बस्ती। सवाल यह है, कि अगर किसी समिति के सचिव का मौसा योगीजी के साथ रहता है, तो क्या वह मनमानी दर पर खाद बेचेगा? सचिव का यह कहना, कि जितने दाम में खाद दे रहा हूं, ले लो वरना यह भी नहीं मिलेगा, जहां भी चाहो मेरी शिकायत करो, कुछ नहीं उखाड़ पाओगें। यह कहना है, कुदरहा पिपरपाती एवं गायघाट समिति के सचिव राजकुमार पाल का। इसकी षिकायत किसान उमेष गोस्वामी ने पहले कृषि मंत्री से लखनउ में मिलकर और उसके बाद मुख्यमंत्री के पोर्टल पर किया। हालांकि कृषि मंत्री के निर्देष पर निछले दो दिन से लोग किसान के पास इस लिए जा रहे हैं, ताकि उसे खाद दिलाया जा सके, लेकिन किसान ने खाद लेने से इंकार करते हुए कहा कि पहले जाओ समिति को ओवररेटिगं के आरोप में सील करो, उसके बाद खाद लूंगा। एक समय यही किसान सचिव और जिला कृषि अधिकारी से एक बोरी खाद के लिए मिन्नते कर रहा था, और अब लोग इसके गांव खाद लेकर जा रहे हैं, फिर भी यह खाद नहीं ले रहा है। जिला कृषि अधिकारी को लिखे पत्र में कहा कि साधन सहकारी समिति कुदरहा, पिपरपाती एवं गायघाट के सचिव राजकुमार पाल के द्वारा 266 का यूरिया 300 और 2350 का डीएपी 1400 सौ ओवर रेटिगं में दे रहें है। कहा कि सचिव की समिति को सील किया जाए। क्यों कि क्षेत्र के किसानों को समिति पर यूरिया मिलने में काफी कठिनाई हो रही है। कहा कि किसान मजबूर होकर प्राइवेट दुकानों से यूरिया 500 और डीएपी 1800 में खरीदना पड़ रहा है। लिखा कि सचिव आनलाइन पैसा नहीं लेते, सारा पैसा कैष में लेते है, ताकि ओवररेटिगं पकड़ में न आ सके। लिखते हैं, कि सचिव खुले आम किसानों से कहते हैं, मेरे मौसा योगीजी के साथ रहते हैं, इस लिए मेरा कुछ भी नहीं होगा।
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