बस्ती। भाकियू भानु गुट के मंडल प्रवक्ता चंद्रेश प्रताप सिंह का कहना है, कि रामराज्य के दावे और कानून के राज की हकीकत के बीच आज उत्तर प्रदेश खड़ा हुआ है, कहते हैं, कि तब सीएम के गृह जनपद में कानून की धज्जियां उड़ाई जाएगी, दिन दहाड़े तलवार से हत्या होगी, तो अन्य जनपदों की कानून व्यवस्था कैसी होगी, इसे आसानी से समझा जा सकता है। कहने को तो योगीजी के पास एक एक से पुलिस अफसर हैं, लेकिन इनमें कोई भी ऐसा नहीं जो अन्य जनपदों को तो छोड़ दीजिए, गारेखपुर की कानून व्यवस्था को पटरी पर ला सके। योगीजी पूरे देश में घूम-घूमकर कहते हैं, कि अगर कानून का राज देखना हो तो उत्तर प्रदेश आइए, और जब कोई उत्तर प्रदेश आता है, तो कभी न आने की कसम खाकर जाता है। कोई किसी का डर ही नहीं रह गया, अपराधी जहां चाहते हैं, जैसे चाहते हैं, कानून को हाथ में ले लेते है। अपराधियों ने कानून को मजाक बनाकर रख दिया है, और सूबे के अधिक तमाशबीन बनकर रह गएं है।
कहते हैं, कि गोरखपुर में ’शिव कुमार तिवारी हत्याकांड’ जैसी वीभत्स घटना सिर्फ एक हत्या नहीं है। यह कानून-व्यवस्था और शासन की जवाबदेही पर बड़ा सवाल है। सवाल यह नहीं कि सरकार कितनी बार रामराज्य शब्द बोलती है। सवाल यह है कि क्या आम नागरिक को यह भरोसा है कि ’कानून अपराधी की पहचान, रसूख और राजनीतिक पहुंच देखे बिना समान रूप से लागू होगा?’रामराज्य की कल्पना में ’न्याय सर्वोपरि’ है, और लोकतंत्र में उस न्याय की कसौटी ’संविधान और कानून’ है। अगर अपराध रोकने के मानक अलग-अलग होंगे, पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठेंगे और पीड़ित परिवार न्याय के लिए भटकता रहेगा, तो फिर मंचों से किए गए रामराज्य के दावे सिर्फ भाषणों की सजावट बनकर रह जाएंगे।’लोकतंत्र को किसी विशेष धार्मिक नाम वाले शासन की नहीं, निष्पक्ष कानून के शासन की जरूरत है।’
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