बस्ती। जिस तरह भाजपा के लोगों ने गांजा और स्मैक के क्षेत्र में विशेषज्ञ माने जाने वाले और बाहरी लोगों को सभासद मनोनीत कराया, वह नगर पंचायत हर्रैया के इतिहास में काले अक्षरों में लिखा जाएगा। यह भी लिखा जाएगा कि किस तरह बहुरुपिया मनोनीत सभासद रवि गुप्त को बेआरु होकर शपथ ग्रहण सामारोह से निकलना पड़ा। इन्हें इस लिए शपथ नहीं दिलाया गया, क्यों कि यह बहुरुपिया है, और इनका नाम दो वोटर लिस्ट में अलग-अलग है। भाजपा के लिए नगर पंचायत हर्रैया एक प्रयोगशाला बनकर रह गया है। इसी प्रयोगशाला से मनोनीत सभासद गांजा/स्मैक तस्कर दीपक चौहान, रवि गुप्त और गीता वर्मा निकली है। दीपक चौहान और रवि गुप्त के बारे में कौन नहीं जानता कि यह किस क्षेत्र के विशेषज्ञ है। रही बात तीसरे मनोनीत सभासद गीता वर्मा की तो इनका भी मनोनयन गलत हुआ, क्यों कि यह नगर पंचायत हर्रैया क्षेत्र की निवासी ही नहीं है। यह हर्रैया में एक डेढ़ साल से मकान बनवाकर अपने टीचर पति के साथ रहती है। इनका मूल निवास थाना परसरामपुर के ग्राम सिंकदरपुर है। इस तरह देखा जाए तो तीनों मनोनीत सभासद का मनोनयन संदेह के घेरे में हैं। भाजपा के लोगों ने यह साबित कर दिया कि सभासद मनोनीत होने के लिए कोई जरुरी नहीं कि आप भाजपा के खाटी कार्यकर्त्ता हो, या फिर सालों तक पार्टी के लिए दरी बिछाते आ रहे हैं, अगर आप के पास पैसा है, और आप भले ही क्यों न गांजा और स्मैक तस्करों के सरगना हैं, नो प्राब्लम, आइए मिलिए, फंडिगं करिए, और शान के साथ जाइए बोर्ड की बैठक में भाग लीजिए और लोगों को बताइए कि गांजा और स्मैक के कारोबार में कितना लाभ है। जबकि उन्हीं सभासदों को मनोनीत करने का प्राविधान हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ होतें हैं, ताकि उसका लाभ नगर पंचायत/पालिका को अनुभव के रुप में मिल सके। सोचकर देखिए कि गांजा और स्मैक तस्करों से नगर पंचायत हर्रैया को क्या लाभ होगा? क्या यह लोग नशे के बारे में बताएगें कि किस तरह और किसका नशा करने से मजा आता है, या घर बर्बाद होता हैं? या फिर गांजा और स्मैक की तस्करी करने से कितना और क्या-क्या लाभ होता? जो इस क्षेत्र की महिला ही नहीं और जिसके पास कोई विशेषता नहीं, वह क्या अपना अनुभव साझा करेगी। एक बहुरुपिया मनोनीत सभासद से आखिर नगर पंचायत हर्रैया को क्या लाभ हो सकता है? इनसे लाभ यही हो सकता है, कि किस तरह बहुरुपिया बनकर फ्राड किया जा सकता। हर्रैया के मामले में पूरी तरह जिलाध्यक्ष और इनके आका के साथ हुड़वा कुंवर के बाबू साहब को जिम्मेदार माना जा रहा है। कहना गलत नहीं होगा, कि इन लोगों ने मिलकर नगर पंचायत हर्रैया के बोर्ड को मजाक बनाकर रख दिया है। यह मजाक 2027 में कितना भारी पड़ सकता है, इसका अंदाजा षायद मनोनीत करने में अहम भूमिका निभाने वाले को भी नहीं होगा। मनोनीत सभासदों को लेकर भाजपा की फिर से जग हंसाई हो रही है। इसकी जितनी भी निंदा की जाए कम होगी। फंडिगं का लाभ लेने वालों ने एक ऐसे व्यक्ति को सभासद मनोनीत करवाने में सहयोग किया, जो पार्टी का विरोधी रहा, और जिसके चलते पार्टी का प्रत्याशी हार गया, अगर इन लोगों को वाकई पार्टी के प्रति वफादारी दिखानी थी, तो हारे हुए और कर्मठी कार्यकर्त्ता धमेंद्र कुमार को मनोनीत कराते, तब पार्टी और कार्यकर्त्ता के प्रति इन लोगों की ईमानदारी दिखाई देती, लेकिन यहां पर तो किसी ने भी कार्यकर्त्ता के प्रति ईमानदारी ही नहीं दिखाया, बल्कि ऐसे के प्रति ईमानदारी दिखाया, जिसका नाम गांजा और स्मैक के कारोबार से जुड़ा हो।
- Loading weather...
- |
- Last Update 11 Aug, 04:35 PM
- |
- |
- खबरें हटके
- |
- ताज़ा खबर
- |
- क्राइम
- |
- वायरल विडिओ
- |
- वीडियो
- |
- + More
0 Comment