बस्ती। गांव गढ़ी से लेकर कस्बा और शहर तक एक ही बात कही जा रही है, कि योगीजी पहले थाना, तहसील और ब्लॉक सुधारिए, फिर प्रदेश सुधरेगा। जो सरकार तीन स्थानों को नहीं सुधार सकती है, उससे हम पूरे प्रदेश को सुधारने की उम्मीद करे तो कैसे करें? यह भी कहा जा रहा है, कि योगीजी जो लोग जनता दरबार में आपके हाथ में इस उम्मीद से पत्र देकर आते हैं, कि जिसके खिलाफ शिकायत की गई, उसकी जांच करवाएगें और कार्रवाई करेगें, लेकिन पत्र जब घूम फिर कर उसी अधिकारी और कर्मचारी के पास आना तो, जिसके खिलाफ शिकायत है, तो न्याय कैसे मिलेगा? इसी लिए जनता दरबार का दिखावा बंद करिए, और पीड़ितों को तहसील, थाना और ब्लॉक के हाल पर छोड़ दीजिए। यह उस जनता दरबार में गए लोगों का सच हैं, जो पैसा और समय खर्च कर योगीजी से लखनउ या गोरखपुर जाते है। बहुत कम लोग ही ऐसे मिले जिन्होंने यह कहा हो कि योगीजी के पास जाना उनका मकसद सफल रहा। योगीजी जब पहली बार सीएम बने तो उनके जनता दरबार का महत्व होता था, अधिकारी भी जनता दरबार से आए पत्र को महत्व देते थे, तब योगीजी खुद पीड़ित की बात सुनते थे, और उन्हें उसे-तीन मिनट देते थे, उसके बाद जो आदेश और निर्देश देते थे, उस पर कार्रवाई भी होती थी, और जनता के समस्याओं का निस्तारण भी होता था। यह सिलसिला पहली बार के सीएम बनने के दो-तीन साल तक चला, लेकिन धीरे-धीरे योगीजी के जनता दरबार का महत्व कम होता गया, अधिकारियों ने भी रुचि लेना बंद कर दिया, और तो और योगीजी भी फरियादियों की नहीं सुनते बस चिठठी पकड लिया, और बगल में खड़े अधिकारी को ठीक उसी तरह थमा दिया, जिस तरह डीएम बी टीम के अधिकारियों को थमा देती है। इसी को देखते हुए योगीजी से क्रास डिस्टिकट जांच को अनिवार्य करने, बस्ती की शिकायत अन्य जनपदों के अधिकारियों से जांच कराने, आरोपी से जुड़े अधिकारियों को जांच से हटाने, जांच की वीडियोग्राफी कराने और फर्जी रिपोंर्टिग को बंद करने की मांग जोरों से उठ रही है। योगीजी आप जनता दरबार में फरियाद सुनते हैं, अच्छी बात है, लेकिन हकीकत यह है, कि पीड़ित कहीं भी फरियाद करे, जनता दर्शन में जाए, जनसुनवाई पोर्टल और रजिस्टर्ड डाके से भेजे, पत्र घूम फिरकर उसी लोकल थाने तहसील, ब्लॉक या संबधित विभाग में पहुंचता है, जहां अत्याचारी धनबली और प्रभावशालियों का दबदबा रहता है। जिसका परिणाम जांच अधिकारी फर्जी रिपोर्ट लगाता है, उल्टा पीड़ित को फंसा देता है, या कागजी निस्तारण कर देता है, समस्या जस की तस बनी रहती है। इसी लिए पीएमओ पीजी पोर्टल और जनसुनवाई पोर्टल सभी फेल है। डाक से भेजी गई शिकायतों का पता ही नहीं चलता, कि वह किस कचरे के डिब्बे में गई। जब तक जांच अधिकारी नहीं सुधरेगें, तब तक रामराज्य सिर्फ भाषणों में रहेगा, पहले थाना तहसील और ब्लॉक सुधारो, फिर प्रदेश सुधरेगा। राजू गुप्त लिखते हैं, कि मैं भी योगीजी के जनता दरबार गोरखपुर में गया था, जब जिला स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हुई, तो यह सोचकर योगीजी के पास गया कि यहां सुनवाई भी होगी और कार्रवाई भी होगी, लेकिन घूम फिर पर जब चौकी पर आया तो चौकी प्रभारी ने कहा कि पीएम तक चले जाओ आना तो यही पड़ेगा। योगीजी यह वह सच है, जिसे आप देखना और सुनना नहीं चाहते, जिस दिन आप इस सच को सुनने ओर देखने लगेंगे उस दिन कोई यह नहीं कहेगी, कि योगीजी जनता दरबार बंद करिए। योगीजी हकीकत से रुबरु होईए, नहीं हो सकता है, कि फिर रुबरु होने का जनता मौका न दें।
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