बस्ती। गांजा और स्मैक का कारोबार करने वालों का दावा है, कि कांवड़ यात्रा के दौरान लगभग पांच करोड़ का अवैध कारोबार होता हैं, कहते हैं, कि इस कारोबार से जुड़े लोग जिस तरह सरकार इंतजाम की तैयारी पहले से करती है, ठीक उसी तरह गांजा और स्मैक तस्कर तैयारी करते हैं, एक सप्ताह पहले ही स्टाक करना शुरु कर देते है। यह भी कहते हेैं, कि इन सबकी जानकारी स्थानीय पुलिस को रहती है। क्यों कि पुलिस को मिलाए बिना कारोबार संभव नहीं है। कहते हैं, कि कावंड यात्रा में आने वाले 60-70 फीसद लोगों को गांजा और स्मैक चाहिए। कहने का मतलब एक तरह से यह लोग कांवड़ यात्रा के बहाने नशा करते है। इसी का फायदा गांजा और तस्कर खूब उठाते है। यहां तक कि प्रतिबंधित दवाओं का भी कारोबार होता है। चूंकि कावंड़ यात्रा के दौरान इन्हें रोकने टोकने वाला कोई नहीं रहता इस लिए यह लोग गांजें का खूब सेवन करते हैं, घर में यह लोग कर नहीं सकतें, कहते हैं, कि अनेक ऐसे लोग होते हैं, जो गांजा और अन्य नषा करने के लिए ही कावंड़ यात्रा करते है। अगर ऐसा नहीं होता तो कांवड़ यात्रा के दौरान तीन-तीन स्थानों से बड़ी मात्रा में गांजा बरामद न होता। यही वह अवैध कमाई हैं, जिसके जरिए कोई सभासद मनोनीत होता तो कोई चुनाव लड़ता तो कोई मंहगी गाड़ी खरीदता। कहते हैं, कि कांवड़ यात्रा के दौरान सबसे अधिक गांजा छावनी, हर्रैया, कप्तानगंज, कलवारी और नगर थाना क्षेत्रों में बिक्री होती है। हर्रैया पुलिस ने भिटियहवा मोड़ के पास बेलाड़े मोड़ के पास बड़हर कला निवासी दिलषाद और तरना निवासी मुस्तफा दो लोगों को 3.300 किलो गांजा के साथ और कप्तानगंज के नरायनपुर तिवारी मोड़ के पास फरेंदा सेंगर बगीचे के निकट सर्रैया मिश्र निवासी मनोज तिवारी को कांवड़यिों को गांजा बेचजे हुए 3.900 किलो कार से बरामद किया। एसपी साहब ने खुद स्वीकार किया है, कि इस अवैध कारोबार में एक नेक्सेस काम कर रहा है, जिसमें बड़े-बड़े लोग षामिल है। पुलिस इस नेक्सेस को तोड़ने का प्रयास कर रही है। बार-बार सवाल उठ रहा है, कि आखिर कांवड़ यात्रा क्यों नषे का कारोबार का जरिया बनता जा रहा है? इसके लिए कौन जिम्मेदार? सरकार का सारा ध्यान कावंड़ियों को सुख सुविधा देने पर लगा रहता हैं, यह भी सवाल उठ रहा है, आखिर सरकार क्यों ऐसे कांवड़ यात्रा को बढ़ावा दे रही है, जिसमें अधिकांश लोग सिर्फ नशे में डूबें रहते है। यह लोग भाजपा के वोटर भी नहीं हो सकते, तो फिर क्यों ऐसे यात्रा पर पुष्प वर्षा की जाती है? जिस यात्रा में करोड़ों रुपये के गांजे का कारोबार होता है। यही वह लोग होते हैं, जो नषे में धुत्त होकर कानून को अपने हाथ में लेते है। सरकार उन आम आदमियों और कारोबारियों का ध्यान नहीं रखती, जिसके चलते चार-पांच दिन तक कारोबार ठप्प रहता, आम आदमी अपने चार पहिया वाहन से कहीं आ जा नहीं सकता। पता नहीं कितने बीमार अपना ईलाज कराने के लिए लखनउ नहीं जा पाते। एक अन्य गांजा का कारोबार करने वालों ने बताया कि कावंड़ यात्रा उन लोगों के लिए करोड़पति बनने का अवसर देता है, जो गांजा और स्मैक का कारोबार करते है।