बस्ती। जो ठेकेदार हर साल स्वास्थ्य विभाम में सिर्फ अस्पतालों के उच्चीकरण के नाम पर पांच सौ करोड़ से अधिक का कारोबार करता हो, और जिसे डिप्टी सीएम एवं हेल्थ मंत्री का सबसे करीबी और चहेता माना जाता है, अगर उसके कारोबार में शुभम अग्रवाल जैसा बस्ती का ठेकेदार रोड़ा बनेगा और वर्चस्व को समाप्त करने की हिम्मत करेगा तो दस मिनट में कार्रवाई भी होगी, टेंडर निरस्त कभी निरस्त होगा और भुगतान पर रोक भी लगेगी। इतना ही नहीं शुभम अग्रवाल का साथ देने वाले सीएमएस और अन्य को निलंबित भी होना पड़ेगा। जिस तरह शिकायत करने के दस मिनट के भीतर डिप्टी सीएम के द्वारा आनन-फानन में कार्रवाई की गई, अगर यही कार्रवाई इससे पहले भी अन्य शिकायतों पर मंत्रीजी किए होते तो आज उनके विभाग का 100 बेड वाले हर्रैया और महिला अस्पताल बस्ती के सीएमएस फर्जीवाड़ा करने की हिम्मत न करते। जो लोग यह जानना और समझना चाहते हैं, कि दोनों अस्पतालों को बजट जारी होने के कुछ ही घंटों में कैसे? डिप्टी सीएम ने इतनी बड़ी कार्रवाई कर दी, उन लोगों को बताना चाहता हूं, कि यह कार्रवाई कोई भ्रष्टाचार मिटाने या भ्रष्टाचारियों को सबक सिखाने के लिए नहीं, बल्कि इस लिए की गई, क्यों कि बस्ती के शुभम अग्रवाल नामक ठेकेदार ने डिप्टी सीएम के सबसे खास सिपहसलार मनीश मल्होत्रा के कारोबार में सेंध मारने की हिम्मत की।
बता दें कि यह वही लखनउ आप्टिकल के मनीश मल्होत्रा हैं, जिन्होंने दो साल पहले जिला महिला अस्पताल के छह करोड़ का भुगतान कोशागार में चार फीसद यानि 24 लाख कमीशन देकर मार्च के अंतिम दिन यानि 31 मार्च 23 को अनियमित रुप भुगतान ले लिया था। एक तरह से मनीष मल्होत्रा को स्वास्थ्य विभाग का किगं माना जाता है। सीएमओ की तैनाती में भी इनकी दखंदाजी रहती है। यह ठेका पटटी पाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं, आजकल भाजपा के जो नेताओं को चाहिए, वह यह सब उपलब्ध करा देतें है। पूरे प्रदेश में यह अकेला ऐसे ठेकेदार हैं, जिन्हें अस्पतालों के उच्चीकरण के नाम पर फर्जीवाड़ा करने में मास्टर माइंड कहा जाता है। इन्हें उच्चीकरण करने के आलावा और कोई काम नहीं आता। चूंकि उच्चीकरण में सबसे अधिक लाभ यानि अगर दस करोड़ का बजट मिला तो पांच करोड़ का लाभ होता है। जब इन्हें पता चला कि बस्ती के ठेकेदार षुभम अग्रवाल नामक व्यक्ति उनका विरोधी बनने का प्रयास कर रहा है, और उनके कारोबार में सेंधमारी कर रहा है, तो इन्होंने इसे सबक सिखाने और अपने रास्ते से हटाने के लिए अपने आका यानि डिप्टी सीएम का सहयोग लिया। उसके बाद जो डिप्टी सीएम ने मिनटों में किया, उसे सीएम महीनों में नहीं कर पाएगें। इस कार्रवाई के बहाने मनीश अग्रवाल ने उन लोगों को एक संदेश देने का प्रयास किया जो लोग अस्पतालों के उच्चीकरण के नाम पर रातों-रात करोड़पति बनने की साजिश सीएमएस के साथ मिलकर कर रहे है। इन्होंने एक ही झटके में दो सीएमएस, दो जेम पोर्टल लिपिक/फार्मासिस्ट और ठेकेदार को धूल चटा दिया। रही बात बस्ती के ठेकेदार शुभम अग्रवाल की तो यह कभी लखनउ में एक मेडिकल की एजेंसी पर सेल्स मैन का काम करते थे, सेल्समैनी करते-करते इन्होंने कैसे करोड़पति बना जाता है, सारे गुण-अवगण सीख लिया, और एक दिन सेल्समैन की नौकरी छोड़ दी, और ठेकेदार बन गए। बताते हैं, कि ठेकेदारी के धंधे में यह काफी माल कमा चुके है, माल कमाने के लिए इन्होंने वह सबकुछ किया जो मनीष मल्होत्रा ने किया, फर्क इतना है, कि मनीश मल्होत्रा बड़े-बड़े भाजपा नेताओं की इच्छा की पूर्ति करते है, और शुभम अग्रवाल जिले के छोटे-छोटे अधिकारियों और नेताओं का ख्याल रखते है। जिस तरह आजकल महिलाओं को लेकर सोशल मीडिया पर भुक्तभोगी महिलांए यह कहती नजर आ रही है, कि महिलाओं की तरक्की की सीढ़ी नेताओं के विस्तर से होकर गुजरती है। ठीक उसी तरह ठेकेदारों की तरक्की भी मंत्रियों की इच्छाओं की पूर्ति पर निर्भर है। कहने का मतलब सबसे अधिक नेताओं के चरित्र का ही आजकल हनन हो रहा है। अब तो महिला नेत्रियों को शक की निगाह से देखा जाने लगा।
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