आईएमए डाक्टरों को सही करे, पत्रकार और नेता खुद सही हो जाएगें!

-आईएमए के ज्वांइट सेक्रेटरी एंव मेंबर आफ स्टेट काउंसिल डा. नवीन कुमार चौधरी जब खुद एंबुलेंस से मेडिकल कालेज महामाया से टांडा के मरीज लाकर अपने अस्पताल ओमवीर हास्पिटल में आपरेशन करेंगे तो सवाल तो पूरे आईएमए पर उठेगा?

-आईएमए के पदाधिकारियों को यह नहीं भूलना चाहिए कि पीएमसी के खिलाफ शिकायत किसी नेता ने नहीं बल्कि एमओआईसी कप्तानगंज डा. अनूप कुमार चौधरी ने किया, क्या इन्होंने भी धनादोहन के लिए शिकायत किया?

-मीडिया चाहती है, कि आईएमए पहले डाक्टर्स को आइना दिखाए, नकली/अधोमानक और अधिक कीमत वाली दवाओं को मरीजों को देने से रोके, मरीजों का धनादोहन बंद करवाए

-नियम विरुद्व संचालित हो रहे प्राइवेट अस्पताल, अल्टासाउंड, पैथालाजी और एक्सरे सेंटरों को नियमित कराए या बैन लगवाए

-डाक्टर्स ही पत्रकारों और नेताओं को लिखने और शिकायत करने का मौका देतें हैं, पत्रकार और शिकायतकर्त्ता तभी सामने आते हैं, जब अनियमित घटनाएं होती

-आखिर डाक्टर्स धनादोहन करने ही क्यों दे रहें हैं, धनादोहन के मामले तभी सामने आते जब डाक्टर्स गलत होतें, किसी भी डाक्टर से कोई भी पत्रकार या नेता जबरदस्ती धनादोहन नहीं कर सकतें

-क्या आईएमए जिस तरह ओमवीर अस्पताल को क्लीन चिट दिया, उसी तरह डा. गौड़, केडी अस्पताल, सूर्या, पीएमसी, किरन सर्जिकल और केयर डायनोस्टिक सेंटर को भी क्लीन चिट देने को तैयार?

-क्या आईएमए को यह नहीं मालूम कि बेनाम पत्रकारों और नेताओं के खिलाफ डीएम कैसे कार्रवाई कर पाएगें, पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार सिर्फ पीसीआई नामक संस्था के पास

बस्ती। आईएमए के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं वर्तमान जिलाध्यक्ष डा. अनिल कुमार श्रीवास्तव की अगुवाई में एक प्रतिनिधि मंडल डीएम से मिला और उन्हें एक ज्ञापन दिया, जिसमें उन कुछ छुटभैया नेताओं और कुछ पत्रकारों के द्वारा डाक्टर्स का धनादोहन करने और आईएमए की छवि खराब करने का आरोप लगाते हुए भ्रामक खबरें प्रकाशित करने वाले कुछ पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई। ताकि सभी डाक्टर्स निर्भीकतापूर्व एवं एकाग्रता से चिकित्सीय कार्य कर सके। क्यों कि चिकित्सकों के भीतर भय और अशांति व्याप्त है। इसे लेकर आईएमए पर सवाल उठाए गए। कहा गया कि जब आईएमए के ज्वांइट सेक्रेटरी एंव मेंबर आफ स्टेट काउंसिल डा. नवीन कुमार चौधरी खुद एंबुलेंस से मेडिकल कालेज महामाया से टांडा के मरीज को अपने अस्पताल ओमवीर हास्पिटल में लाकर आपरेशन करेंगे तो सवाल तो पूरे आईएमए पर उठेगा। जब आईएमए के पदाधिकारी ही गलत काम कर रहे हैं, तो कैसे आईएमए कुछ पत्रकारों और नेताओं पर धनादोहन का आरोप लगा रहें? आईएमए के पदाधिकारियों को यह नहीं भूलना चाहिए कि पीएमसी के डा. रेनू राय के खिलाफ शिकायत किसी नेता ने नहीं बल्कि एमओआईसी कप्तानगंज के डा. अनूप कुमार चौधरी ने किया, क्या इन्होंने भी धनादोहन के लिए शिकायत किया? और क्या पत्रकार ने धनाहोहन करने का प्रयास किया? जब कि सच्चाई यह हैं, कि यह खुद धनादोहन होने को तैयार है। मीडिया चाहती है, कि आईएमए पहले डाक्टर्स को आइना दिखाए, नकली/अधोमानक और अधिक कीमत वाली दवाओं को मरीजों को देने से रोके, मरीजों का धनादोहन बंद करवाए, नियम विरुद्व संचालित हो रहे प्राइवेट अस्पताल, अल्टासाउंड, पैथालाजी और एक्सरे सेंटरों को नियमित करवााए या बैन लगवाए। कहा गया कि डाक्टर्स ही पत्रकारों और नेताओं को लिखने और शिकायत करने का मौका देतें हैं, पत्रकार और षिकायतकर्त्ता तभी सामने आते हैं, जब अनियमित घटनाएं होती। सवाल उठ रहा है, कि आखिर डाक्टर्स धनादोहन करने ही क्यों दे रहें हैं? धनादोहन के मामले तभी सामने आते जब डाक्टर्स गलत होतें, किसी भी डाक्टर से कोई भी पत्रकार या नेता जबरदस्ती धनादोहन नहीं कर सकता। डाक्टर्स अपने बचाव में धनादोहन होने देतें है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है, कि क्या आईएमए जिस तरह ओमवीर अस्पताल को क्लीन चिट दिया, उसी तरह डा. गौड़, केडी अस्पताल, सूर्या, पीएमसी, किरन सर्जिकल और केयर डायनोस्टिक सेंटर को भी क्लीन चिट देने को तैयार?

क्या आईएमए को यह नहीं मालूम कि बेनाम पत्रकारों और नेताओं के खिलाफ डीएम कैसे कार्रवाई कर पाएगें, पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार सिर्फ पीसीआई नामक संस्था के पास है। आईएमए को उन नेताओं और पत्रकारों का नाम भी देना चाहिए था, जो धनादोहन कर रहे है। चूंकि कुछ डाक्टर्स खुद सवालों के घेरें में हैं, इस लिए खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं, और न खुलकर नेताओं और पत्रकारों से पंगा लेना चाहते हैं, आईएमए डीएम के बजाए अगर यही बात प्रेसवार्ता के जरिए अपनी बात रखते तो कई चीजें स्पष्ट हो जाती, पता नहीं क्यों आईएमए पीसी करने से भाग रहा है?