बस्ती। बभनान के शिकायतकर्त्ताओं में चेयरमैन प्रबल मलानी और उनके ठेकेदारों का इतना आंतक हैं, जितना किसी अपराधी या गुंडा का होता है। अगर कोई किसी ने इनके भ्रष्टाचार की शिकायत कर दी तो समझो उसकी खैर नहीं, अगर कोई मानता तो पहले उसे डज्ञराते धमकाते हैं, उसके बाद भी नहीं माना तो उसके खिलाफ खुद और अपने ठेकेदार वाहिद से मुकदमा दर्ज करवा देते है। रही बात पत्रकारों की तो यहां पर वही पत्रकार सुरक्षित रह सकता है, जो इनकी जीहजूरी करता है, जो नहीं करता, उसे यह खुद मारते हैं, और अपने गुर्गो से मरवाते हैं, मार खाने वाला पत्रकार इस लिए इनके सामने कमजोर पड़ जाता है, कि कोई पत्रकार मारखाने वाले पत्रकार का साथ नहीं देता, मजबूर होकर या तो पत्रकार को अन्य पत्रकारों की तरह समझौता करना पड़ता या फिर बभनान छोड़कर भागना पड़ता। अब आ जाइए, यहां के सभासदों की तो यह भी पत्रकारों के साथ बिक गए, आवाज तो उठाते हैं, लेकिन ठेकापटटी मिलते ही चुप हो जाते है। अब विरोध करने वाला कोई नहीं बचा, अगर गांव वालों ने घटिया निर्माण सड़कों या नाली का विरोध किया तो उससे कहा जाता है, कि जिस तरह अभी एक पत्रकार को पीटा गया, चेयरमैन साहब तुम लोगों को भी पीटेगें। यहां पर एक ही शिकायतकर्त्ता बचे, जिनका नाम विवेक तिवारी है, अभी तक यह चेयरमैन से नहीं डरे जब कि डराने के लिए पहले इन्होंने और उसके बाद इनके चहेते ठेकेदार वाहिद ने दो फर्जी मुकदमा दर्ज करवाया, अब जब फिर शिकायत किया तो कहने लगें कि अब की मुकदमा दर्ज करवाकर गुंडा एक्ट लगवाउंगा, और उसके बाद जिला बदर करवाउंगा, क्यों कि मेरे पास पैसा बहुत है। अब आप खुद सोचिए बभनान में विकास के नाम पर किस तरह लूट होती होगी, प्रबल मलानी पहले ऐसे चेयरमैन होगें, जो आंतक फैलाकर भ्रष्टाचार करते। इनको चेयरमैन बनाकर बभनान के लोग पछता रहे हैं, और कह रहे हैं, कि इनसे लाखगुना अच्छा पूर्व चेयरमैन सईद रहें, कम से कम वह आतंक तो नहीं फैलाते थे, और न आतंक फैलाकर भ्रष्टाचार करते थे, ऐसा भी नहीं कि उन्होंने भ्रष्टाचार नहीं किया, कौन ऐसा चेयरमैन और ईओ होगा, जिसने सरकारी धन का दुरुपयोग नहीं किया, किसी ने कम तो किसी ने अधिक किया, लेकिन किया सभी ने। बभनान के पत्रकारों को जिले के सबसे अधिक डरपोक और कायर माना जाता हैं, कायर इस लिए कहा जाता है, क्यों कि जो पत्रकार अपने ही पत्रकार साथी को चेयरमैन से मिलकर मरवाए, तो उसे कायर ही कहा जाता है, डरपरोक इस लिए क्यों कि जो डर का और चेयरमैन की चाकरी कर पत्रकारिता करता, उसे डरपोक ही कहा और माना जाता है। अगर कायर और डरपोक न होते तो इनके सामने चेयरमैन पत्रकार को न मार पाते। ऐसे डरपोक और कायर पत्रकारों को चुल्लु भर पानी में डूब मरना चाहिए, कहने को तो यह लोग अपने आप को बाबू साहब कहते हैं, लेकिन काम नीचता जैसी करते है।

विवेक तिवारी ने अपनी व्यथा एसपी को बताते हुए लिखा कि चेयरनमैर प्रबल मलानी और उनके ठेकेदार तीसरी बार फर्जी मुकदमा दर्ज कराने और गुंडा एक्ट लगवाकर जिला बदर करवाने की धमकी देते है। इन्होंने आईजीआरएस में एक और भ्रष्टाचार की शिकायत की है। बभनान हलुआपार के पूर्व माध्यमिक विधालय चेतरा तक ाड़का का निर्माण हो रहा है, यह सड़क दो भागों में बन रहा है, मौके पर कोई सीआईबी नहीं लगा, जिससे पता चल सके कि नगर पंचायत इस सड़क को कितनी लागत में निर्माण करवा रही है, और इसके ठेकेदार कौन हैं? कटटी गिटटी डाली जा रही हैं, जिसके डालने से सड़क कमजोर हो जाती है, और एक बरसात भी नहीं झेल पाती, सड़क किनारे एजिंग में घटिया ईट का प्रयोग किया जा रहा है, ईट की जुड़ाई बालू से की जा रही है, जिसे मौके पर आसानी से देखा जा सकता है, इस सड़क का निर्माण चेयरमैन के चहेते गनेशपुर के चर्चित ठेकेदार आशुतोश श्रीवास्तव करवा रहे है। यही लोगों को डराते और धमकाते हैं, कि जिस तरह चेयरमैन से पत्रकार को मारा उसी तरह विरोध करने वाले पीटे जाएगें।