बस्ती। सूबे के कृषि मंत्री ‘सूर्य प्रताप शाही’ पूर्वांचल के दूसरे ऐसे कैबिनेट मंत्री हैं, जिन्हें जिले का प्रभारी मंत्री बनाया गया, इससे पहले हरिशंकर तिवारी प्रभारी मंत्री रहे। जब से शाहीजी जिले के प्रभारी मंत्री बनाए गए, तब से किसान से लेकर मीडिया यह सवाल कर रही है, कि क्या यह जिले को भ्रष्टाचारमुक्त कर पाएगे? यह भी कह रही है, कि जब यह अपने जिले को भ्रष्टाचारमुक्त नहीं कर पाए तो फिर बस्ती को कैसे भ्रष्टाचारमुक्त कर पाएगें? सलाह के रुप में इनसे यह कहा जा रहा है, कि मंत्रीजी पहले आप अपने विभाग को भ्रष्टाचारमुक्त करिए, फिर जिले को करिएगा? जिस दिन मंत्रीजी अपने विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त करने में सफल होगें, जिसकी संभावना जीरो प्रतिशत भी नहीं हैं, तो यह मान लिया जाएगा, कि ओडीएफ की तरह जिला भी भ्रष्टाचार से मुक्त हो गया। मंत्रीजी के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने ही विभाग के भ्रष्टाचार को समाप्त या कम करने की है। एक तरह से यह मंत्रीजी के लिए परीक्षा की घड़ी के समान होगा, अगर मंत्रीजी सिर्फ किसानों को निर्धारित दर पर खाद ही उपलब्ध करा पाए तो इनकी बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी। रही बात भूमि संरक्षण अधिकारी कार्यालय, जिला कृषि अधिकारी कार्यालय, मंडलीय मृदा परीक्षण कार्यालय, उप निदेशक कृषि कार्यालय एवं संयुक्त कृषि निदेशक कार्यालय से भ्रष्टाचार मिटाने की तो इसके लिए मंत्रीजी को कई जन्म लेना पड़ेगा।

जिस जिले में अधिकारियों की मेहरबानी से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सबसे अधिक नौकरी हासिल की गई हो, और जिसमें अमन प्रताप सिंह और शचि वर्मा नामक कर्मी को बर्खास्त किया गया हो, और जिस भूमि संरक्षण अधिकारी कार्यालय के करोड़ों की योजना कागजों में चलती हो, जिस मंडलीय मृदा परीक्षण कार्यालय में फर्जी मिटटी परीक्षण के नाम पर लूट मची हो, जिस जिला कृषि अधिकारी कार्यालय में अधिकारी से लेकर बाबू और चपरासी तक भ्रष्टाचार में लिप्त हो और जिस उप निदेशक कृषि कार्यालय में कृषि यंत्र के अनुदान का बंदरबांट हो, क्या उस कार्यालय से मंत्रीजी कमीशन लेना बंद करवा पाएगें? और सबसे बड़ा सवाल, क्या मंत्रीजी खाद की कालाबाजारी को रोक पाएगें? किसानों की माने तो मंत्रीजी उक्त कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार को रोक सकते हैं, बषर्ते सबसे पहले उन्हें अपनी ईमानदारी दिखानी होगी, और भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी, और यह तब होगा, जब बखरा लेना बंद होगा। मंत्रीजी को सबसे अधिक भूमि संरक्षण अधिकारी कार्यालय के उन योजनाओं की जांच करनी होगी, जो कागजों में चलती है, इस कार्यालय के योजनाओं की जानकारी न तो किसान और न मीडिया को हो पाती, इसकी जानकारी प्रषासन, विभाग के अधिकारी और निदेशालय को होती हैं, क्यों कि इन सभी का बखरा जो तय होता है? उन किसानों के मिटटी परीक्षण की जांच करनी होगी, जिनके नाम पर लूट मची हुई है। कहना गलत नहीं होगा, कि शाहीजी ऐसे विभाग के मंत्री है, जिनकी योजनाएं जिले में कागजों की शोभा बढ़ाती है। प्रभारी मंत्री बनने से पहले जिले के किसान इन पर अक्सर आरोप लगाते रहें हैं, कि इन्हीं के कारण ही विभाग में भ्रष्टाचार व्याप्त है, और किसानों को खाद तक नहीं मिल पा रहा है। कहते हैं, कि जो मंत्री किसानों को निर्धारित दर पर खाद न उपलब्ध करा सके, वह मंत्री बनने लायक नहीं, यही बात इनके जिले के एक पत्रकार ने भी मंत्रीजी से कहा था, कि क्या आप मंत्री बनने लायक हैं? इसका आडियो खूब वायरल हुआ था। जिस मंत्री के बारे में उनके ही जिले के पत्रकार अगर ऐसी राय रखते हैं, तो जाहिर सी बात है, कि पत्रकार ने यह राय यूंही नहीं रखी होगी। वैसे भी आज तक जितने भी जिले के प्रभारी मंत्री हुए है, उनका लाभ जनता को नहीं मिला, न भ्रष्टाचार कम हुआ और न विकास ही हुआ, एक भी प्रभारी मंत्री ने जिले के विकास के लिए एक भी उधोग नहीं लगवाया। अब तक इन लोगों की जो भी भूमिका रही है, वह मीटिगं और सेटिगं तक ही सीमित रहा। एक प्रभारी मंत्री तो त्यौहारी लेने के लिए बस्ती आने का कार्यक्रम बनाते थे। प्रभारी मंत्रियों के ब्रीफकेश कल्चर ने जिले को भ्रष्टाचार की आग में झांेक दिया।