बस्ती। अगर ग्रामीण क्षेत्रों में एक नहीं दो-दो गांव में चीता दिखाई देता है, तो यह वन विभाग के लिए काफी चिंता का विषय है। आखिर जंगज छोड़कर क्यों चीता जैसा खतरनाक जानवर आ रहे हैं, और बच्चों को जन्म दे रहे है। बस्ती के वन विभाग के लोगों में इतनी हिम्मत नहीं कि वह चीता पकड़ सके, कहना गलत नहीं होगा, उनके पास चीता पकड़ने का साध नही नहीं है। इसी लिए यह लोग यह कर टाल देते हैं, कि तलाश जारी है। जब तक इनकी तलाश होती तब तक वीता न जाने कितने बकरियों और कुत्तों के बच्चों को अपना शिकार बना चुके होते है। मुडेरवा थाना क्षेत्र के ग्राम लहरी में कुछ दिन पहले झाड़ी में चीता और उसके चार बच्चे दिखे जब गांव का एक व्यक्ति शोच करने गया था। अब लालगंज थाना क्षेत्र के ग्राम ताड़ीजोत में गांव के बीच में गढढे में चीता देखा गया। गांव वाले बताते हैं, दो दिन पहले देखा गया था। कहते हैं, कि पिछले कई दिनों से गांव की बकरियां गायब हो रही थी, लोगों की समझ में नहीं आ रहा था, कि आखिर बकरियां कहां गायब हो रही है। अब पता चला कि गायब नहीं बल्कि चीता खा ले रहा था। कोई इसे तेंदुआ बता रहे हैं, तो कोई चीता। गांव के विष्वनाथ पांडेय, लोकेष पांडेय, रोहित पांडेय, मोहित पांडेय, घनष्याम पांडेय, शिवशंकर पांडेय, गिरीशचंद्र पांडेय और सुमन पांडेय का कहना है, कि गांव वाले काफी डरे हुए और छोटे बच्चों को घर से बाहर नहीं निकाल रहे है। बताया कि हम लोगों ने वन विभाग को इसकी जानकारी दे दी है।
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