बनकटी/बस्ती। गांवों में मनरेगा के तहत मजदूरों को रोजगार दिलाने और उनकी हाजिरी दर्ज कराने की जिम्मेदारी निभाने वाले रोजगार सेवक आखिर अपना परिवार कैसे चलाएं, जब उन्हें आठ महीने से मानदेय ही न मिला हो? महंगाई लगातार बढ़ रही है, बच्चों की पढ़ाई और घर के जरूरी खर्चों का बोझ बढ़ता जा रहा है, लेकिन बनकटी के 58 रोजगार सेवकों के खातों में मानदेय नहीं पहुंचा है। करीब 20 वर्षों से सेवा देने वाले इन कर्मचारियों के दो वर्षों का ईपीएफ भी नहीं बना है और जो बना है, उसका भुगतान भी लंबित है। दूसरी ओर, पुराने मोबाइल से ऑनलाइन हाजिरी अपलोड करने की तकनीकी परेशानी अलग है। रोजगार सेवक संघ के अध्यक्ष सुनील भारती का कहना है कि भुगतान के अभाव में रोजगार सेवक भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि गांवों में सरकारी योजनाओं का संचालन करने वाले इन कर्मचारियों की आर्थिक परेशानियों पर जिम्मेदार अधिकारी कब ध्यान देंगे?
रोजगार सेवक संघ के अध्यक्ष सुनील भारती ने बताया कि रोजगार सेवक लंबे समय से अल्प मानदेय पर काम कर रहे हैं। महंगाई के मुकाबले उनका मानदेय पहले ही नाकाफी है। इसके बावजूद आठ महीने से भुगतान नहीं होने के कारण परिवार की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया है। करीब 20 वर्षों तक सेवा देने के बाद भी उन्हें समय से मानदेय नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि दो वर्षों का ईपीएफ भी नहीं बना है और जो बना है, उसका भुगतान भी लंबित है। रोजगार सेवकों ने कामकाज में आने वाली तकनीकी समस्याओं की ओर भी ध्यान दिलाया। उनका कहना है कि अधिकांश के पास पुराने वर्जन के मोबाइल हैं, जिनसे मनरेगा के ऑनलाइन ऐप पर मजदूरों की हाजिरी अपलोड करने में परेशानी होती है। कार्यस्थल पर मजदूरों के पहुंचने के बाद उनकी हाजिरी दर्ज कराने की जिम्मेदारी रोजगार सेवकों की होती है। मोबाइल या नेटवर्क की समस्या से हाजिरी अपलोड नहीं हो पाती तो मजदूरों की मजदूरी प्रभावित होने का दबाव भी रोजगार सेवकों पर आता है। उन्होंने कार्य की जरूरत के अनुसार नए मोबाइल उपलब्ध कराने की मांग की है। सुनील भारती ने रोजगार सेवकों के साथ कार्य के बंटवारे में भी असमानता बरते जाने का आरोप लगाया। उन्होंने इसके उदाहरण के तौर पर बेहिल गांव का मामला सामने रखा। उनका कहना है कि रोजगार सेवकों पर विभागीय कार्यों की जिम्मेदारी लगातार बढ़ रही है, लेकिन समय से मानदेय और जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। उन्होंने लंबित भुगतान का निस्तारण कराने और कार्य संबंधी समस्याओं का समाधान करने की मांग की। सर्वेश शुक्ल, जगदीश्वर आनंद, महेंद्र यादव, विजय यादव, दिनेश कुमार, शत्रुघ्न, संगीता गौड़, संतोष कुमार, अश्विनी गौतम, अनुराग, रिंकी चौधरी, अवनीश कुमार शुक्ला, अनीता त्रिपाठी, रामकिशुन और राजेश चौधरी आदि रोजगार सेवकों ने भी अपनी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने लंबित मानदेय और ईपीएफ का भुगतान जल्द कराने तथा ऑनलाइन हाजिरी के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की। इस संबंध में जिला विकास अधिकारी (डीडीओ) अजय कुमार सिंह से जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो उन्होंने बताया कि रोजगार सेवक ब्लॉक स्तर के अधिकारियों के अधीन कार्य करते हैं। मानदेय और अन्य भुगतान से संबंधित जिम्मेदारी ब्लॉक स्तर के अधिकारियों की है। उन्होंने इस मामले में संबंधित ब्लॉक अधिकारियों से रोजगार सेवकों को संपर्क करने की बात कही।
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