बस्ती। सरकार भी झुकती और निर्वाचन आयोग भी झुकता हैं, बस झुकाने वाला चाहिए। अगर झुकाने वाला एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह जैसा हो तो बड़े-बड़े को झुकने पर मजबूर होना पड़ सकता। गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना आज यानि 27 अक्टूबर 26 को होने वाली है। इसके लिए भ्रष्टाचार के आरोपों में फंसे आईएएस अधिकारी अभय पाल को पर्यवेक्षक नियुक्ति किए गए, जैसे ही इनके पर्यवेक्षक बनाए जाने की जानकारी भाजपा प्रत्याशी को हराने के लिए कमर कसने वाले बागी भाजपा एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह हुई, तो उन्होंने त्वरित भारत निर्वाचन आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग मतगणना में गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए इनके स्थान पर किसी अन्य को चुनाव पर्यवेक्षक बनाए जाने का अनुरोध किया। भारत निर्वाचन आयोग ने इसे संज्ञान में लेते हुए 26 की देर सांय को अभय सिंह के स्थान पर 2009 बैच के आईएएस अधिकारी प्रकाश बिंदु को बनाने का फरमान जारी कर दिया। इस चुनाव को इस लिए योगीजी और देवेंद्र प्रताप सिंह के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्यों कि इस सीट पर भाजपा और योगीजी की इज्जत दांव पर लगी हुई है? बुित कम देखने को मिलता है, जब कोई सत्ता दल का एमएलसी अपने ही दल को हराने के लिए हुंकार भरी हो, यह हुकांर इस लिए भरी गई, क्यों कि योगीजी की मौजूदगी में और गोरखपुर में मंच पर बैठने के लिए एमएलसी साहब का यह कर अपमान किया गया, कि आप की जगह मंच पर नहीं नीचे हैं। चूंकि इस तरह के अपमान सहने की आदत इनमें नहीं हैं, इा लिए इन्होंने बिना समय गवांए बैठक से बाहर निकल आए, और बाहर आते ही इन्होंने बागी बनने का एलान कर दिया, जब आला कमान को यह बात पता लगी और यह लगा कि अब तो गोरखपुर की सीट पार्टी हार जाएगी तो प्रदेश अध्यक्ष के जरिए मनाने का प्रयास भी किया गया, लेकिन इन्होंने साफ कह दिया कि वह इस अपमान को नहीं भूल सकते। बताते हैं, कि अगर यही प्रयास योगीजी के द्वारा किया जाता तो मामला बन सकता था। बहरहाल, एमएलसी साहब ने भाजपा प्रत्याशी को हराने के लिए अपना सबकुछ दांव पर लगा दिया, जिसका परिणाम भी इन्हें आज मिलने वाला है। अगर भाजपा गोरखपुर की इस सीट को हार गई तो यह इतिहास में लिखा जाएगा, कि अगर कोई नेता चाह जाए तो हारे हुए चुनाव को भी जीत सकता और जीतवा सकता है। अभय सिंह के हटने के बाद एमएलसी साहब के खेमे में खुषी तो हैं, और यह भी कह रहे हैं, कि यह भईया की चुनाव परिणाम से पहले की बड़ी जीत है। एमएलसी साहब ने उन नेताओं को एक सबक भी सिखाया जो चाटुकारता की राजनीति करते हैं, और अपने से छोटे का पैर छूते है।