फिर ‘छतरिया’ में निकला ‘मनरेगा’ के ‘भ्रष्टाचार’ का ‘जिन्न’

बस्ती। रुधौली विकासखंड की ग्राम पंचायत छतरिया एक बार फिर मनरेगा कार्यों में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। ग्रामीणों का आरोप है कि विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग का सिलसिला लगातार जारी है और जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के चलते भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत छतरिया में पहले भी बिना सड़क निर्माण कराए भुगतान किए जाने का मामला चर्चा में रह चुका है। अब एक बार फिर बितानू के खेत के बगल स्थित पोखरे की खुदाई कार्य में फर्जीवाड़े के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मौके पर कार्य की स्थिति संतोषजनक नहीं है, जबकि कागजों में मजदूरों की उपस्थिति दर्शाकर भुगतान की तैयारी की जा रही है। आरोप है कि वास्तविक मजदूरों के स्थान पर फोटो के माध्यम से फर्जी हाजिरी लगाई जा रही है और रोजगार गारंटी योजना के तहत गरीबों को मिलने वाले रोजगार पर डाका डाला जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस पूरे खेल में ग्राम प्रधान, रोजगार सेवक, तकनीकी सहायक और ग्राम सचिव की मिलीभगत से सरकारी धन का बंदरबांट किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि कई दिनों से चर्चा में रहने के बावजूद किसी सक्षम अधिकारी द्वारा स्थलीय निरीक्षण नहीं किया गया है। स्थानीय लोगों के बीच यह भी चर्चा है कि पिछले लगभग छह माह तक विकासखंड रुधौली की कई ग्राम पंचायतों में कथित भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा हुआ था। ग्रामीणों का कहना है कि तत्कालीन खंड विकास अधिकारी और कुछ ग्राम प्रधानों के बीच कथित तौर पर सहमति न बनने के कारण मनमाने भुगतान और विवादित कार्यों को मंजूरी नहीं मिल पा रही थी। लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद हालात तेजी से बदले और कई ग्राम पंचायतों में कथित रूप से फर्जी भुगतान तथा संदिग्ध कार्यों का सिलसिला फिर से शुरू हो गया। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन ग्रामीणों के बीच इसे लेकर व्यापक चर्चाएं हैं। इसी बीच विकासखंड प्रशासन की कार्यशैली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ समय पूर्व एक अन्य ग्राम पंचायत से संबंधित शिकायत के दौरान प्रभारी खंड विकास अधिकारी यादव से हुई बातचीत का एक ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वायरल ऑडियो में कथित तौर पर शिकायतकर्ता से पहले ग्राम प्रधान से मिलने की बात कही गई थी। हालांकि वायरल ऑडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इसको लेकर प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। ग्राम पंचायत छतरिया में इससे पहले भी मनरेगा कार्यों में अनियमितताओं के आरोप लग चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सोहरता देवी के चक से सरहद तक चक मार्ग निर्माण के नाम पर करीब डेढ़ से दो वर्ष पूर्व भुगतान कर दिया गया था, लेकिन आज तक मौके पर उक्त मार्ग का निर्माण नहीं कराया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि कागजों में कार्य पूर्ण दिखाकर सरकारी धन निकाल लिया गया, जबकि धरातल पर कार्य दिखाई नहीं देता। कुछ ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि ग्राम प्रधान की दबंगई के चलते कई मीडिया कर्मियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा है और कुछ लोगों के सहयोग से कथित भ्रष्टाचार को संरक्षण मिलने की चर्चाएं भी हैं। लगातार सामने आ रहे आरोपों के बीच ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत छतरिया सहित विकासखंड रुधौली की अन्य ग्राम पंचायतों में कराए गए मनरेगा कार्यों की उच्चस्तरीय जांच, स्थलीय सत्यापन तथा फर्जी भुगतान की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पारदर्शी जांच नहीं कराई गई तो सरकार की महत्वाकांक्षी मनरेगा योजना का उद्देश्य प्रभावित होगा और गरीब मजदूरों के अधिकारों का हनन होता रहेगा।