बस्ती। जिले के ठगबाजों में महादेवा चौराहें के आरके ज्वैलर्स के मालिक राजन गुप्त का नाम भी शामिल हो गया। इन्हें अन्य ठगबाजों से कम ठगबाज इस लिए माना जा रहा हैं, क्यों कि इन्होंने लाखों और करोड़ों में ठगी नहीं की बल्कि एक लाख 15 हजार 371 रुपये की ठगी की है। इनके ठगी के षिकार थाना मुंडेरवा के मूड़ाडीहा निवासी अधिवक्ता विक्रम पुत्र फूलचंद्र ने मुडंेरवा थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। लिखाए गए एफआईआर में कहा गया है, कि महादेवा चौराहा पर आरके ज्वैलर्स की दुािन है, जिसके मालिक राजन गुप्त पुत्र राजबली उर्फ दोसई निवासी ग्राम बेहिल थाना मुंडेरवा है। कहा कि इन्हें 30 ग्राम 24 कैरेट सोने की चैन खरीदने के लिए 48 हजार प्रति ग्राम के दर से कई किष्तों में राजन को नकद एवं गूगल पे के जरिए कुल एक लाख 15 हजार 371 रुपया जमा किया, लेकिन राजन गुप्त ने सोने की चैन देने से इंकार कर दिया। जब इसकी शिकायत 13 मई 26 को एसपी से की गई तो राजन गुप्त ने जांच अधिकारी को एक फर्जी रसीद दिखाकर पुलिस ने मामले को रफादफा कर दिया, मामले को रफादफा करने से पहले पुलिस ने षिकायतकर्त्ता से कोई पूछताछ नहीं किया, और एक तरफा रिपोर्ट लगा दिया। फिर राजन से मिला और कहा कि शादी से पहले हम चैन दे देगें। जब राजन के पास पहुंचा तो उसने चैन देने से साफ मना कर दिया। लिखा कि इस प्रकार राजन गुप्त के द्वारा छल एवं धोखाधड़ी करके एक लाख 15 हजार 317 रुपया ठग लिया। जिस सोने चांदी की दुकान विष्वास पर चलती है, अगर कोई सोनार इस तरह की बेईमानी करेगा तो वह कारोबार नहीं कर पाएगा। एक बार अगर किसी सोनार ने विष्वास खो दिया तो समझो उसने अपने दुकान पर खुद ताला लगा लिया। अमूमन कोई सोनार इस तरह की ठगी करके अपने पैर में कुल्हाड़ी नहीं मारता, लेकिन आरे ज्वैलर्स ने थोड़े से पैसे के लिए अपने पैर में कुल्हाड़ी मार लिया, कारोबार से तो हाथ धोना पड़ा, अब जेल की हवा भी खानी पड़ेगी। चोरी, बेईमानी और ठगीगिरी करना कारोबारियों का नहीं बल्कि जालसाजों का काम है। इस ठगी के मामले में राजन गुप्त के उस हिम्मत की दाद देनी होगी, जिसमें इन्होंने एक अधिवक्ता को ठगा। जाहिर सी बात हैं, कि अधिवक्ता को ठगने वाला कोई मामूली सोनार तो होगा नही।
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