बस्ती। ब्राहृमण महासभा के लोग सवाल कर रहें हैं, कि आखिर महामंत्री और कोषाध्यक्ष के भ्रष्टाचार को किसने बढ़ावा दिया? और वे कौन लोग हैं, जो इन दोनों के भ्रष्टाचार पर सालों तक पर्दा डाले रखा। सबकुछ जानते हुए भी क्यों नहीं समय रहते कार्रवाई की गई? क्यों ब्राहृमण महासभा को बदनामी की ओर ढकेला गया? जिन लोगों को जेल में होना चाहिए, उन्हें भ्रष्टाचार करने के लिए क्यों खुला छोड़ दिया गया?इन्हीं सब सवालों के चलते इसी अब तो अध्यक्ष पर ही अगुंली उठने लगी। विजय बिहारी ने रामानुज मिश्र को भेजे संदेश में कहा गया है, कि ब्राहृमण महासभा की इस दुर्दशा के लिए कहीं न कहीं हमारे राष्टीय अध्यक्ष अशोक कुमार षुक्ल भी जिम्मेदार है। लिखते हैं, कि ऐसा प्रतीत होता हैं, कि अध्यक्षजी की भी इन भ्रष्टाचारियों के साथ कहीं न कहीं मिली भगत है। नहीं तो नगर पालिका के चुनाव में महामंत्री के भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने के बाद अध्यक्षजी ने महामंत्री को नहीं हटाया। अगर महामंत्री को उसी समय हटा दिए होते तो ब्राहृमण महासभा की इतनी दुर्दशा न होती। कहा कि अगर अध्यक्षजी के द्वारा पुनः शंभूनाथ मिश्र को महामंत्री के पद पर आसीन न किए होते तो आज आप पर आरोप न लगता। अब तो 23 को देखना है, कि होता क्या? प्रशांत पांडेय लिखते हैं, कि 23 अगस्त अब निकट हैं, और यह बैठक ब्राहृमण महासभा के भपिष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होने जा रही है। पिछले दिनों जिन विषयों को लेकर सवाल उठे, जिन दस्तावेजों को सामने रखा गया, जिन बिंदुओं पर जबाव मांगें गए, उनके कारण आज संगठन के भीतर वास्तविक स्थित स्पष्ट होने लगी। जिन लोगों ने साहस के साथ अपी बातें रखी और तथ्यों को सामने लाने का प्रयास किया, उनका आभार है। उनके प्रयासों से अन्य लोगों का मनोबल बढ़ा है, और अब अपनी बातों को दृष्टता से रखने लगे है। कहा कि अब हमारी अपेक्षा अध्यक्षजी से है कि वे इस पूरे प्रकरण में किसी दबाव, व्यक्तिगत संबध या भावात्मक रुप से प्रभावित हुए बिना कठोर एवं निष्पक्ष और संविधान सम्मत निर्णय ले। जिन पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप है, उनके संबध में प्रस्तुत प्रमाधों और दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच हो, और आरोप साबित होने पर पद से हटाने के साथ विधिक कार्रवाई की जाए। चेतावनी के लहजें में कहा कि अगर जांच या कार्रवाई की प्रक्रिया प्रभावित करने के लिए किसी भी प्रकार का दबाव बनाया गया, भ्रम फैलाने का प्रयास किया गया, महौल बिगाड़ने की कोषिष की गई, तो संस्था की स्थित और भी गंभीर हो सकती है। आज आवष्यकता किसी व्यक्ति को बचाने की नहीं, बल्कि महासभा को बचाने की है। ऐसा निर्णय होना चहिए, कि भविष्य में कोई भी व्यक्ति भ्रष्टाचार न कर सकें, सख्त निर्णय ही मजबूत व्यवस्था की शुरुआत हैं, और मजबूत व्यवस्था ही ब्राहृमण महासभा के स्वर्णिम भविष्य की नींव बनेगी।
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