गढ़मुक्तेश्वर, हापुड़: एक पेड़ मां के नाम थीम पर यूं तो आज पूरे देश में असंख्य पौधे लगाए गए हैं। गढ़मुक्तेश्वर पूर्ति निरीक्षक पूजा गुप्ता ने सभी राशन विक्रेताओं से अधिक से अधिक संख्या में पौधे लगाने का आग्रह किया। राशन विक्रेताओं ने भी सभी कार्यक्रमों की तरह इस कार्यक्रम में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। पूर्ति निरीक्षक  ने कहा.....
 मैं चाहती हूँ की आप आगे स्वयं आये और पौधे लगाए और 12 जुलाई को एक एक पौधा तो सबको लगाना है। वैसे भी थीम है एक पेड़ माँ के नाम पर मैं चाहती हूँ इस बार यह पेड़ आप अपनी समृद्धी, अपनी ख़ुशी और आप अपने स्वयं के लिए लगाए क्योकि समाज में आपकी भागीदारी बहुत ही महत्वपूर्ण हैl

राशन डीलर का दर्द

बात करें अगर राशन विक्रेताओं कि तो.... कोरोना काल रहा हो, तो हर घर वैक्सीन लगवाने में, 

यदि मिशन इंद्रधनुष रहा तो... तो बच्चों को घर-घर तक टीके लगवाने में.
यदि एस ए आर रहा हो तो..... घर-घर जाकर SIR फॉर्म बारवी जाने में.
मामला फार्मर रजिस्ट्री का आया तो किसानों के घर-घर जाकर राशन विक्रेताओं ने फार्म रजिस्ट्री में काफी मदद की.
सिर्फ इतना ही नहीं फैमिली आईडी बनवाने के लिए भी राशन विक्रेताओं ने लोगों को घर-घर जाकर जागरूक किया। 
और अब सरकार की 3 करोड़ महिलाओं को स्वयं सहायता समूह जोड़ने के लिए राशन विक्रेता लगातार सरकारी अधिकारियों की मदद कर रहे हैं। तथा राशन कार्ड धारक महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। 

लेकिन इतना सब करने के बाद भी राशन डीलरों को सैलरी के नाम पर मिलता है मात्र 90 पैसे प्रति किलो। जहां पर छोटे-छोटे गांव हैं तथा राशन कार्डों की संख्या काफी कम है इससे राशन विक्रेताओं की आमदनी का अंदाज़ तो आप आसानी से लगा सकते हैं। कुछ गांव तो ऐसे हैं जहां पर मंत्र 6 से 7000 रुपए ही राशन का कमीशन एक महीने का बनता है। तो यह कहना भी बड़ी बात नहीं है की कितनी मुश्किल से वे राशन विक्रेता अपने घर का खर्चे चलाते होंगे कितनी मुश्किल से वह अपने बच्चों को शिक्षा दे पाते होंगे। जिस प्रकार से सरकार राशन विक्रेताओं को दूसरे भिन्न कामों में लगती है उसे प्रकार सरकार को राशन विक्रेताओं का मानदेय बढ़ाने के बारे में अवश्य विचार करना चाहिए।