‘पंेशनर’ ही ‘पेंशनर’ का ‘शोषण’ कर ‘रहा’

बस्ती। जितने भी पेंशनर्स होगें उन लोगों को जानकर हैरानी होगी, एक पेंषनर दूसरे पेंशनर का शोषण कर रहा है। रमेश शुक्ल नामक पेंषनर बाकायदा कार्यालय में और अधिकारियों की मौजूदगी में खुले आम हजार दो हजार नहीं बल्कि पेंशन स्वीकृति के नाम पर 20 से 30 हजार लेता है। यह व्यक्ति अपर निदेशक कोषागार एवं पेंशन कार्यालय बस्ती मंडल से रिटायर हुआ, और उसी कार्यालय में बैठकर पूर्व की भांति पेंशनर्स का किसी न किसी बहाने शोषण कर रहा, अधिकारियों से कहा तो सुनकर रह जाते है। इसकी शिकायत शिक्षक संघ के मंत्री बालकृष्ण ओझा ने सीएम, कमिश्नर, डीएम और सीडीओ से करते हुए कार्रवाई करने की मांग की है। कहा कि बस्ती में घोर अनियमितता व्याप्त है। यहां पर सेवानिवृत हो चुके रमेश शुक्ल नाम के व्यक्ति द्वारा कार्यालय में बैठकर सेवानिवृत शिक्षकों व अन्य कार्मिकों से धन वसूली का कार्य करते हैं। यह व्यक्ति दो वर्ष पूर्व ही सेवानिवृत हो चुके है। परंतु उसके बावजूद विभाग के उच्च अधिकारियों की मिली भगत से प्रतिदिन कार्यालय आते है और संपूर्ण समय तक कार्यालय के पटल सहायकों के मध्य बैठकर पेंशन की पत्रावलियों पर आपत्ति व कागज कमी के नाम पर सेवा निवृत्त शिक्षको व अन्य विभाग के कर्मचारियों का शोषण करते है। कागज पूर्ण न होने पर व आपत्ति लगाकर पेंशन पत्रावली लटकाए रखते है। और उनसे 20000 से 30000 धन लेते ही पेंशन स्वीकृत करवा देते है। विभाग में लगे सीसीटीवी कैमरे वह अन्य कर्मचारियों से इसकी जानकारी कभी भी ली जा सकती है। पत्र में संबंधित सेवा निवृत्त कर्मी के विरुद्ध विधिक कार्रवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई करने का कष्ट करें जिनके संरक्षण में यह कार्य विगत कई वर्षों से चल रहा है। जिससे सेवा निवृत्त शिक्षकांे व अन्य कर्मचारियों को बुढ़ापे में धनादोहन से छुटकारा मिल सके।