छरदही में भ्रष्टाचार का जिन्न निकलना थम नहीं रहा
बस्ती। विकासखंड कुदरहा के ग्राम पंचायत छरदही में भ्रष्टाचार का जिन्ना निकलना बंद नहीं हो रहा है। जब से यहां के नकली प्रधान ने सपा का हाथ छोड़कर भाजपा का हाथ थामा तब से नकली प्रधान की चंादी हो गई। जब यह सपा में थे इन्हें जीताने वालों के सामने कसम खाया था, कि पांच साल में एक रुपये का काम नहीं करुगां, लेकिन भ्रष्टाचार नहीं करुंगा। कसम खाए अभी कुछ ही दिन नहीं बीता था, इन्होंने गांव वालों को धोखा देकर भाजपा का दामन थाम लिया, यह दामन इन्होंने गांव वालों की सेवा नहीं बल्कि मेवा खाने के लिए थामा, रमेष चंद्र चौधरी नामक नकली प्रधान से सांसद राम प्रसाद चौधरी को भी धोखा दिया, गांव वाले कहते हैं, कि पूरे ब्लॉक में इससे बड़ा धोखेबाज और कोई नहीं होगा, कहते हैं, कि जो भी व्यक्ति चंद पैसों के लिए गांव वालों को धोखा दे सकता हैं, वह कुछ भी कर सकता है। कहते हैं, कि आज की तारीख में छरदही के नकली प्रधान की तरह कोई भी भ्रष्ट नकली प्रधान नहीं होगा। जो व्यक्ति सरकारी जमीन पर मकान बनवाया हो, वह समाज और सरकार भी दुष्मन है। जब इसकी षिकायत हुई और लाखों के फर्जी भुगतान का जांच टीम ने खुलासा हुआ। इसे लेकर मीडिया ने भी उछाला। लेकिन खंड विकास अधिकारी आलोक कुमार पंकज, तकनीकी सहायक सुरेंद्र कुमार सिंह एवं सचिव गोरखनाथ यादव ने मिलकर कोई कार्रवाई नहीं किया, बल्कि एडीआई आईएसबी ने भ्रमित जानकारी तक दे दी।
जो फर्जी भुगतान हुआ उसमें मंटू दुबे के खेत के बगल से मदन मोहन के खेत तक, मदन मोहन के खेत से गंगाराम दुबे के खेत तक चक मार्ग पटाई के एक कार्य के सापेक्ष चार मस्टर रोल पर 38 मजदूरों की लगी फर्जी हाजिरी लगाई गई। बताया कि ग्राम पंचायत छरदही के नकली प्रधान रमेश चौधरी एवं तकनीकी सहायक सुरेंद्र कुमार सिंह की मिली भगत से एक साइड पर चल रहा फर्जी मनरेगा मास्टर रोल पहली साइड मदन मोहन के खेत से गंगाराम दुबे के खेत तक चक मार्ग पटाई का कार्य केवल कागज में चलाया गया।बिना मजदूर के प्रतिदिन फर्जी हाजिरी लगाकर सरकारी धन का बंदरबांट कर रहें है। अप्रैल 2024 से अब तक कई फर्जी साइड चलकर अवैध धन निकासी करके सरकारी धन पर डाका डाल चुके है। थक हार कर प्रार्थी ने तहसील दिवस में शिकायत करके अपने ग्राम पंचायत में गुणवत्तापूर्ण कार्य की मांग रखते हुए शिकायती पत्र प्रस्तुत किया केंद्र विकासखंड के ही अधिकारियों कर्मचारियों की मिली भगत से जांच करने की बजाय शिकायतकर्ता पर ही दोशारोपण करके सत्य को छिपाने का प्रयास किये। कुछ दिन पहले विकासखंड बहादुरपुर में ग्राम प्रधानों द्वारा लामबंद होकर खंड विकास अधिकारी पर बखरा लेने का आरोप लगाया गया वास्तव में लगता है, वही कमीशन का जिन्न। ऐसा लगता हैं, कि मानों ब्लॉक वाले चाहते ही नहीं कि भ्रष्टाचार पर लगाम लगे या फिर भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई हो। इसी को शायद रामराज कहते है। हालांकि यही स्थित कमोवेश जिले के सभी ब्लॉकों की है।
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