बस्ती। भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों पर निरंतर प्रहार करने वाले भाकियू भानु गुट के मंडल प्रवक्ता चंद्रेश प्रताप सिंह ने राज्य निर्वाचन आयुक्त’  प्रमुख सचिव’  पंचायती राज विभाग एवं डीएम को लिखे पत्र में कहा है, कि जिला पंचायत अध्यक्ष और प्रमुखों के कार्यकाल को बढ़ाने और इन्हें प्रशासक बनाने का का मतलब लोकतंत्र की हत्या करने जैसा होगा। कहा कि अगर इस तरह का कोई प्रस्ताव लंबित हैं, तो उसपर विचार न किया जाए। क्यों कि इस तरह की कार्रवाई पूर्णतः असंवैधानिक एवं अवैध है। ’संविधान अनुच्छेद 243’ के अनुसार पंचायत का कार्यकाल अधिकतम पांच वर्ष ही है। इससे अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता। ’उ.प्र. पंचायत राज अधिनियम 1947 की धारा 5, 12 व 12।’ के अनुसार प्रधान का कार्यकाल पांच वर्ष है। कार्यकाल समाप्ति पर प्रशासक नियुक्त होगा, वही प्रधान प्रशासक नहीं बन सकता। ’उ.प्र. क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम 1961 की धारा 12, 15 व 28’ के अनुसार अध्यक्ष/प्रमुख का कार्यकाल भी पांच वर्ष है। इसे बढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं है। ’शासनादेश संख्या 2470ध्33-1-2016 दिनांक 25 अगस्त 08’ में स्पष्ट है कि पांच वर्ष बाद निर्वाचित पदाधिकारी का पद स्वतः समाप्त हो जाएगा। ’माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट’ ने भी रिट 54321/2015 में कहा है कि पांच साल बाद पद रिक्त हो जाता है, एक्सटेंशन नहीं दिया जा सकता। इससे लोकतंत्र की हत्या हो रही है और संविधान का उल्लंघन हो रहा है। जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों के स्थान पर एक ही व्यक्ति को प्रशासक बनाकर रखना निष्पक्ष चुनाव की प्रक्रिया को भी प्रभावित करेगा। पूरे प्रदेश में 5 वर्ष पूर्ण कर चुके प्रधानों को प्रशासक न बनाये जाने का आदेश तत्काल निर्गत किया जाए। जिला पंचायत अध्यक्ष व ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल बढ़ाने की किसी भी कवायद को रोका जाए। 6 महीने के अंदर निष्पक्ष चुनाव कराने हेतु राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देशित किया जाए। सवाल यह उठ रहा है, कि आखिर क्यों कार्यकाल बढ़ाए जाने और जिला पंचायत अध्यक्ष एवं प्रमुखों को प्रशासक बनाए जाने की मांग इन दोनों की ओर से उठ रहा है। सीधा सा सवाल है, कि आपका कार्यकाल समाप्त हो गया, जाइए, और चुनाव की तैयारी करिए। कार्यकाल बढ़ाने और प्रशासक बनाए जाने की मांग करने के पीछे जो भ्रष्टाचार नहीं हो सकता था, उसे पूरा करना। न जाने क्यों योगीजी और ओमप्रकाश राजभरजी को यह समझ में नहीं आता कि कार्यकाल बढ़ाए जाने और प्रशासक नियुक्ति करने से भ्रष्टाचार बढ़ेगा। अगर आप दोनों की इच्छा भ्रष्टाचार फैलाने की तो उसी तरह मांग पूरा कर दीजिए, जिस तरह आप दोनों ने प्रधानों को प्रशासक बनाकर किया, आप दोनों को हाईकोर्ट में जबाव देते नहीं बन रहा है। कहने का मतलब सरकार खुद भ्रष्टाचार बढ़ाना चाहती है। जिस सरकार और मंत्री को भ्रष्टाचार रोकने की जिम्मेदारी हैं, वही लोग भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे है।