बनकटी/बस्ती। अगर किसी प्राइवेट अस्पताल में एलर्जी की पेसेंट की मौत इंजेक्षन लगने से हो जाती है, तो इसे किसकी गलती मानी जाए, उस अस्पताल के दंपति को माना जाए या फिर सीएमओ और डिप्टी सीएमओ की, जिन्होंने पैसा लेकर एक ऐसे अस्पताल को लाइसेंस दे दिया, जहां के डाक्टरों के पास कोई वैध डिग्री ही नहीं। मालिक, मनीष श्रीवास्तव के पास अगर डी. फार्मा की डिग्री है, तो पत्नी विजेता श्रीवास्तवा के पास एएनएम की। डी. फार्मा की डिग्री पर पति एमबीबीएस बना हुआ है, और पत्नी एएनएम की डिग्री लेकर गाइनिस्ट बनकर डिलीवरी और आपरेशन कर रही है। इन सबके लिए किसी और को नहीं बल्कि सीएमओ और डिप्टी सीएमओ को जिम्मेदार माना जा रहा है। इसी लिए कहा जा रहा हैं, कि क्या सीएमओ डा. राजीव निगम और डिप्टी सीएमओ एवं नर्सिगं होम के नोडल डा. एसबी सिंह भगवान को साक्षी मानकर यह कसम खा सकते हैं, कि हमने कभी किसी नर्सिगं होम को पैसा लेकर लाइसेंस नहीं दिया। अगर यह दोनों गंगा में डुबकी लगाकर भी यह कहे हैं, कि मैं ईमानदार हंू और हमने कभी गलत लाइसेंस जारी नहीं किया तो भी मत मानिएगा कि यह दोनों सही बोल रहे है। ऐसा लगता है, कि मानो इन दोनों ने कसम खा ली हो कि जब कोई मरीज मरेगा तभी हास्पिटल को सील करेगें। ऐसा बार-बार क्यों होता है, कि अधिकांश मरीजों की मौत उसी प्राइवेट अस्पताल में होती है, जहां पर फर्जी डाक्टर और फर्जी गाइनी होते है। सवाल उठ रहा है, कि आखिर क्या देखकर डिप्टी सीएमओ लाइसेंस देने की रिपोर्ट लगाते हैं, जब कि उस अस्पताल का मानक ही पूरा नहीं होता, अगर मानक पूरा होता तो मुंडेरवा स्थित अमृत हास्पिटल में स्टाफ नर्स के इंजेक्षन लगाते ही एलर्जी के महिला मरीज की मौत तड़प-तड़प कर अस्पताल में न हो गई होती। जिस अस्पताल के मालिक मनीष श्रीवास्तव के पास डी. फार्मा की डिग्री हैं, और उसकी पत्नी के पास एएनएम की डिग्री हो, उस अस्पताल को कैसे लाइसेंस जारी हो गया, मेडिकल स्टोर चलाने वाला एमबीबीएस और एएनएम गाइनी बनकर मरीजों की जिंदगियों के साथ खिलवाड़ आज से नहीं एक साल से कर रही है, फिर भी सीएमओ और डिप्टी सीएमओ की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। कार्रवाई करने को कौन कहें, लाइसेंस जारी कर दिया। जिस अस्पताल में स्टाफ नर्स से लेकर अन्य विहारी हो, उस पर कैसे सीएमओ और डिप्टी सीएमओ ने यकीन कर लिया। इससे स्पष्ट हैं, कि अमृत हास्पिटल को जो लाइसेंस दिया गया, उसमें भारी लेन-देन हुआ होगा। ऐसा मृतक के परिजन का कहना है। अस्पताल को तो सीएमओ ने तब सील किया जब एक महिला की जान चली गई। इस पूरे मामले में मेडिकल कालेज के एक डाक्टर की भी जिम्मेदारी मानी जा रही है, यह डाक्टर साहब लालच में इस अस्पताल में आकर आपरेशन करते है।

मृतका रोशनी के पति अनिल कुमार निवासी ग्राम लोहदर थाना मुंडेरवा की ओर से दी गई तहरीर में कहा गया हैं, कि 14 मई 26 की रात 12 बजे पत्नी की तबियत अचानक खराब होने के कारण अमृत हास्पिटल इलाज के लिए ले आए, बताया कि पत्नी के शरीर में तेज खुजली हो रही थी, वहां पर मौजूद स्टाफ नर्स और अन्य ने कथित डाक्टर के सलाह पर पत्नी को एक साथ तीन इंजेक्षन लगा दिया। इंजेक्षन लगते ही पत्नी की तबियत और अधिक खराब होने लगी। मुंह से झाग निकलने लगा। अस्पताल के स्टाफ घबड़ा गए और मरीज को अस्पताल से निकालने लगे, मांगने के बाद भी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराया गया। देने से ही मना कर दिया। इलाज जारी रखने को भी कहा, लेकिन उन लोगों ने कहीं और ले जाने को कहा, और जबरिया पत्नी को मेरी मोटरसाइकिल में बैठा दिया। पत्नी को जिला अस्पताल ले जाते समय ओड़वारा के पास उसका शरीर शिथिल हो गया। किसी तरह अस्पताल पहुंचे, डाक्टरों ने बताया कि गलत इजंेक्षन लगाने के कारण महिला की मौत हुई। उसके बाद जब हम लोग अमृत हास्पिटल पहुंचे तो सभी पीछे की गेट से फरार हो गए। वहां पर मौजूद दो लोगों से जब दवा की पर्ची मांगी तो धमकी देते हुए कहा कि ‘जो करना हो कर लो’ पर्ची नहीं मिलेगी। बाद में मैनुअल पर्ची बनाकर दिया।