बस्ती। प्यासे को ठंडा पानी पिलाने के नाम पर लूट मची हुई। पहले नगरपालिका ने वाटर एटीएम एवं वाटर कूलर के नाम पर करोड़ों की लूट की, और अब सदर ब्लॉक ने आरओ प्लांट के पानी के नाम पर लाखों रुपया की लूट की। सदर ब्लॉक का पानी देश का सबसे महंगा पानी होगा, इसके आरओ प्लांट के 100 ली. पानी की कीमत 25 लाख। अब आप लोग पूछेगें कि कैसे सदर ब्लॉक का पानी देश का सबसे मंहगा पानी हो गया। हुआ यह कि क्षेत्र पंचायत सदर ने केंद्रीय वित्त आयोग से मूड़घाट शमशान घाट पर लगभग 20 दिन पहले आरओ वाटर प्लांट लगाया, इसका उदघाटन ब्लॉक प्रमुख सदर राकेश श्रीवास्तव ने किया। इनके नाम का पत्थर भी लगाया गया। चूंकि पत्थर पर कार्यदाई क्षेत्र पंचायत सदर तो लिखा हुआ है, लेकिन इसकी लागत जानबूझकर नहीं लिखी गई, ताकि किसी को यह न पता चले कि आरओ प्लांट की लागत कितनी है। शमशान घाट पर आरओ का प्लांट लगवाकर प्रमुखजी ने जनहित का काम किया। लेकिन यह जनहित का प्लांट उस समय भ्रष्टाचार में बदल गया, जब प्लांट लगने के छठें दिन आरओ का ठंडा पानी मिलने को कौन कहें, सादा पानी भी लोगों को पीने को नहीं मिला। प्लांट बंद पड़ा है। वहां पर मौजूद लोगों ने बताया कि यह प्लांट लगभग 20 दिन पहले लगा था, पांच दिन तक इसका इस्तेमाल गांव और शमशान घाट पर आने वाले लोगों ने किया। बताया कि मुस्किल से 100 लीटर पानी भी पीने को मिला होगा। प्लांट अचानक क्यों काम करना बंद कर दिया, यह किसी को नहीं मालूम। बोरिगं भी किया गया, एक-एक हजार ली. के दो पानी की टंकी भी लगाई गई, पानी को ठंडा करने वाला मशीन भी लगा हुआ, दो टोटी भी लगे, लेकिन पानी ही नहीं दे रहा है। आसपास के लोगों ने इसे सरकारी धन की बर्बादी बताया। सबसे गंभीर बात जो तार जोड़े गए, उस पर टेप नहीं लगाया गया, तार को नंगा छोड़ दिया गया, जिससे कभी भी कोई भी और किसी के साथ में दुर्घटना हो सकती, क्यों कि तार में करेंट आ रहा है। बिजली का कनेक्षन बंद नहीं है। जो कोई भी षमषान घाट पर आता, वह आरओ प्लांट को देखकर बहुत खुष होता। देखा जाए तो इस स्थान पर आरओ का पानी जरुरी था। अब आप लोग समझ गए होगें कि सरकारी धन कैसे और किस नाम पर लूटा जाता हैं। पहले चेयरमैन अषोक गुप्त के कार्यकाल में वाटर कूलर के नाम पर घोटाला हुआ, उसके बाद रुपम मिश्रा के कार्यकाल में वाटर एटीएम के नाम पर बड़ा घोटाला हुआ। जानकार हैरानी होगी, दोनों के कार्यकाल में इतने वाटर कूलर और इतने एटीम लग गए, कि आज उसका ढ़ांचा भी देखने को नहीं मिलता। रुपम मिश्रा को अच्छी तरह मालूम था, कि जब पहले वाला वाटर कूलर सफल नहीं हुआ तो एटीएम वाटर कैसे सफल होगा? फिर भी कमीशन के लिए एटीएम वाटर पर पैसा खर्च कर दिया। जिन-जिन अध्यक्षों के कार्यकाल में पानी के नाम पर घोटाला हुआ, उन लोगों ने अंजाने में नहीं बल्कि जानबूझकर किया। इन्हीं दोनों अध्यक्षों के पद चिन्हृों पर सदर ब्लॉक के प्रमुख राकेश श्रीवास्तव भी चल पड़े।
- Loading weather...
- |
- Last Update 25 Jun, 12:44 AM
- |
- |
- खबरें हटके
- |
- ताज़ा खबर
- |
- क्राइम
- |
- वायरल विडिओ
- |
- वीडियो
- |
- + More
0 Comment