• बहादुरपुर ब्लॉक को लूटने की रही पुरानी परम्परा!

-बहादुरपुर के गौसपुर में निकला भ्रष्टाचार का जिन्न, यह जिन्न हर ग्राम पंचायत में रह-रहकर निकल रहा

-आठ-दस हजार का कचरा पात्र 32549 रुपये में खरीदा, मां लक्ष्मी टेडिगं को किया भुगतान

-एक ही तिथि में पहले 15वें वित्त आयोग से 92904 रुपया और राज्य वित्त आयोग 61936 रुपया का पांडेय कांस्टक्षन से आरसीसी बेंच खरीदा, बिना बिल बाउचर के किया भुगतान, जीएसटी की भी की चोरी

-इस ग्राम पंचायत को ठोस एवं तरल अपविष्ठ प्रबंधन योजना के तहत माडल गांव चुना गया

-इस ग्राम पंचायत की महिला प्रधान का नाम अंजू को नकली प्रमुख का सबसे खास प्रधान माना जाता, ग्राम विकास अधिकारी का नाम वीरेंद्र कुमार

बस्ती। जैसे ही विकास खंड बहादुरपुर का नाम आता है, वैसे ही लोगों के जेहन में भ्रष्टाचार घूम जाता। तीन-तीन नकली प्रमुखों की याद भी लोगों को आने लगती। नीजि लाभ के लिए असली प्रमुख रामकुमार का सपा विधायक महेंद्रनाथ यादव के द्वारा अपहरण करना और उनके आवास से बरामद होना भी लोगों को यह ब्लॉक याद दिलाता है। यही वह ब्लॉक हैं, जहां के प्रधान संघ के अध्यक्ष ने नकली प्रमुखों के भ्रष्टाचार की पोल खोली। ग्राम पंचायत निधि से फाइव स्टार बीडीओ का चेंबर भी इसी ब्लॉक में बना है। यही वह ब्लॉक हैं, जिसके प्रभारी बीडीओ एवं जिला विकास अधिकारी ने फर्जी तरीके से 15 करोड़ से अधिक के मनरेगा के कच्चे और पक्के कार्यो की स्वीकृति भारी बखरा लेकर दिया। यही वह ब्लॉक हैं, जहां के बीडीओ ने एक नकली प्रमुख पर चेंबर में ही मारने और पीटने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया। इस ब्लॉक में भ्रष्टाचार के आलावा और कुछ नहीं होता, यहां पर विकास तो होता है, लेकिन कागजों में होता। यह ब्लॉक पिछले नौ साल से भ्रष्टाचार की आग में जल रहा है। पांच साल तक तो इस ब्लॉक को वर्तमान सपा विधायक महेंद्रनाथ यादव ने अपनी भाभी प्रमुख के नाम पर लूटा, उसके बाद तो ब्लॉक को लूटने का सिलसिला ही चल पड़ा। पहले सपा और उसके बाद भाजपा के तीन नकली प्रमुखों ने ब्लॉक को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे है। किस तरह एक एससी वर्ग के प्रमुख को अपने कब्जे में करके ब्लॉक को लूटा जा रहा है, अगर उसका सच देखना है, तो बहादुरपुर में देखा जा सकता है। जिस ब्लॉक में इतनी सारी खूबियां हों, वह ब्लॉक तो चर्चा में रहेगा ही। इस ब्लॉक के नकली प्रमुखों की तरह असली/नकली प्रधान भी ग्राम पंचायतों को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। कहा भी जाता है, कि जिस ब्लॉक पर तीन-तीन नकली प्रमुख का कब्जा हो, उस ब्लॉक की ग्राम पंचायतें कैसे सुरक्षित रह सकती है? अधिकांश असली/नकली प्रधान अपने नकली प्रमुखों का अनुश्रवरण कर रहें है। यानि जितना लूट सको, उतना लूटो, कोई नहीं रोकेगा, जो रोकेगा, उसे इनके आका देख लेगें। बनकटी की तरह बहादुरपुर को भी उन लालची भाजपा नेताओं को जिम्मेदार माना जा रहा है, जिन्होंने अपने लाभ के लिए पूरे ब्लॉक को भ्रष्टाचार की आग में झांेक दिया। इतिहास न तो तीनों नकली प्रमुखों और न उन लोगों को माफ करेगा, जिनके संरक्षण में यह सब कुछ हो रहा है।

बहरहाल, अब हम आपको एक नकली प्रमुख के चहेते प्रधान के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने गांव के विकास के नाम पर खूब लूटपाट मचाया। अब जरा अंदाजा लगाइए कि एक एक ही तिथि यानि 18 जनवरी 25 को पहले 15वें वित्त आयोग से 92904 रुपया और उसके बाद राज्य वित्त आयोग से 61936 सहित कुल एक लाख 54 हजार 300 रुपये का आरसीसी बेंच खरीदा और बिना बिल बाउचर के भुगतान भी कर दिया, पांडेय कांस्टक्षन पर जीएसटी चोरी का आरोप भी लगा। पूरे प्रदेश में कहीं भी कचरा पात्रदान बनवा लीजिए आठ से दस हजार में बन जाएगा, लेकिन यहां की प्रधान और सचिव ने मिलकर एक कचरा पात्रदान का भुगतान 32549 रुपया मां लक्ष्मी टेडिगं को किया। यह फर्म जेसीबी किराए पर देती है। इस कचरा पात्रदान का भुगतान ठोस एवं तरल अपविष्ठ प्रबंधन योजना के धन से किया गया, इस योजना के धन से गांव को माडल बनाना है। चयन भी यह गांव माडल के रुप में हुआ। सवाल उठ रहा है, क्या आठ हजार के सामान को चार गुना से अधिक रेट में खरीद कर कोई गांव माडल बन सकता? इसका जबाव तीनों नकली प्रमुख आसानी से दे सकते है। अगर नौ साल में एक भी ग्राम पंचायत माडल नहीं बनती तो कसूर किसका? वैसे भी इस ब्लॉक को लूटने की एक परम्परा रही है, जिसका निवर्हन हर आने वाला असली/नकली प्रमुख करता आ रहा है। परम्परा बदलने के लिए कोई भी तैयार नहीं।