बनकटी/बस्ती। अगर किसी पुलिस चौकी इंचार्ज को मनमानी करनी हो तो उन्हें पत्रकारों को हर माह फिक्सड सैलरी देनी होगी, यानि महीना देना होगा, जो नहीं देगा, उसे लूटने नहीं दिया जाएगा। इसी तरह का दर्द लालगंज थाना क्षेत्र के एक चौकी इंचार्ज ने पत्रकार के सामने पत्रकारिता दिवस पर बताया। पूछने लगें कि पत्रकार साहब आखिर एक चौकी इंचार्ज की कितनी कमाई होगी, कि वह पत्रकारों को महीना दे सके। वैसे भी चौकी इंचार्ज पर तमाम बोझ रहता है, कि अगर पत्रकार का भी बोझ उठाना पड़ा तो बोझ के तले दब जाएगें। चौकी इंचार्ज को पत्रकार से पीड़ा जब हुई, जब उन्होंने पत्रकार को महीना देने में मजबूरी बताया। मजबूरी बताना था, कि दूसरे दिन ऐसी खबर चलाने लगे कि उनके साथ में भाजपा नेता को भी लपेट में ले लिया। कहने लगे कि हमने पत्रकार साहब से कहा भी था, कि तर त्यौहार को हमसे ले लिया करिए, लेकिन महीना नहीं दे पाउंगा। वैसे भी लाजगंज थाना क्षेत्र के पत्रकार अपने कारनामों के कारण चर्चा में रहते है। यह पहली बार सुना गया कि कोई पत्रकार पुलिस चौकी से भी महीना मांग रहा है। पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मानी जाती है, जिसकी विश्वसनीयता उसके आचरण, निष्पक्षता और नैतिक मूल्यों पर आधारित होती है। लेकिन जब किसी क्षेत्र में पत्रकारों के व्यवहार को लेकर लगातार प्रश्न उठने लगें, तो यह पूरे पत्रकार समाज के लिए आत्ममंथन का विषय बन जाता है।
लालगंज क्षेत्र में कथित पत्रकारों के खिलाफ समय-समय पर यह आरोप सामने आते रहे हैं कि वे प्रधानों से कमीशन या अनावश्यक लाभ लेने की बात करते हैं। अब इसी क्रम में कुछ मामलों में यह भी चर्चा है कि चौकी प्रभारी से भी मासिक मांग जैसी बातें सामने आई हैं। यदि ऐसे आरोपों में सच्चाई का कोई भी अंश हो, तो यह पत्रकारिता की मूल भावना के विपरीत है और अत्यंत गंभीर विषय है। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि पत्रकारों के उत्पीड़न और जमीन से जुड़े मामलों को लेकर लगभग दो दर्जन पत्रकारों ने कल जिला अधिकारी को ज्ञापन देने का प्रयास किया, लेकिन ज्ञापन स्वीकार नहीं किया गया। यह स्थिति भी चिंताजनक मानी जा रही है, क्योंकि लोकतंत्र में संवाद और शिकायत निवारण की प्रक्रिया खुली और पारदर्शी होनी चाहिए। यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि ऐसे सभी आरोपों की सत्यता का निर्धारण केवल निष्पक्ष जांच के माध्यम से ही किया जा सकता है। किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता, दबाव या अनुचित लाभ की प्रवृत्ति पत्रकारिता की गरिमा को ठेस पहुँचाती है और जनता के विश्वास को कमजोर करती है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण है कि पूरे पत्रकार समुदाय को कुछ कथित घटनाओं के आधार पर नहीं आँका जाए। आज भी पत्रकारिता में अनेक ऐसे लोग कार्यरत हैं जो पूरी ईमानदारी, निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ समाज को सही दिशा देने का कार्य कर रहे हैं। आवश्यकता इस बात की है कि जहां कहीं भी अनियमितता या शिकायतें हों, उनकी निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर कार्रवाई की जाए। वहीं पत्रकारों और प्रशासन के बीच संवाद, पारदर्शिता और आपसी सम्मान बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है, ताकि लोकतंत्र के इस महत्वपूर्ण स्तंभ की गरिमा बनी रहे और जनता का विश्वास अटूट रहे।
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