बखरा को जिला पंचायत ने पीएम के अमृत महोत्सव को भी नहीं छोड़ा
-42 लाख के इस अमृत सरोवर पर दो लाख भी खर्च नहीं हुआ, और पूरा हो गया भुगतान
-50 फीसद बखरा पर हुआ सल्औआ के ग्राम उमरा के अमृत सरोवर का भुगतान
-अमृत सरोवर के नाम पर जिला पंचायत के अध्यक्ष, एएमए, ईंजीनियर, जेई और ठेकेदारलूट रहें
बस्ती। बखरा के मामले में जिला पंचायत वाले किसी को भी नहीं छोड़ते, यहा तक कि पीएम तक को यह धोखा देते हैं, उनके नाम पर लाखों रुपया बंदरबांट करते है। इस बंदर बांट अध्यक्ष, एएमए, इंजीनियर, ठेकेदार और जेई की अहम भूमिका रहती है। विकासखंड सल्टोआ ग्राम पंचायत ग्राम पंचायत उमरा में जिला पंचायत से बन रहे अमृत सरोवर का हाल काफी दयनीय हो गया है। काफी समय से निर्माणाधीन छोड़कर यहां के जिम्मेदार ठेकेदार कार्य करवाना भूल गए। प्रधान ने बताया कि विगत कई माह पहले यहां पर गांव को विकास की राह पर जोड़ने हेतु अमृत सरोवर का निर्माण किये जाने का प्रस्ताव मिला था जिसके बाद लोगों को है काफी खुशी थी यहां पर बेहतर बिजली व्यवस्था,पौधारोपण, बैठने हेतु सीटिंग शेड, व स्वच्छ हवा लेने हेतु वाकिंग स्थल का निर्माण कराया जाएगा लेकिन सारा सिर्फ सपना बन कर रह गया। जिला पंचायत अध्यक्ष द्वारा उनके ठेकेदारों को कमीशन खोरी के चलते बेहतर निर्माण न करने की हिदायत दी गई या सरकारी बजट को खाली करने हेतु हल्का फुल्का कार्य करने को ही कहा गया क्या? आपको बताते चलें जनपद के प्रथम व्यक्ति कहे जाने वाले जिला पंचायत अध्यक्ष जिले के बेहतर विकास की नींव रखते हैं लेकिन दुर्भाग्य से या फिर सुनने में ही अच्छा लगता है जिला पंचायत निधि द्वारा जिले में बहुत से ग्राम पंचायत में अमृत सरोवर का निर्माण करने हेतु बजट का प्रस्ताव पेश हुआ फिर खारिज भी हो गया लेकिन जमीनी स्तर पर शून्य ही रह गया। सरकारी सुविधाओं को जमीनी स्तर पर पहुंचाने हेतु स्थानीय जनप्रतिनिधियों का सहारा लिया जाता है जिससे एक बेहतर भविष्य निर्माण हेतु कार्यों का उदाहरण दिया जा सके लेकिन अपनों से थक हारकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है।क्योंकि उन्हें अपना भविष्य अपनी आंखों के सामने दिख रहा है जिससे सरकारी धनों का बंदरबांट करने में लगे हैं। स्थानीय निवासी जगराम मौर्या,बलराम मौर्या,राम प्रीत मौर्या, ओमकार राव,ओम प्रकाश सिंह आदि ने बताया कि ग्राम पंचायत उमरा के जूनियर हाई स्कूल के सामने कुछ समय पहले जेसीबी मशीन का ट्रैक्टर के माध्यम से खुदाई का कार्य चल रहा था जिससे लोगों को लग रहा था कि अब बैठने,स्वच्छ हवा पाने हेतु इसका बेहतर तरीके निर्माण कर गांव के लोगों को सुविधा मुहैया कराई जाएगी लेकिन कुछ ही समय बाद धन का बंदरबांट होने के चलते विकास का पहिए थम सा गया। जब ग्राम प्रधान से अमृतसरोवर के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि अभी काम चल रहा है
लेकिन मीडिया टीम के पड़ताल में वहां एक भी मजदूर नहीं मिले। ऐसे में भ्रष्टाचार में ग्राम प्रधान के ऊपर भी सवाल खड़ा हो रहा है जब वह ग्राम के जनप्रतिनिधि होने के बावजूद सही जवाब देने में असमर्थ हैं तो खुद विकास की यात्रा कैसे तय करेंगे। जिला पंचायत के ठेकेदार के दबंगई से ग्राम प्रधान भी अपना मुंह खोलने से डर रहे हैं क्योंकि उन्हें विकास से नहीं उनके दबंग का डर है। थोड़ी दूर पर अमृत सरोवर के उद्घाटन का बोर्ड लगा हुआ भी पाया गया जो इस बात का संकेत देता है कि निर्माण पूरा हो चुका है।
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