आज’ से ‘संजय चौधरी’ हो गए ‘निवर्तमान’ अध्यक्ष

बस्ती। मुख्यमंत्री योगी और पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर को डीएम पर नहीं बल्कि जिले को लूटने वाले भ्रष्ट जिला पंचायतों पर अधिक भरोसा है। अब तक के इतिहास मे पहली बार जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रषासक बनाया गया, वरना अभी तक डीएम ही प्रशासक होते रहे। बताते हैं, कि इसके लिए अध्यक्षों ने मंत्री से बहुत बड़ी डील की है। डील की धनराषि 25 करोड़ से अधिक बताई जा रही है, अगर डील न होती तो मंत्री ओमप्रकाश राजभर, योगीजी को प्रशासक बनाने का प्रस्ताव न देते। यह जानते हुए प्रस्ताव दिया, कि यह नियम विरुद्व हैं, और लोकतंत्र का गला घोटने वाला प्रस्ताव हैं, लेकिन मंत्रीजी को चुनाव के लिए पैसा चाहिए था, इस लिए उन्होंने लोकतंत्र का गला घोंट दिया। डील करके एक तरह से मंत्री ने अध्यक्षों को लूटने का मौका दे दिया, रही बात पांच साल तक जिला पंचायत में लूटखसोट करने वाले संजय चौधरी की तो यह 12 जुलाई 26 से निवर्तमान अध्यक्ष कहलाएगें। भले ही सरकार ने इन्हें प्रशासन नियुक्ति कर दिया, लेकिन यह कोई नीतिगत फैसला नहीं ले सकते, बैठक नहीं कर सकते कोई कार्ययोजना नहीं बना सकते, न कोई भुगतान कर सकते हैं, और न कोई टेंडर ही निकाल सकते है। यानि जो काम यह बोर्ड की बैठक के जरिए करते थे, अब वही काम डीएम करेगें, कोई भी कार्ययोजना या टेंडर डीएम के जरिए शासन को जाएगी, और वहां से मंजूरी मिलने के बाद काम होगा। अध्यक्षों को जो छह माह के लिए प्रशासक बनाया गया, उसी बीच 50 करोड़ का बजट आएगा, लेकिन इस बजट का उपयोग/दुरुपयोग अब अध्यक्ष नहीं कर पाएगें, बल्कि डीएम करेगें। अध्यक्ष दैनिक कार्य ही कर सकते। अध्यक्षों और मंत्री ने प्रदेश को जो लूटने की साजिश रची है, उसका खामियाजा 20 में भाजपा को ही सबसे अधिक भुगतना पड़ेगा, मंत्री को तो पैसा चाहिए, जो उसे मिल गया, अब प्रदेश चाहें लुटे या फिर बर्बाद हो, मंत्री के सेहत पर क्या फर्क पड़ता, जो मंत्री कैमरे के सामने यह कहे हैं, कि उसके बड़ा कोई गुंडा और भ्रष्टाचारी नहीं है, तो समझ सकते हैं, कि प्रदेश का क्या होने वाला है। यही वह मंत्री है, जो अध्यक्षों और प्रमुखों का सीधा चुनाव कराने की पैरवी लखनउ से लेकर दिल्ली तक कर रहे थे, लेकिन जब इन्हें पैसा मिल गया तो पैरवी करना बंद कर दिया, और जब अब अधिक पैसा मिल गया तो अध्यक्षों को प्रशासक बनाने का प्रस्ताव दे दिया, जिसे योगीजी ने आंख बंदकर स्वीकार भी कर लिया, इसके लिए मंत्री के साथ योगीजी को भी प्रदेश की जनता जिम्मेदार मान रही है। यह पहली ऐसी सरकार होगी, जो यह जानते हुए प्रशासक बनाने से प्रदेश लुट जाएगा, फिर भी प्रशासक बना दिया। अब आप समझ सकते हैं, कि प्रदेश की किसी कोई चिंता नहीं है। सब लूटने में लगे हुए है।