बस्ती। आप लोगों को जानकर हैरानी होगी कि सिखों में भी परिवारवाद पनपने लगा, और इसका श्रेय उत्तर प्रदेश सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के सदस्य कंपनीबाग के हरि सिंह उर्फ बबलू को जाता है। जिस तरह सिखों में परिवारवाद का जहर फैल रहा है, अगर इसका समय रहते इलाज नहीं किया तो पूरे प्रदेश और देश में फैल जाएगा। तब इसे रोक पाना कठिन होगा। हाल ही में बस्ती में जो कमेटी की ओर से 15 जिलों के सिखों की बैठक हुई, उसमें जो पोस्टर जारी हुआ उसमें 12 में से आधे से अधिक बबलू के परिवार का फोटो लगा हुआ। खासबात यह रही है, कि बैठक तो बस्ती में हुआ, लेकिन बस्ती के गुरुद्वारा के प्रबंधक और ज्ञानीजी लोगों को ही शामिल नहीं किया गया। जिले के सबसे पुराने गुरुद्वारा गांधीनगर के प्रबंधक सरदार हरिवंष सिंह और इसके ज्ञानी सरदार प्रदीप सिंह को ही नहीं बुलाया गया गया, और तो और पूर्वांचल सिख वेलफेयर सोसायटी के संस्थापक एवं सचिव सरदार जगवीर सिंह तक को नहीं बुलाया गया। सरदार जगवीर सिंह का कहना है, कि बब्लू से जिसे चाहा उसे बुलाया, जिसे नहीं चाहा, उसे नहीं बुलाया, ऐसा लगता है, कि मानो यह कार्यक्रम हरि सिंह के परिवार का ही है। सवाल करते हैं, कि जब कार्यक्रम उत्तर प्रदेश सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी की ओर से आयोजित किया गया तो क्यों नहीं जिले के सभी गुरुद्वारा के प्रबंधक और ज्ञानी को बुलाया गया? कहते हैं, कि अगर हमको बुलाते तो हम भी कुछ बोलते और सुझाव देते। कहते हैं, कि जब मंडल के सिखों की इतनी ही अपेक्षा करनी थी, तो बैठक मंडल के बाहर किसी अन्य जिले में रखते, बस्ती में क्यों रखा और अगर बस्ती में रखा तो कम से कम बस्ती के सभी गुरुद्वारा प्रबंधकों और ज्ञानी को बुलाना चाहिए था, आखिर सिर्फ कंपनीबाग गुरुद्वारा प्रबंधक को बुलाकर यह कमेटी क्या साबित करना चाहती है? ऐसा लगता है, कि मानो जिले में भी परिवारवाद को बढ़ावा देने के लिए बैठक का आयोजन किया गया। सरदार कुलवेंद्र सिंह जैसे सिख की उपेक्षा की गई, जिसने मानसरोवर की यात्राकर पूरे सिख समाज का नाम रोशन किया। बैठक तो संगठन के विस्तार, समाजहित के कार्यो एवं आगामी योजनाओं की चर्चा के लिए बुलाई गई थी, कमेटी का मकसद कितना हल हुआ या तो नहीं मालूम, लेकिन परिवारवाद को बढ़ावा अवष्य मिला। कहा भी जाता है, कि अगर बस्ती के जितने भी गुरुद्वारा हैं, उसके प्रबंधक को ही आमत्रित कर दिए होते तो कमेटी का मकसद हल हो गया, इससे जो विवाद उत्पन्न हुआ, उसका प्रभाव आने वाले समय में सिख समाज पर दिखाई देगा। कहना गलत नहीं होगा, कि पहली बैठक ही विवादों में घिरती नजर आ रही है। बस्ती के सिख लोग अपने आप को अपमानित महसूस कर रहे है, और इसके लिए सभी लोग हरि सिंह उर्फ बबलू को जिम्मेदार मान रहे है। बैठक में भाग न लेने को जो अधिकार बस्ती के सिखों का छीना गया, उसे बस्ती के सिख आसानी से नहीं भूल पाएगें।
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