बस्ती। अगर हाजी के मदरसे के प्रधानाचार्य यह लिखकर दे देते की पोता बालिग है, तो हाजी मुनीर अली के पोते आसिफ पुत्र अहमद को जमानत मिल जाती, क्यों कि मेडिकल रिपोर्ट में बलात्कार की शिकार लड़की को बालिग होना बताया गया। इस मामले में हाजी साहब का पैसा भी काम न आया। हाजी साहब अब जमानत के लिए हाईकोर्ट की ओर गए हैं, अगर वहां से भी जमानत खारिज हो गया, जिसकी संभावना अधिक तो हाजी के पोते को जेल जाना ही पड़ेगा, हालांकि कप्तानगंज थाने की पुलिस ने हाजी साहब के पोते की बहुत मदद की, लेकिन वह भी काम न आया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार ने जमानत निरस्त करते हुए कहा कि जमानत स्वीकार करने का पर्याप्त आधार नहीं है। चूंकि यह मामला अभियुक्त के द्वारा लड़की के घर में घुस कर उसके साथ बलात्कार किया गया, इस लिए इसे गंभीर प्रवृत्ति का अपराध माना जाता है। लड़की की जन्म तिथि पांच अगस्त 2008 हैं, और घटना 28 अप्रैल 2026 को हुई, उस हिसाब से लड़की की उम्र 17 साल आठ माह 23 दिन हुआ।