बस्ती। समूह की महिलाएं इतनी भोलीभाली होती है, कि वह किसी के झांसे में बहुत जल्दी आ जाती है। इनका विश्वास करना ही इनकी बर्बादी का कारण बनता है। इन्हें पता ही नहीं चलता कि जिसे वह अपना समझ रही है, वही एक दिन लूटकर चला जाएगा। इसी तरह का एक मामला गनेशपुर का सामने आया। यहां के समूह की महिलाओं का 50 लाख कुछ लोग लूटकर चले गए, अब बैंक वाले लोन की वापसी का दबाव बना रहे है। आधा दर्जन के खिलाफ तब एफआईआर दर्ज हुआ, जब समूह की महिलाओं ने धरना प्रदर्शन किया। इसी लिए समूह की महिलाओं को यह सचेत किया जा रहा है, कि वह किसी के झांसे में मत आए, नहीं तो जमा पूंजी के साथ बैंक से लिए गए लोन से भी हाथ धोना पड़ेगा। जब तक समूह की महिलाएं किसी के लालच में आती रहेगी, तब तक वह लुटती रहेंगीं। चूंकि समूह की महिलाओं की एक बड़ी संख्या हैं, और इसी लिए हर कोई इनका सही/गलत तरीके से इस्तेमाल करना चाहता है। जब भी किसी बड़े नेता के आगमन पर भीड़ जुटानी होती है, उन्हें समूह की महिलाएं याद आती है। कहना गलत नहीं होगा कि भीड़ जुटाने का यह लोग एक सशक्त माध्यम बनती जा रही है। भीड़ जुटाने और चुनाव जीतने के लिए इनका अक्सर उपयोग/दुरुपयोग किया जाता रहा हैं, और रहेगा। अगर सत्ता पक्ष की कोई बड़ी जनसभा होती है, तो उसमें एनआरएलएम के डीसी के जरिए समूह की महिलाओं को जनसभा में भाग लेने का फरमान जारी होता है। जनसभा के बाद जब महिलाओं से पूछा जाता है, कि आप स्वेच्छा से जनसभा में भाग लेने आई हैं, कि किसी लालच या दबाव में, अगर महिलाएं समूह की है, तो कहती है, उन्हें जनसभा या रैली में भाग लेने के लिए आदेश दिया गया। अगर समूह की महिलाएं नहीं हैं, तो वह कहती है, उन्हें एक दिन की मजदूरी यानि पांच रुपया और आने-जाने का किराया दिया गया। कहने का मतलब चाहें महिलाएं समूह की हो चाहें गांव गढ़ी की आम महिला हो, इनका उपयोग/दुरुपयोग नेतागण अपने लाभ के लिए करते रहें हैं, और करते रहेगें।

कोतवाली में एक रिपोर्ट लिखी गई, यह रिपोर्ट गनेशपुर के महिला समूह की उषा पत्नी राम औतार ने मीना पत्नी राकेश, राकेश पुत्र अज्ञात निवासी धमुआ गनेशपुर, अरविंद पुत्र राधेष्याम एवं सोनी पत्नी अरविंद निवासी दक्षिण द्वारा गनेशपुर, अनिल पुत्र फूलचंद्र एवं रवि पुत्र अज्ञात ग्राम चमरौहा के खिलाफ दर्ज कराया। इन सभी के खिलाफ 406 और 420 की धारा के तहत मुकदमा दर्ज हुआ। लिखाए गए एफआईआर में कहा गया कि हम महिलाएं स्वरोजगार के लिए समूह बनाकर कार्य करती है। गांव की मीना पुत्र परसराम जिसकी शादी राकेश के साथ हुई। मीना अपने पति राकेश, सोनी अपने पति अरविंद एवं रवि को लेकर गांव आई। गांव में आकर अनिल पुत्र फूलचंद्र को भी साथ में लाई। अभी सब लोग बात कर ही रहें थे, कि इसी बीच मीना किराए पर टैंपों लेकर आई, और मीना की सगी भाभी राजेष्वरी अंजु, उषा, ज्योति, सुगना, गुड़िया को प्लास्टिक कांपलेक्स के बैंक ले गई, वहां पर खाता खुलवाया, लोन करवाया, और बड़ी चालाकी से छह महिलाओं का पैसा भी निकलवा लिया। लिखा कि मीना एंड कंपनी ने हम लोगों का 50 लाख लूट लिया। पैसा दुगुना करने का लालच देकर 50 लाख लूटा गया। लिखा कि समूह की महिलाओं ने गांव की बिटिया मीना और भाभी पर विष्वास किया और उन्हीें लोगों ने अपने पतियों के साथ मिलकर धोखा दिया, अब बैंक वाले लोन वापसी का दबाव बना रहे है। वसूली के लिए रोज बैंक वाले घर पहुंचे रहते है। पुलिस ने समझौता भी करवाया, लेकिन समझौते के बाद सभी फरार हो गए। सवाल उठ रहा है, कि जिन समूह की महिलाओं को समृद्धशाली और आत्म निर्भर बनाने के लिए बैंक से लोन दिलाया गया, वे महिलाएं आत्म निर्भर और समृद्धशाली तो नहीं बन पाई, अलबत्ता बैंक का कर्जदार अलग से हो गई। इसी लिए समूह की महिलाओं को बार-बार सचेत किया जा रहा है, कि वह किसी के झांसे में न आए और अपने समूह के जरिए ईमानदारी से काम करें, लेन-देन करे, कारोबार करें, लेकिन किसी के झांसे में मत आएं।