‘डा. प्रमोद चौधरी’ का मामला मानवधिकार ‘पहुंचा’
-शासन-प्रशासन और सीएमओ से निराष पीड़ित रफीउदीन ने एफआईआर और नोटिस सहित 27 पेज के अभिलेखों के साथ न्याय की लगाई गुहार
बस्ती। रेडक्रास सोसायटी के चेयरमैन और मेडीवर्ल्ड हास्पिटल के संचालक डा. प्रमोद कुमार चौधरी के मामले में भले ही टीम के एक-दो सदस्यों पर कार्रवाई कराने के मामले में शिथिलता बरतने का आरोप लग रहा हैं, लेकिन पीड़ित रफीउदीन ने मामले को मानवाधिकार आयोग में ले जाकर चर्चा को विराम देते हुए कहा कि भले ही कोई मेरा साथ दे या न दे लेकिन मामले को अंजाम तक ले जाकर ही दम लूंगा। प्रशासन, सीएमओ और पुलिस विभाग पर आरोप लगाते हुए कहा कि जिस तरह दोशी डा. प्रमोद चौधरी को बचाने का खेल खेल रहे हैं, उसमें वह सफल नहीं होगें। आज नहीं तो कल कार्रवाई तो होनी ही है। कहा कि डा. प्रमोद चौधरी ने उनकी डिग्री लगाकर मेरे और विभाग सहित पूरे समाज के साथ फ्राड किया है, और इस फ्राड में सीएमओ और नोडल डा. एसबी सिंह पूरी तरह शामिल है। यह लोग मरीजों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, जिस अस्पताल को सील और नोडल की ओर से एफआईआर दर्ज होना चाहिए, उसे खुला छोड़ दिया गया। कहते हैं, कि डा. प्रमोद चौधरी ने पैसे से सबको खरीद लिया, माननीयगण भी ऐसे डाक्टर का साथ दे रहे हैं, जो सबका दुष्मन हो। सवाल करते हैं, कि जब सीएमओ ने पंजीकरण निरस्त कर दिया तो क्यों नहीं अस्पताल को सील और एफआईआर दर्ज किया? जब कि उन्होंने अपने पत्र में विधिक कार्रवाई करने को लिखा भी है। अन्याय के खिलाफ जिस तरह टीम ने अपनी मजबूती दिखाई, वह अब नहीं दिखाई दे रही है, ऐसा टीम के कई सदस्यों का मानना और कहना है। डीएम से मिलने के बाद टीम का सक्रिय न होना चर्चा का विषय बना हुआ। टीम के सदस्यों को यह नहीं भूलना चाहिए, इस लड़ाई में कई लोगों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है। कहा भी जा रहा है, कि अगर टीम किसी कारण विखर गई तो कई लोगों की इज्जत चली जाएगी। जिस तरह टीम ने अपनी मजबूती और एकता दिखाई, उसे आगे भी दिखाने की आवष्यकता है। इसी में सबका मान और सम्मान छिपा। क्यों कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति के लाभ और हानि से नहीं जुड़ा, बल्कि कईयों का मान और सम्मान जुड़ा है। टीम ही नहीं पूरा जिला चाहता है, कि रेडक्रास सोसायटी की नई कार्यकारिणी का गठन हो और हास्पिटल का संचालन पूरी तरह बंद हो।
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