ा। अब श्रीगोस्वामी ने एएनएम चांदनी वर्मा के हाथ का लिखा वह अस्पताल का पर्चा पकड़ा हैं, जिस पर इन्होंने ऐसी दवाएं बाहर की लिखी, जो जननी सुरक्षा योजना के तहत हर सरकारी अस्पताल में निःशुल्क मिलता है। इस एएनएम के चलते न जाने कितने मेडिकल स्टोर वाले नकली दवा बेच-बेचकर धनवान हो चुके है। अब जरा अंदाजा लगाइए, कि अगर एएनएम को 50 फीसद कमीशन मिलता है, तो मेडिकल वालों को कितना मिलता होगा। अस्पताल के एमओआईसी के सामने यह चर्चित एएनएम बाहर की दवांए लिख रही है, जबकि दवा डाक्टर ही लिख सकते है। चूंकि एमओआईसी को भी उनका हिस्सा मिल जाता है, इस लिए यह मूकदर्शक बने रहते है। एएनएम न सिर्फ बाहर की दवांए लिखकर कमीशन ले रही है, कि बल्कि जो जांच अस्पताल में निःशुल्क होता है, उसे भी बाहर से कराने के लिए मरीजों और उनके परिजिन पर दबाव बनाती है, ताकि अधिक से अधिक कमीशन मिल सके। खास बात यह है, कि कुदरहा क्षेत्र में एक से एक जांबाज पत्रकार हैं, लेकिन इन लोगों को चांदनी वर्मा का भ्रष्टाचार न जाने क्यों नहीं दिखता? कहने को सभी वरिष्ठ और तेजतर्रार पत्रकार हैं, लेकिन जब गरीब मरीजों के हितों की बारी आती है, तो न जाने इनकी पत्रकारिता कहां गुम हो जाती है। जब इस ब्लॉक के पत्रकार दो किलो टमाटर पर बिकेगें तो मरीजों का उत्पीड़न और शोषण होगा ही। एक साथ बैठकर यह लोग अस्पताल के बाहर चाय की दुकान पर गप्प लड़ाते हैं, चाय पीते और समोसा खाते हैं, लेकिन सीएचसी पर जाना पसंद नहीं करते। दोफड़ा निवासिनी सुमन कहती हैं, कि एएनएम चांदनी वर्मा के पास जब भ्पाी जाते हैं, वह हजार दो हजार की दवा बाहर की लिखती है, और कहती है, कि अस्पताल की दवा फायदा नहीं करती, इस लिए बाहर की दवा लिख रही हूं।
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