हापुड़ में शब-ए-बारात की रूहानी फ़ज़ाओं से पहले हापुड़ जनपद के कोटला सादात फुलगढ़ी क्षेत्र में स्थित मदरसा फैज़ुल कुरान में वार्षिक जलसे का आयोजन पूरी अकीदत, अनुशासन और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर कुरान की तालीम, दीनी समझ और नैतिक मूल्यों को समाज तक पहुँचाने का सशक्त संदेश दिया गया।जलसे में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ आसपास के जनपदों से आए उलेमा-ए-किराम, शिक्षाविदों और गणमान्य लोगों ने शिरकत की। आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को कुरान से जोड़ना, इल्म-ए-दीन के महत्व को रेखांकित करना और मदरसे के छात्रों की शैक्षणिक उपलब्धियों को सार्वजनिक मंच पर सम्मान देना रहा।कार्यक्रम का संचालन मुफ्ती मौलाना मोहम्मद मुआज़ क़ासमी साहब ने सधे हुए और प्रभावी अंदाज़ में किया। मदरसा फैज़ुल कुरान के छात्रों द्वारा पेश की गई नात, नज़्म और कुरानी आयतों की तिलावत ने पूरे माहौल को रूहानियत से सराबोर कर दिया।मुख्य वक्ता के रूप में खिवाई मेरठ से तशरीफ लाए मुफ्ती उस्मान साहब, मोहतमिम मदरसा खैरुल मदारिस, ने अपने संबोधन में कहा कि कुरान केवल इबादत की किताब नहीं, बल्कि इंसानी ज़िंदगी के हर पहलू का मार्गदर्शन करने वाला संपूर्ण विधान है। उन्होंने शिक्षा के साथ संस्कार और चरित्र निर्माण पर विशेष बल दिया।जलसे के दौरान कुरान मुकम्मल करने वाले छात्रों की दस्तारबंदी की गई। मोहम्मद कैफ, रेहान, उमर, फरहान, शाहिद और मेहताब सहित छह हाफिज़ छात्रों को दस्तार पहनाकर सम्मानित किया गया तथा उन्हें पुरस्कार प्रदान किए गए। उपस्थित अभिभावकों ने इसे अपने लिए गर्व का क्षण बताया।कार्यक्रम में कारी जियाउर्रहमान साहब, मदरसा फैज़ुल कुरान के मोहतमिम हाजी अतिकुर्रहमान साहब, डॉ. इमरान साहब, हाजी नन्नू, फुरकान, नसरुद्दीन और ईदा सहित मदरसे से जुड़े तमाम जिम्मेदारान मौजूद रहे।समापन सत्र में मौलाना अजीजुर्रहमान साहब ने सभी अतिथियों, उलेमा-ए-किराम, अभिभावकों और क्षेत्रवासियों के प्रति आभार व्यक्त किया। अंत में मुफ्ती उस्मान साहब की दुआ के साथ जलसे का समापन किया गया।
यह आयोजन न केवल मदरसा फैज़ुल कुरान के छात्रों के लिए प्रेरणास्रोत सिद्ध हुआ, बल्कि पूरे क्षेत्र में इल्म, अमन और सामाजिक सौहार्द का संदेश भी छोड़ गया।