मृत व्यक्तियों के नाम पर मनरेगा भुगतानः चेतावनी के बावजूद भ्रष्टाचार जारी, जांच पर सवाल

राजेश शुक्ल बनकटी / बस्ती

मनरेगा योजना में मृत व्यक्तियों के नाम पर हाजिरी दर्ज कर भुगतान निकालने का मामला सामने आया है। इस अनियमितता के बाद डीसी मनरेगा ने खंड विकास अधिकारी को चेतावनी नोटिस जारी किया है। यह घटना लगातार जांच, ऑडिट और निगरानी के दावों के बावजूद मनरेगा में भ्रष्टाचार के जारी रहने पर सवाल खड़े करती है।

सूत्रों के अनुसार, मनरेगा में प्रतिवर्ष सोशल, तकनीकी और वित्तीय ऑडिट का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त, विजिलेंस जांच, एमआईएस मॉनिटरिंग और आधार-आधारित भुगतान प्रणाली जैसी व्यवस्थाएं भी लागू हैं। इसके बावजूद मृत श्रमिकों के नाम पर भुगतान होना यह संकेत देता है कि या तो ऑडिट प्रक्रियाएं केवल कागजों तक सीमित हैं, या फिर जांच रिपोर्टों पर अपेक्षित गंभीरता से कार्रवाई नहीं की जा रही।
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक ऑडिट रिपोर्टों के आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों, पंचायत सचिवों, तकनीकी सहायकों और रोजगार सेवकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक भ्रष्टाचार का यह सिलसिला तोड़ना मुश्किल है। अक्सर जांच रिपोर्ट लंबित रह जाती हैं, वसूली के आदेश कागजों में ही दबे रहते हैं, और दोषी कर्मचारी अपने पदों पर बने रहते हैं, जिससे भ्रष्टाचार को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा मिलता है।

नोटिस जारी होने के बाद, अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि खंड विकास अधिकारी द्वारा जिला प्रशासन को सौंपी जाने वाली रिपोर्ट में केवल स्पष्टीकरण दिया जाता है, या अन्य ग्राम पंचायतों में मनरेगा कार्यों के स्वतंत्र ऑडिट और विजिलेंस जांच की सिफारिश भी की जाती है। यदि इस मामले को एक उदाहरण के रूप में लेते हुए व्यापक विजिलेंस ऑडिट, एफआईआर और धन की वसूली की कार्रवाई नहीं की जाती है, तो यह प्रकरण भी पिछली घटनाओं की तरह केवल चेतावनी और फाइलों तक ही सीमित रह जाएगा।

यह पूरा प्रकरण एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि जब निगरानी तंत्र, ऑडिट प्रक्रियाएं और स्पष्ट नियम मौजूद हैं, तो मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना में भ्रष्टाचार आखिर किसके संरक्षण में पनप रहा है।