बस्ती। डीएम और एसपी का हाईकोर्ट का कोई खौफ न रहने की बात हम नहीं बल्कि हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले बरदिया लोहार के राजेश सिंह का। इन्होंने क्षेत्र में बालू के अवैध खनन को लेकर उच्च न्यायालय में जनहित याचिका संख्या 12356/2014 राजेष सिंह बनाम सरकार दायर किया। आईजीआरएस के तहत की गई षिकायत में इन्हाोंने कहा िकइस मामले में कोर्ट के डबल बेंच की ओर से 26 फरवरी 14 को एक आदेश जारी किया, जिसमें डीएम, एसपी और खनन अधिकारी को एक साथ बरदिया लोहार में अवैध खनन
स्थल पर जाने का आदेष दिया। खनन को रोकने का आदेश भी जारी किया। आदेश का कम्पलाइंस रिपोर्ट छह अप्रैल 26 तक प्रस्तुत करने को कहा। याचिका दायर करने वाले का कहना है, कि खनन रोकने को कौन कहे, तीनों में कोई अधिकारी मौके पर नहीं अरए, अलबत्त खनन निरीक्षक ने फर्जी रिपोर्ट अवष्य लगा दिया। कहा कि बरदिया लोहार में पटटाधारकों के द्वारा बड़े पैमाने पर बीडी बंधे से 500 मीटर की परिधि में आवंटित गाटा संख्या के आलावा किसानों के अन्य गाटा में भी खनन कर रहे है। कहते हैं, कि जब भी कोई किसान षिकायत करता तो पुलिस वाले या तो किसान के घर दो-चार सिपाही भेज देते या फिर शिकायतकर्त्ता के खिलाफ ही मुकदमा दर्ज कर देते, पुलिस अब तक मनोज सिंह और बाबूराम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर चुकी है। कहते हैं, कि पटटा चार हे. में खनन का था, लेकिन 35 हे. में खनन कर दिया, लगभग 15 करोड़ से अधिक का अवैध खनन कर डाला, यह पटटा हमीरपुर के दीपेंद्र कुमार गुदौलिया के नाम से है। पटटाधारक गाटा संख्या 412 में करीब आठ हे. और गाटा संख्या 413 में 3.540 हे. बालू खनन का पटटा हुआ। कहा कि हमारी भूमिधरी जमीन 412े/1.640 हे रक्बा अवैध रुप से छह फिट गहरा खनन किया गया। इतना ही नहीं गांव के अनेक काष्तकारों के सैकड़ों गाटा संख्या की जमीन पर अवैध खनन कर रहा है। कहा कि खनन अनुबंध और न्यायालय के आदेष का सरासर उल्लघंन हो रहा है। पटटे को निरस्त करने की मांग की गई है। कहा कि पटटाधारके के संसारपुर में जो बालू डंप किया गया, वह खनन से कई गुना अधिक किया गया। देखा जाए तो बालू के अवैध खनन में न तो एडीएम और न डीएम और न खनन अधिकारी ही कोई ठोस कार्रवाई करते। चूंकि बालू के अवैध खनन से एक बड़ा हिस्सा लोगों के पास लाजा है, इस लिए कोई कार्रवाई नहीं करता, इस अवैध कारोबार में वैसे सबसे अधिक लाभ खनन निरीक्षक का होता है, लेकिन हल्का दरोगा, सिपाही और एसओ का होता, अगर नहीं होता तो थाने के सामने बालू से लदी गाड़िया फर्राटे से निकल जाती है, लेकिन पुलिस रोकते तक नहीं।
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