बस्ती। जिले में ऐसा भी पुल हैं, जिस पर चलते ही लोगों की रुह कांपने लगती है। यहां पर पक्का या पीपे का पुल बनने का मतलब न जाने कितने लोगों की जिंदगियों को बचाना होगा। इस पुल का महत्व इतना है, कि यह पुल रुधौली और कप्तानंगज दो विधान सभाओं और रामनगर ब्लॉक के ग्राम नरकटहा और गौर ब्लॉक के ग्राम धधरिया दो ब्लॉकों को जोड़ती है। इधर रामनगर ब्लॉक हैं, तो उधर गौर ब्लॉक है। दो विधानसभाओं के बीच में होने से अभी तक किसी विधायक की ओर से पुल का निर्माण नहीं कराया जा सका। प्रदेश का पहला ऐसा पुल होगा, जिसे गांव वालों ने अपने पैसे से चलने लायक बनाया, इस खतरनाक पुल पर से रोज लगभग तीन से चार हजार लोगों का आना जाना रहता है, और यह सभी अपनी जान को जोखिम में डाल कर इधर से उधर और उधर से इधर से आते जाते है। बरसात के दिनों में पुल जानलेवा बन जाता है। अब तक न जाने कितने लोग इस पुल के चपेट में आ चुके है। इस लिए इस पुल का बनना अति आवष्यक है। एक दिन पहले पगारे घाट की साफ सफाई के दौरान रामनगर के ब्लॉक प्रमुख यशंकात सिंह की नजर इस पुल पर पड़ी, त्वरित उन्होंने सेतु निगम के अधिकारियों से बात की और उन्होंने पुल का फोटोग्राफ भी भेजा, फोटोग्राफ देखते ही सेतु निगम के अधिकारी भी दंग रह गए, और उन्होंने त्वरित पुल निर्माण का प्रस्ताव भेजने को कहा, और यह भी कहा कि प्रस्ताव मिलते ही इसे सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर निर्माण करवा दिया जाएगा। अगर यह पक्का पुल या फिर पीपे का पुल बन गया तो इससे हजारों लोगों को नया जीवन मिलने जैसा होगा। पुल को देख हैरानी होती है, कि इस पर अभी तक सासंद और विधायकों की नजर क्यों नहीं पड़ी? मान लीजिए कि लगभग दस मीटर का पुल यह लोग अपनी निधि से नहीं बनवा सकते तो कम से कम सेतु निगम को प्रस्ताव तो भेज देते है। यकीन मानिए अगर किसी सांसद या फिर विधायक ने प्रस्ताव दे दिया होता तो अब तक पुल कब का बनकर तैयार हो जाता, क्यों कि देखा जाए तो सेतु निगम के लिए इस तरह के पुल बनाने के प्राथमिकता होती है। प्रधान वीरेंद्र चौधरी, जटाशंकर चौधरी, अवधेश चौधरी, राजू गौतम, सुरेंद्र प्रताप सिंह, हरीष वर्मा एवं सुखराम गौड़ साहित अन्य का कहना है, कि अगर गांव वालों का बस चलता तो चंदा लगाकर पक्का पुल या पीपे का पुल बनवा देते, लेकिन गांव वालों के पास इतना पैसा नहीं होता कि वह हजारों रुपया चंदा दे सके, वैसे ही दोनों गांव के लोग आपसी सहयोग से मिटटी और और लकड़ी डालकर आते जाते हैं, कहते हैं, कि सबसे अधिक डर स्कूली एवं छोटे बच्चों को रहता है। एक तरह से छोटे बड़े सभी अपनी जान को जोखिम में डालकर पुल पर चलते है। मोटर साइकिल से भी लोग आते जाते है। यह पुल अभी तक सोषल मीडिया या अखबारों की हेड लाइन नहीं बनी वरना अब तक पुल का उद्वार हो गया होता। बहरहाल, अगर इस पुल का निर्माण ब्लॉक प्रमुख यषंकात सिंह के जरिए होना है, तो इसका श्रेय भी इन्हें ही मिलेगा।